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अदालती आदेश से मां माटी मानुष की सरकार आम जनता की सत्ता में भागीदारी तय करेगी अब!

By   /  June 3, 2013  /  No Comments

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राज्य सरकार और चुनाव आयोग में समन्वय बेहद जरुरी है, वरना हालात बेलगाम होने ही वाले हैं!अराजकता का फायदा माओवादी भी उठा सकते हैं…!

 

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

बंगाल में पंचायत चुनाव हाईकोर्ट में लड़ा जा रहा है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय या प्रशासनिक फैसलों के बजाय अदालती आदेश से मां माटी मानुष की सरकार आम जनता की सत्ता में भागेदारी तय करेगी अब. नये दौर की लड़ाई में हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करके सभी पक्षों के उम्मीदवारों के नामांकन की प्रक्रिया को सुनिश्चित  करने के लिए राज्य सरकार को आदेश दिया है. हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान खास उपस्थिति रही बंगाल के पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी की.हाईकोर्ट की खंड पीठ ने ग्रीष्मावकाश के बाद राज्य चुनाव आयोग की शिकायत पर नये सिरे से सुनवाई करते हुए आज यह आदेश जारी किया है, जिसके मुताबिक राज्य सरकार को यह देखना है कि किसी भी उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने में कोई बाधा न दें. पंचायत चुनावों के लिए अपर्याप्त सुरक्षा इंतजाम और प्रसासनिक अफसरों के नियंत्रण  के मसले पर राज्य सरकार के दावे के खिलाफ चुनाव आयोग फिर हाईकोर्ट की शरण में है.सोमवार को प्रधान न्यायाधीश अरुण मिश्र और न्यायाधीश जयमाल्य बागची की खंड पीठ में राज्य चुनाव आयोग की तरफ से कुल पांच आवेदन किये गये हैं, जिनपर अब सुनवाई होनी है.kolkata-high-court

चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट से आवेदन किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग का फैसला ही अंतिम होगा, वह ऐसा आदेश जारी करें.नामांकन दाखिल करते वक्त उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी राज्य सरकार को निर्देश देने का आवेदन किया आयोग ने, जिसके मुताबिक हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी भी कर दिया.इसके अलावा  मतदान के दिन बूथों पर पर्याप्त  सुरक्षा इंतजाम, पर्यवेक्षकों की पूरी तालिका और मतदान की व्यवस्था के लिए बकाया भुगतान हेतु राज्यसरकार को आदेश देने का आवेदन किया है राज्य चुनाव आयोग ने.

कल सुबह दस बजे फिर सुनवाई होगी.

राज्य चुनाव आयुक्त मीरा पांडेय ने पहले ही चेतावनी दे रखी है कि चुनाव प्रक्रिया सुऱु होने के बाद जरुरी हुआ तो वे धारा 137 के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकती हैं. चुनाव आयोग ने औपचारिक रूप से तीन चरणों में पंचायत चुनाव कराने के लिए अधिसूचना जारी की. इसी के साथ कुल 17 जिलों में चुनाव आचार संहिता लागू हो गई. प्रथम चरण में 2 जुलाई को उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर, बांकुड़ा, पुरूलिया, हावड़ा, हुगली और व‌र्द्धमान जिले में होने वाले मदान के लिए बुधवार से नामांकन शुरू हो जाएगा. दूसरे चरण में 6 जुलाई को नदिया, मालदा, मुर्शिदाबाद और वीरभूम जिले में मतदान होगा. जिसके लिए तीन जून से नामांकन शुरु हो जाएगा. तीसरे व अंतिम चरण में 9 जुलाई को कूचबिहार, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर में मतदान होगा. इसके लिए पांच जून से नामांकन शुरू होगा. तृणमूल कांग्रेस के महासचिव व सांसद मुकुल राय ने राजनीतिक स्तर पर राज्य चुनाव आयुक्त मीरा पांडेय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. राय ने चुनाव आयुक्त पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है. उन्होंने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कुछ विपक्षी दलों के साथ चुनाव आयुक्त की सांठगांठ है. उनके कहने पर ही वह भी नामांकन के समय गड़बड़ी का आरोप लगा रही हैं.

सुकमाकांड के बाद पंचायत चुनाव में हो रही अराजकता का फायदा माओवादी भी उठा सकते हैं. केंद्र ने इसकी चेतावनी और सूचना पहले ही राज्य को दे दी है. नामांकन दाखिल होने के बाद चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद और विपक्ष के बड़े नेता,केंद्रीय मंत्री तक पर्चार अभियान में शामिल होने वाले हैं. जबकि हालात यह है कि राज्य सरकार को सुरक्षा इंतजाम के लिए अभी सत्तर हजार जवान चाहिए.पड़ोसी राज्य माओवादी खतरे से जूझ ही रहे हैं, वहां से सशस्त्र पुलिस नहीं आ रही है. देर से पत्र देने की वजह से केंद्रीय बलों की कंपनियां कब मौकों पर तैनात हो सकेंगी, कोई ठिकाना नहीं है. नेताओं की सुरक्षा इंतजाम दुरुस्त करने की कवायद शुरु होते ही गांवों में उम्मीदवारों और वोटरों के लिए कोई सुरक्षा इंतजाम की गुंजाइश नहीं बचेगी. तब क्या होगा? वित्ता मंत्री अमित मित्रा ने सूचित किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली में माओवादी समस्या पर होने वाली मुख्यमंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने नहीं जाएंगी. उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने माओवादी प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लेकर माओवाद से निपटने पर बैठक बुलाई है, जो पांच जून को होने वाली है. बनर्जी ने किन्हीं कारणों से जाने से मना कर दिया है.केंद्र चाहता है कि माओवादी प्रभावित राज्य आपस में मिलकर इस समस्या के समाधान के लिए कारगर कदम उठाएं क्योंकि जब झारखंड में हिंसक माओवादियों पर दबाव बनाया जाता है, तो वे पश्चिम बंगाल में आ जाते हैं और जब पश्चिम बंगाल में उन पर पुलिस-प्रशासन का दबाव बढ़ता है तो वे झारखंड आदि राज्यों में पलायन कर जाते हैं. बहरहाल बैठक में साझा रणनीति बनाने पर विशेष रूप से चर्चा होने की उम्मीद है.

हावड़ा संसदीय उपचुनाव के नतीजे के मुताबिक बंगाल में राजनीतिक ध्रूवीकरण तेज होना है. अभी हर उस जिले में पंचायत चुनाव को लेकर नामांकन के दौरान हिंसा की खबरें आ रही हैं, जहां अधिसूचना जारी हो चुकी है. राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार के बीच अदालती लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. सुरक्षा इंतजाम केंद्र से वाहिनी की अंततः मांग कर देने के बावजूद आधा अधूरा है. गनीमत है कि हिंसा की किसी बड़ी खबर की फिलहाल सूचना नहीं है. लेकिन नामांकन से रोकने, नामांकन वापस लेने और नामांकन के बाद प्रत्याशी से मारपीट की घटनाएं पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में हो रही है. चुनाव आयोग और सरकार में इसे लेकर बी घमासान मचा हुआ है कि प्रशासनिक अधिकारी चुनाव के दौरान किसके मातहत हैं. आयोग ने प्रत्याशियों का आय का हिसाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया है, जिसका मुख्यमंत्री ने कड़ा विरोध किया है.ऐसे में राज्यपाल भी आश्वस्त नहीं है कि चुनाव शांति से निपटेंगे. उन्होंने खुद प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की है. अब जब अदालती आदेश से चुनाव हो ही रहे हैं, तो राज्य सरकार और चुनाव आयोग में समन्वय बेहद जरुरी है, वरना हालात बेलगाम होने ही वाले हैं!

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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