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सैलाँ बनाम सैलून

By   /  June 5, 2013  /  No Comments

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– कुमार रजनीश||

जी हाँ, आज कल हमारे यहाँ दो तरह का हेयर कटिंग सैलून पाया जाता है। सबसे पहले आपको सैलाँ से रू-ब-रू करवाते हैं। जाहिर है, जो महानगर में रहते हैं, उन्‍हें ज्‍यादातर इसी ‘यूनीसेक्‍स सैलाँ’ से पाला पड़ता होगा। वेल डि‍सिप्लिन्‍ड वाले सैलाँ में घुसते ही आपका स्‍वागत एक मुस्‍कुराती हुई सुन्‍दर कन्‍या द्वारा किया जाता है। अपनी प्‍लास्टिक स्‍माईल को बरकरार रखते हुए, आपसे बहुत सारे मल्‍टीपल च्‍वाईस प्रश्‍न पूछती है – जैसे कौन-सा हेयर स्‍टाईल रखेंगे – स्‍पाईक, स्‍ट्रेट, आर्मी कट – और उसके बाद हॉलीवुड और बॉलीवुड हीरो-हिरोइन के स्‍टाईल भी।beautician-hair-dresser-for-unisex-saloon

अभी आप इस मंझधार से उबरे भी नहीं कि शेव कौन-सा कराएंगे वगैरह-वगैरह। थैंक गॉड, ये सारे ऑप्‍शन्‍स के लिए आप जवाब दे पाते हैं कि क्‍योंकि आपकी जेब के वॉलेट मोटी और गरम है। काले-काले लिबास में लंबे-चौड़े ट्रेंड हेयर स्‍टाईलिस्‍ट आपको स्‍वागत में ‘हाई’ कहते हुए गद्देदार चेयर पर बिठाते हैं। सच पूछिए तो ये किसी यमराज से कम नहीं लगते। लंबे-चौड़े शरीर वाले काले-काले ड्रेस में जब आपके कंधे को पकड़ कर धड़ाम से चेयर पर बिठाते हैं तो आपकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। वो रिसेप्‍शन वाली सुन्‍दर कन्‍या उस हेयर स्टाईलिस्‍ट को आपके कटिंग का डीटेल देती हुई आगे बढ़ जाती है। मानो मुर्गे को हलाल करने का तरीका बता दिया गया है और आपके सामने चमचमाते हुए अस्‍त्र-शस्‍त्र के साथ वो यमराज खड़ा है। वो आपको ऐसे ट्रीट करता है जैसे उसे कुछ प्रोजेक्‍ट दिया गया हो और आपके बाद उसे और भी मुर्गे हलाल करने की जल्‍दी है। यहॉं सब कुछ टार्गेट ओरियन्‍टेड है।

वहॉं पर अगर ध्‍यान दें तो सब-कुछ काला ही काला दिखाई देता है। यहॉं तक की आपको काले तौलिए से गर्दन तक लपेटा जाता है। यमराज आपके सिर को दोनो हाथों से पकड़ कभी दाऍं तो कभी बाएं मोड़ता है। आप एकदम मौन हैं क्‍योंकि अगल-बगल में कुछ सुन्‍दर-सी दिखने वाली महिलाएं भी अपने बाल कटवा रही हैं या फेस मसाज करवा रही हैं। समस्‍या सबसे ज्‍यादा तब होती है जब आपको उसी समय कहीं खुजली करने का मन होता है, परन्‍तु आप उस काले लिबास वाले यमराज के सामने बेबस हैं और लाचार बैठे हैं। आपके बाल काटने के दौरान आप शायद ही कभी इतने शांत और स्थिर हुए होंगे। शायद अपने स्‍कूल की एसेम्‍बली में भी आप शरारत करने से बाज आए हों। प्रिंसिपल – टीचर सब खड़े हैं, प्रा‍र्थना करने के लिए तैयार – एकदम सावधान मुद्रा में तभी आपने या आपके पीछे खड़े आपके परम मित्र ने जूते से आपके जूते को टकराया हो, या फि‍र प्रार्थना के लिए हाथ जोड़े हुए मुद्रा में आपके पीठ पर उँगली की हो। खैर, स्‍कूल की शरारतों के फ्‍लेशबैक से बाहर आते हैं और फि‍र से सैलॉं में प्रवेश करते हैं।
इस यूनीसेक्‍स सैलाँ का नज़ारा भी अजीब होता है। आपके बाल कट रहे हैं वो भी आपके पसंद के परन्‍तु जो संगीत बज रहा है वो उसके विपरीत माहौल का है। ऑपेरा या ऐसी धुन जो आपकी समझ से बाहर है या हम लोगों के लिए कोई दुःखी गाने की धुन के समान। बीच-बीच में ऑटोमेटिक रूम फ्रैशनर अजब-गजब की खुशबु बिखेरती है जो पूरे सैलॉं को अंग्रेजी माहौल में तब्‍दील कर देती है। इसकी खुशबु इतनी तेज है कि छींक आना तो लाज़मी है, परन्‍तु आप यहॉं अगर खुल कर छींक लें तो लोग ऐसे देखेंगे मानों आपने दुनिया की कोई आठवां आश्‍चर्यचकित करने वाला काम कर दिया हो। सबकी नज़रें आप ही को घूरती हैं। तभी एक चालीस-पैंतालीस की ऑंटी – पीले टी-शर्ट और हरे (तोतापुरी) रंग की टाईट जींस में अन्‍दर पधारती हैं। पूरी तरह से सजी-धजी, फैट की दुकान, अपने साथ लिए (ये जैसे खाते-पीते घर की निशानी है) मेरे यमराज (हेयर स्‍टाईलिस्‍ट) को कुछ यूँ पुकारती है “हाई ऐलिक्‍स, हाऊ आर यू डूईंग ?” – एक गद्देदार चेयर पर धड़ाम से बैठ जाती हैं। चेयर के तड़प को कोई भी भली-भाँति देख और महसूस कर सकता है। “यू नो ऐलिक्‍स, मेरे जो हेयर तुमने कर्लि किए थे न, ये फि‍र से स्‍ट्रेट हो गए। नाऊ यू डू पम्मिंग ओके ?” – “येस, मैडम” ऐलिक्‍स ने अपने जबड़े को फैलाते हुए लंबी स्‍माईल दी और जवाब दिया। एक बात तो तय हो गयी कि ये स्‍टाईलिस्‍ट भी स्‍टाईल देख कर अपना रंग बदलते हैं। फि‍र से उसने आपकी ओर ध्‍यान दिया और अपने चेहरे की सारी मांस-पेशियों को एकत्रि‍त कर गंभीर चेहरा बना आपकी गर्दन को जोर से दबा, अपनी कैंची से आपके बालों को काटने लगा। इस समय ऐसा लग रहा था मानों जैसे उसकी कैंची की आवाज आपको चिल्‍ला–चिल्‍ला कर गाली दे रही है। खैर साहब, किसी तरह से अपने बालों को त्यागते हुए नये लुक के साथ, सीने को चौड़ा किए, आप 1000 रु. का नोट आगे करते हुए उपर से रिलैक्‍सड और अन्‍दर से टेन्‍स्‍ड महसूस कर रहे हैं। 200 रु. चेंज के साथ एक ‘थैंक यू’ नोट साथ में मिलता है। उसी प्‍लास्‍ट‍िक स्‍माईल के साथ फि‍र से हलाल होने के लिए – विज़िट अगेन का बड़ा सा टैग शीशे के गेट पर दिखने लगता है। लुटे-लुटाए आप अपनी गाड़ी में घर के लिए प्रस्‍थान कर जाते हैं।
सीन बदलता है और परिदृश्‍य भी। अब आप एक छोटे शहर के देसी हेयर कटिंग सैलून में हैं। बबलू हेयर कटिंग सैलून। इस सैलून के बारे में क्‍या कहें। वाह ! इसके माहौल के क्‍या कहने – अन्‍दर घुसते ही सलमान, अजय देवगन, आमिर, कैटरिनाकैफ, करीना, राखी सावंत जैसे सारे बॉलीवुड स्‍टार आपके स्‍वागत के लिए तैयार पोज़ में दीवारों पर दिख जाएंगे। आप भी इन्‍हें देखकर एक स्‍टार जैसा होने का आभास करेंगे। सैलून वाले भी आपको स्‍वागत अपने ही अंदाज में करते दिखाई देंगे। नमस्‍कार साहब, कैसे हैं? बहुत दिन से दिखाई नहीं दिए? कहीं कोई विदेश यात्रा पर थे क्‍या? अपने कंधे से हेयर कलर के दाग़ लगे सफेद तौलिए से लाल कुर्सी को झाड़ते हुए आपको बैठने के लिए आमंत्रण देंगे। अपनत्‍व की पूर्ण भावना से वह रेडिओकी आवाज़ को बढ़ा देते हैं। आहा बहुत ही सुन्‍दर गीत बज रहा है… ‘साथिया नहीं जाना के जी न लगे.. मौसम है सुहाना के जी ना लगे…।’ मन गदगद हो गया इस आव-भगत से। सर, बाल बनवायेंगे या दाढ़ी? इसी बीच गुटखे की एक पुड़िया मुँह में डालते हुए, बबलू अपने उस्‍तरे, कैंची, कंघी को फि‍र से एक बार उसी जगह पर रखेगा। अगर आप ध्‍यान से देखें तो सारे विदेशी ब्रांड की क्रीम, लोशन, शेविंग क्रीम के डुप्‍लीकेट वहां पर दिखाई देंगे। जैसे डेटॉल की जगह वेटॉल या सेवलॉन की जगहमेलॉन, जिलेट ब्‍लेड की जगह मिलेट ब्‍लेड, पांड्स पावडर की जगह कोई खुश्‍बुदार पावडर, इत्‍यादी।
उनके जो बड़े-बड़े शीशे लगे होते हैं वो भी जीवंत से होते हैं। एक स्‍टीकर लगा होगा जिसमें दो कबूतर एक दिल पकड़े होंगे या फि‍र एक बड़े से दिल में तीर लगा होगा और खू़न गिर रहा होगा। ऐसा प्रतीत होता है जैसे ये सैलून वाले ज्‍यादातरदिलजले हों। कभी प्‍यार में हार का सामना किया हो। एक बड़ा सा पोस्‍टर लगा होगा जिसमें एक लड़की पीले दुपट्टे को अपने सिर पर रखे नदी किनारे बैठकर किसी का इंतजार कर रही हो और उस पोस्‍टर पर लिखा है – तुम कब आओगे।
इस तरह के हेयर कटिंग सैलून की सामग्री आपको अपने अतीत में ले जाने के लिए काफी है। इस सैलून में आपको सब कुछ अपना-सा दिखता है। शीशे के सामने लाल रंग के गद्दे वाली कुर्सी पर आप महाराजा की तरह बैठ गए हैं। स्‍वागत में सबसे पहले आपको एक सफेद चादर या तौलिये से गर्दन तक कवर कर दिया जाता है। आपसे कटिंग के लिए कुछ आप्‍शन्‍स पूछे जाते हैं और उत्तर भी खुद ही दे दिया जाता है। आप एक दम निश्चिंत हो, चौड़े में, बाल कटवाने बैठ गए हैं। इसी बीच खुजली करने का मन करता है.. “ऐ बबलू…” बबलू हड़बड़ाते हुए अपनी स्‍पीड को ब्रेक लगाता है.. “जी.. जी.. सर ” “अरे भाई जरा तौलिया हटाना कुछ लगता है अन्‍दर काट रहा है।“ आप इत्मिनान से खुजला कर अपने आपको रिलैक्‍स्‍ड महसूस करते हैं फि‍र आदेश देते हैं कि सेवा चालू की जाए। बबलू आपको आपके चेहरे से पहचान जाता है कि आपको कसी तरह की परेशानी है या फि‍र कुछ चाहते हैं आप। तभी वो आपसे तपाक से पूछता है “सर … मच्‍छर तो नहीं काट रहा? सर, बगल में नाला खुला हुआ है न.. सब साला इधर ही आ जाता है खू़न चूसने। अभी रुकिए कछुआ छाप जला देते हैं।” वो मच्‍छर भगाने वाले धूप को जला कर ठीक आपके पैरों के नीचे रखता है जिससे आपको मच्‍छर परेशान न कर सके। फि‍र से आपकी हजामत बनाना शुरू। कुछ ग्राहक और भी बैठे हैं, वहां बैंच पर। एक आज के अख़बार को पढ़ते हुए बोल रहा है कि मंहगाई को डायन ने खा लिया है, रुकने का नाम ही नहीं है। बबलू भी किसी बॉलीवुड हीरो से कम नहीं है। आपके बाल काटते हुए अपने अन्‍य ग्राहकों का भी मनोरंजन करने में लगा है। उसने अपने अख़बार वाले ग्राहक को जवाब देते हुए कहा कि “हमारे गाँव में एक बाबा थे जो डायन भगाते थे। जब वो नीम के डाल से उस डायन की पिटाई करते थे तो सब तरह के भूत-प्रेत गायब। बड़ेपँहुचे हुए बाबा थे। सुना है अन्‍त में वो बाबा किसी डायन के प्‍यार के चक्‍कर में पड़ गए और एक दिन खुद ही उसके साथ गाँव के एक पोखरा में डूब कर जान दे दिये।” आप इस कहानी से अभी अपने आप को निकाल भी नहीं पाते हैं और एक जोर की छींक आती है। “अरे क्‍या छिड़क दिया रे… बड़ी बदबू आ रही है”। बबलू डरते हुए कहता है “कहाँ कुछ छिड़के हैं… इ तो कछुआ छाप का धुआँ है मालिक। अच्‍छा है सर, इससे आपको का कहते हैं … मलेरिया-फलेरिया नहीं होगा, आप आराम से बैठिए”।
जाहिर है जितने ग्राहक उतनी तरह की पसंद। एक ग्राहक और आया और बबलू के टेप रिकार्डर के गाने को बदलते हुए अलताफ़ राजा का गाना ‘तुम तो ठहरे परदेसी… साथ क्‍या निभाओगे’ लगा देता है और आवाज भी बढ़ा देता है। वाह… सारे दिलजले आज ही इकट्ठा हुए हैं। आपको बीच में ही पान खाने की तलब होती है “ऐ बबलू जरा उस भोला की गुमटी से एक मगही पान लेते आना… खुदरा पैसा है न? और सुन कत्‍था, जर्दा और 500 नम्‍बर भी डलवा लेना और सुनो एक छोटी इलायची और लौंग भी ले लेना। चूना अलग से लेना।” बाप रे बाप ये खुल्‍ले पैसे में पान के साथ-साथ इतने आइटम भी मिलते हैं… गजब। बबलू आपको छोड़ कर भोला पान भंडार के गुमटी पर जा आपके लिए पान भी बनवाता है और लटकते हुए अलग-अलग तरह के गुटखे में से अपने लिए मनपसंद “राज-दरबार” गुटखा फाड़ता है। बबलू आपको पान देते हुए उसमे डली सामग्री के बारे में बताता है। आप पान की गिलौरी मुँह में दबाते हुए एक बार फि‍र से कटिंग के लिए तैयार हैं। “सर.. पीछे से बराबर रखेंगे या गोल कर दें?” आपसे ऑप्‍शन पूछता है। “ये लो सर जी… आपकी हजामत बन गई।” आप उसे हेड मसाज करने के लिए बोलते हैं। नवरत्‍न तेल के छोटे से पाउच को फ़ाड़ते हुए आपके सिर पर गिराता बबलू चंपी शुरू करता है और आप इसी के साथ दूसरी दुनिया की सैर पर चले जाते हैं। आपके इस दुनिया में सभी और रूई का पहाड़, रूई की ज़मीन, फूल-बगीचे सब रूई की तरह ही दिखता है, हल्‍का महसूस होने लगता है। बबलू की उंगलियाँ आपके सिर पर जादू कर रही हैं। आप पूरी तरह रिलैक्‍स्‍ड महसूस कर रहे हैं। हल्‍का… एकदम हल्‍का। बिल्‍कुल वेटलैस। आप पान की पीक को उस खुले नाले में थूकते हुए बबलू को पचास का नोट थमाते हैं और बबलू पूछता है “जी..सर खुल्‍ला नहीं है?” और वो अपने गल्‍ले में लगे लोहे के छोटे ताले को अपने जनेउू में बंधी चाबी से खोलते हुए 30 रुपए आपको वापस देता है। आप भी बिना पूछे कि पान का कितना पैसा हुआ?, 30 रुपए अपने चेट में दबाते हुए वहाँ से महाराजा की तरह निकलते हैं। बबलू आपको बड़े ही आदर से फि‍र जल्‍द ही आने का न्‍यौता देते हुए नमस्‍ते करता है।
अब आप खुद ही तुलना करें कि सैलाँ और बबलू हेयर कटिंग सैलून में क्‍या अन्‍तर है?
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  • Published: 4 years ago on June 5, 2013
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  • Last Modified: June 6, 2013 @ 2:59 pm
  • Filed Under: देश

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