/सामूहिक बलात्कार के बाद छात्रा की हत्या से आक्रोश

सामूहिक बलात्कार के बाद छात्रा की हत्या से आक्रोश

बारासात में जंगल राज, फिर सामूहिक बलात्कार के बाद छात्रा की हत्या से नाराज लोगों ने मंत्री को घेरा, विधायक और सांसद की गाड़ी तोड़ दी…

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​||

पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना जिले के बारासात पुलिस थाना क्षेत्र में पुलिस ने शुक्रवार रात कालेज की एक छात्रा का शव बरामद किया है और आशंका है कि बलात्कार के बाद उसकी हत्या की गई है. बारासात में जंगल राज कायम है. बारासात और बैरकपुर की दूरी कुछेक किमी है. सीधे सड़क से जुड़ें दोनों शहरों का फासला तेज शहरीकरण के कारण निरंतर घट रहा है और दोनों नगर इस वक्त बंगाल में कानून व्यवस्था का पर्याय बने हुए हैं.rape1

बैरकपुर में जहां तृणमुलियों के आपसी फसाद में पत्रकारों की जमकर पिटाई हो गयी और उन्हें जिंदा जला देने की कोशिश हुई वहीं बलात्कार नगरी के नाम से कुख्यात बारासात में छात्रा की सामूहिक बलात्कार के बाद स्थितियां इस कदर अग्निगर्ब हो गयी हैं कि बंगाल में माकपाइयों के खिलाफ जहर उगलने के लिए मशहूर खाद्यमंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक जनरोष से घिर गये. यहीं नहीं, उबल रही जनता ने तृममूल सांसद की गाड़ी में भी तोड़ पोड़ कर दी.लोगो ने विधायक की गाड़ी में भी तोड़फोड़ कर दी. अगर यही हाल रहा तो तृणमूल कांग्रेस आत्मघाती संघर्ष में ही साफ हो जायेगी, विपक्ष को कुछ करने की जरुरत ही नहीं है.

आज सुबह से उग्र जनता ने खड़ीबाड़ी राजडारहाट मार्ग रोक रखा है. यह इलाका अल्पसंख्यक समुदायों की आबादी वाला है और इसलिए पंचायत वोट के मद्देनजर जनता को मनाने मौके पर तऋणमूल के धमाकेदार मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक,बशीरहाट के तृणमूल सांसद हाजी नुरुल इस्लाम से लेकर विधायक ौर पार्टी के तमाम नेता मौके पर पहुंच गये, जिनकी उनके ही समर्थकों ने दुर्गति कर दी.इलाके में भारी सुरक्षा इंतजाम के बावजूद तनाव बरकरार है.

उत्तर चौबीस परगना जिला मुख्रायालय बारासात यौन उत्पीड़न के लिए कुख्यात है. वहां महिलाओं के लिए रात को घर से बाहर निकलना मुश्किल है. बारासात शहर में ही २०११ में १४ फरवरी की रात कचहरी मैदान के पास रेलवे स्टेशन से घर जाते हुए अपनी कामकाजी दीदी को बचाने की​​ कोशिश में माध्यमिक परीक्षार्थी राजीव दास की हत्या कर दी गयी थी, फर्क इतना भर है कि तब राज वाम मोर्चा का था. पर सत्ता में बदलाव के बाद बारासात में गुंडाराज पर कोई फर्क नहीं पड़ा. गुंडों के संरक्षक जरुर बदल गये.

पुलिस सूत्रों ने बताया कि बारासात कालेज की द्वितीय वर्ष की छात्रा  जब शुक्रवार अपरान्ह्र परीक्षा देने के बाद घर नहीं लौटी तो उसके अभिभावकों ने छात्रा की तलाश शुरू की. इसके बाद शाम को कुछ स्थानीय लोगों ने कामदानी इलाके की एक मछली भेड़ी के पास उसके शव को देखा और इसकी सूचना पुलिस को दी. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि छात्रा की सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या की गई है. पुलिस जब मौके पर पहुंची तो ग्रामीणों ने शव को सौंपने से इनकार कर दिया और दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग की. उग्र भीड़ ने प्रदर्शन करके पुलिस जीप समेत कुछ वाहनों को भी क्षतिग्रस्त कर दिया. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. आम जनता का प्रदर्शन लगातार बढ़ता जा रहा है और हालात बेकाबू होते जा रहे हैं.पुलिस ने अभी इस सिलसिले में तीन लोगों को हिरासतक में लेकर पूछताछ कर रही है. लेकिन लगातार बलात्कार और महिला उत्पीड़ने की वारदातों से पूरे बारासात में जनता सड़कों पर उतर रही है.

हाल ही में दिल्ली सामूहिक बलात्कार कांड के विरोध  में  मुखर कोलकाता भी मां, माटी और मानुष सरकार की मुखिया अग्निकन्या ममता बनर्जी ने दिल्ली की पीड़िता की मौत पर शोक जताते हुए कहा  था कि बंगाल में ऐसा हुआ, तो कड़ी कार्रवाई करेंगी. उन्होंने इससे पहले दावा किया कि महिलाओं पर अत्याचारों के मामले में सजा दिलाने में बंगाल अव्वल नंबर पर है. लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है. जहां महिलाओं पर अत्याचारों के मामले में बंगाल एक नंबर पर है, वहीं सजा दिलाने में पंद्रहवें नंबर पर. दिल्ली सामूहिक बलात्कार की शिकार पीड़िता की मौत से जब सारा देश शोकस्तब्ध था, कोलकाता में भी मोमबत्तियों के साथ सड़कों पर उतर रहे थे लोग, तब कोलकाता से कुछ ही दूरी पर बारासात में ४५ साल की एक महिला की सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या कर दी ​​गयी. बैरकपुर बारासात मुख्यसड़क के पास बारासात थाना अंतर्गत नीलगंज रोड के निकट एक ईंट भट्ठे पर तालाब के किनारे पैंतालीस साल की एक महिला की लाश पुलिस ने बरामद की. इस महिला से उसके पति के सामने ही सामूहिक बलात्कार किया गया. पत्नी को बचाने में नाकाम पति पर भी जानलेवा हमला किया गया. बलात्कार की शिकार मृतका जगन्नाथपुर सोनाखरकि ईंटभट्ठे में ही काम करती थी.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.