/बाड़मेर यात्रा में टेंशन में दिखे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत…

बाड़मेर यात्रा में टेंशन में दिखे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत…

रिफायनरी के लिए जमीन अवाप्ति पर गहलोत खामोश 

 

-चन्दन सिंह भाटी||

बाड़मेर राज्य के मुखिया सरहदी जिले बाड़मेर में सन्देश यात्रा के दौरान आये . दो सभाओं को संबोधित किया . मुख्यमंत्री पहली मर्तबा बाड़मेर यात्रा के दौरान काफी परेशां और टेंशन में दिखे. अशोक गहलोत के चेहरे पर  तनावों की लकीरें बयान कर रही थी कि बाड़मेर की राजनीति में उनके लिए कुछ भी अनुकूल नहीं हें . बाड़मेर की जाट राजनीति ने गहलोत की परेशानी बढ़ा दी  है. कभी अपने संबोधन में अपने घुर विरोधी कर्नल सोनाराम चौधरी का नाम तक नहीं लेने वाले गहलोत ने गुडा और बाड़मेर की सभाओं में तारीफ़ की वहीं उनके साथ बेठे सांसद ,राजस्व मंत्री की अनदेखी करते नज़र आये ,अक्सर अपने भाषणों में सांसद हरीश चौधरी की जैम कर तारीफ़ करने वाले गहलोत ने उनका नाम लेना भी उचित ना समझा हमारे संसद कह कर ही अनमने से संबोधन  दिया बाकी जाट नेताओं के उन्होंने नाम तक नहीं लिए . आने वाले विधानसभा चुनावों में जाट राजनीति की आहट शायद गहलोत ने सुन ली हें .गहलोत को जाट नेताओ और जाट  नेताओं को गहलोत पर भरोसा नहीं रहा .अक्सर बाड़मेर यात्रा के दौरान खुशमिजाज़ रहने वाले गहलोत अपसेट नज़र आये . बहूत कम लोगो से मिले .अपने चहेते विधायक मेवाराम की जरुर जैम कर तारीफ़ की. Chief-Minister-Ashok-Gehlot-birthday-456hkl456456gk456dgjk1

साथ ही पुरे राज्य में रिफायनरी को मुद्दा बनाने वाले गहलोत ने रिफायनरी स्थल बाड़मेर में कुछ नहीं बोला .लोगो को उम्मीद थी गहलोत रिफायनरी के स्थान परिवर्तन पर जरीर बोलेंगे .मगर ऐसा नहीं हुआ .गहलोत बाड़मेर की राजनीति में आ रहे बदलाव की आहट शायद सुन चुके हें.

राजस्थान इतिहास के अब तक सबसे बड़े प्रोजेक्ट  रिफायनरी के लिए जमीन अवाप्ति को चल रहे विवाद के बीच ही सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जालोर ,बाड़मेर और जैसलमेर आकर चले गए लेकिन रिफायनरी के लिए जमीन अवाप्ति को लेकर एक शब्द भी नहीं बोलो दरसल बाड़मेर की जनता और कांग्रेस के नेताओ को यह उम्मीद थी कि रिफायनरी के लिए जमीन अवाप्ति को लेकर चल रहे विवाद पर अशोक गहलोत अपने पते साफ़ करेगे लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ अब एक बात तो साफ़ है कि सरकार की यह मंशा थी कि रिफायनरी का जून महीने के अंत तक शिल्यानस  हो जाए लेकिन भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया में हो रही देरी के चलते अब यह जून महीने के अंत तक शिल्यानस खटाई पड़ता नजर आ रहा है.

पिछले दो तीन महीनो से कांग्रेस अपनी सन्देश यात्राओं में और जन सभाओ में इस बात का गुणगान कर रही है कि बाड़मेर में राजस्थान की पहली रिफायनरी लगने जा रही है वही रिफायनरी के लिए जमीन अवाप्ति को लेकर पिछले करीब दो महीनो से विवाद चल रहा है सरकार जब रिफायनरी को घोषणा कि थी उस वक्त बायतु इलाके के लिलाला गाव को चुना गया था उसके बाद वहा के किसानो ने  जमीन अवाप्ति के विरोध में आन्दोलन किया था लेकिन बाद 24 सूत्री मागो पर जमीन  देने को राजी हो गए थे लेकिन मुआजे की रकम एक करोडो प्रति बीघा रखी उसके बाद सरकार पचपदरा में सरकार जमीन का सर्वे करवाया जा रहा है सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बाड़मेर यात्रा से पहले इस बात के क्र्यास लगाए जा रहे थे कि गहलोत इस विवाद का कोई हल निकाल सकते है लेकिन गहलोत तो अपनी बाड़मेर यात्रा के दोहरान  रिफायनरी के लिए जमीन अवाप्ति पर पूरी तरीके से खामोश रहे.

रिफायनरी के लिए जमीन अवाप्ति चल रहे विवाद को देखते हुए गहलोत से जब बाड़मेर मडिया और जैसलमेर मडिया ने बातचीत करनी चाही तो मीडिया से गहलोत ने दुरी बना ली क्योकि गहलोत को  भी इस बात का अंदेशा था कि मडिया जमीन अवाप्ति मामले में गहलोत की राय जानने के बारे में सवाल जरुर पूछेगे.

रिफायनरी के लिए जमीन अवाप्ति को कांग्रेस के विधायक और राजस्थान के कदावर जाट सोनाराम चोधरी ने खुला एलान कर रखा है कि रिफायनरी तो बायतु में ही लगेगी इस बीच यह भी खबर है कि बाड़मेर के कांग्रेस के नेताओ ने रिफायनरी के लिए जमीन अवाप्ति को लेकर  सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बातचीत भी की है.

रिफायनरी के लिए जमीन अवाप्ति का मामला इतना उलझ गया है कि अगर रिफायनरी पचपदरा में लगती है तो कांग्रेस को विधानसभा और लोकसभा चुनाओ में नुकसान हो सकता है इसलिए अब गहलोत को न तो खाते बन रही है और न है उगलते.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.