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आरएसएस ने कहा, आडवाणी का इस्तीफा दुर्भाग्यपूर्ण!

By   /  June 10, 2013  /  3 Comments

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भाजपा में दरार हुई जगजाहिर, आडवाणी ने छोड़े सभी पार्टी पद.. लोस चुनाव के लिए ममता का तीसरे मोर्चे का आह्वान…आडवाणी का इस्तीफा देश के लिए शुभ संकेत : कांग्रेस….

 

-पलाश विश्वास||

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हिंदूराष्ट्र के संघ परिवार का  अश्वमेध यज्ञ बाधित हो गया. आडवाणी ने बीजेपी कार्यकारिणी, संसदीय बोर्ड और चुनाव समिति से इस्तीफा दे दिया है. हिंदुत्व के देवादिदेव लालकृष्णआडवाणी के महाविद्रोह से संघपरिवार , उसका राजनीतिक अवतार भाजपा और केंद्र में सत्ता का प्रबल दावेदार राजग एकमुशत संकट में हैं. इसी के मद्देनजर बंगाल से अग्निकन्या ममता बनर्जी ने झटपट तीसरे मोर्चे का आव्हान भी कर दिया है. देश के लिए हिंदू राष्ट्र निश्चय ही सबसे खतरनाक है, लेकिन किसी भी मायने में कांग्रेस का अमेरिकापरस्त जनविरोधी बाजारु नरसंहार राज को बहाल रखने का यह कोई बहाना नहीं हो सकता. इसलिए तीसरे मोर्चे की अपील सकारात्मक है, बशर्ते खुद ममता बनर्जी और दूसरे क्षत्रप और खासकर वामपंथी, समाजवादी, अंबेडकरवादी अपनी अपनी महात्वाकांक्षाओं और पूर्वाग्रहों का विसर्जन देकर इस राष्ट्रीय संकट के नाजुक मौके पर अपनी जनप्रतिबद्धता साबित करें और राष्ट्र को एक सही विकल्प दैं. modi-adwaniआडवाणी अगर अपने फैसले पर अटल रहते हैं, तो यह उपयुक्त अवसर है तीसरे मोर्चे का गठन करके कांग्रेस और संघपरिवार की मिलीजुली नरसंहार संस्कृति के अंत करने का. क्या इसके लिए भारतीय राजनीति तैयार है? गौरकरें,आडवाणी ने लिखा ‘मुझे अब नहीं लगता कि ये वही आदर्शवादी पार्टी रह गई है जिसकी नींव डॉ. मुखर्जी, पंडित दीनदयाल जी, नानाजी देशमुख और वाजपेयी जी ने डाली थी. वो पार्टी तो सिर्फ देश और उसके लोगों की चिंता करती थी. अब तो हमारे ज्यादातर नेता सिर्फ अपने व्यक्ति एजेंडे की चिंता कर रहे हैं.’आडवाणी ने ये शब्द उस दौर में लिखे गए हैं जब गोवा में मौजूद पार्टी नमो नमन में डूबी हुई थी. आडवाणी की नाराजगी के बावजूद पार्टी के हिंदू पोस्टर बॉय नरेंद्र मोदी को 2014 आम चुनाव की कमान सौंप दी गई. एक तरह से ये जता दिया गया कि आडवाणी को अच्छा लगे या बुरा. मोदी ही अगले चुनाव में पार्टी का चेहरा होंगे. आडवाणी जी को पार्टी नेता बीमार करार देते रहे लेकिन आडवाणी ने इस्तीफा देकर साफ कर दिया कि मोदी नाम का कांटा उनके सीने में गहरे तक गड़ा हुआ है.

भाजपा के संस्थापक सदस्य और अटल बिहारी वाजपेयी के बाद पार्टी के सबसे मजबूत स्तंभ 85 वर्षीय आडवाणी ने पार्टी के सभी मुख्य संगठनों-संसदीय बोर्ड, राष्ट्रीय कार्यकारिणी और चुनाव समिति से सोमवार को इस्तीफा दे दिया. लालकृष्ण आडवाणी को मनाने के क्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी के इस वरिष्ठ नेता से बात की है और उनसे अपने इस फैसले पर दोबारा विचार करने के लिए कहा है.बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने जहां लाल कृष्ण आडवाणी के इस्तीफे को स्वीकार करने से इंकार कर दिया है, वहीं पार्टी के अन्य नेताओं ने आडवाणी को इस्तीफा वापस लेने के लिए मना लेने की बात कही है! माना जा रहा है कि मोदी के विरोध में उन्होंने अपना इस्तीफा भेजा है. आडवाणी ने अपना इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को भेजा है. आज सुबह राजनाथ सिंह आडवाणी से मिलने उनके घर भी गए थे. लेकिन वो आडवाणी को मनाने में नाकाम साबित हुए. फिलहाल राजनाथ सिंह ने आडवाणी का इस्तीफा मंजूर नहीं किया है. आडवाणी के घर पर नेताओं का जमावड़ा है और उन्हें मनाने की कोशिश जारी है.दरअसल वो इंसान जिसके रथ ने उत्तर भारत में बीजेपी की लहर चलाई, वो इंसान जिसके रथ पर चढ़कर भारतीय जनता पार्टी सिर्फ 2 सीटों से सत्ता के द्वार तक जा पहुंची. उस इंसान ने 86 साल की उम्र में भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया. आडवाणी ने अपने इस्तीफे के साथ ही पार्टी विद ए डिफरेंस की धज्जियां उड़ा दीं. साफ कह दिया कि जो पार्टी कुछ वक्त पहले तक आदर्शों पर चलती थी आज कुछ नेताओं की व्यक्गित इच्छाओं पर चल रही है. आडवाणी ने बीजेपी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को भेजे 15 पंक्तियों के इस्तीफे में जैसे पार्टी में पनपे मोदीवाद पर गहरा अफसोस और नाराजगी जताई.modi-and-advani-jpg

मोदी ने ट्विटर पर कहा, ‘मैंने आडवाणीजी से फोन पर लंबी बातचीत की. मैंने उनसे इस्तीफे पर अपना फैसला बदलने के लिए अनुरोध किया है.’

आडवाणी जी से इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध किया है: मोदी

मोदी ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि वह पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं को निराश नहीं करेंगे.’ आडवाणी के इस्तीफे के बाद नरेंद्र मोदी की यह पहली प्रतिक्रिया है.

माना जा रहा है कि उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को पार्टी की चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने के विरोध में यह कदम उठाया. भाजपा में दरार आज खुलकर सामने आ गई, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने पार्टी के तमाम पदों से इस्तीफा दे दिया.

भाजपा के संस्थापक सदस्य और अटल बिहारी वाजपेयी के बाद पार्टी के सबसे मजबूत स्तंभ 85 वर्षीय आडवाणी ने पार्टी के सभी मुख्य संगठनों-संसदीय बोर्ड, राष्ट्रीय कार्यकारिणी और चुनाव समिति से आज इस्तीफा दे दिया.पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को भेजे अपने त्यागपत्र में आडवाणी ने कहा कि भाजपा अब वह आदर्शवादी पार्टी नहीं रही, जिसकी स्थापना श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय, नानाजी देशमुख और वाजपेयी ने की थी. याद रहे कि राजनाथ सिंह ने ही कल मोदी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाने का ऐलान किया था.

आडवाणी ने कहा, ‘‘पिछले कुछ समय से मैं पार्टी के मौजूदा कामकाज और वह जिस दिशा में जा रही है इसके बीच सामंजस्य बिठा पाने में कठिनाई महसूस कर रहा था.’’

अपने एक पृष्ठ के इस्तीफे में आडवाणी ने लिखा, ‘‘हमारे अधिकतर नेताओं को इस समय अपने निजी एजेंडा से मतलब है.’’

आडवाणी ने गोवा में आयोजित पार्टी के तीन दिन के सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया था और इसकी वजह अपनी खराब सेहत को बताया था. यह पहला मौका है जब आडवाणी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और उससे पहले होने वाली पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में शामिल नहीं हुए.

त्यागपत्र में आडवाणी ने कहा, ‘‘अपने पूरे जीवन में मुझे जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के साथ काम करके अपने लिए महान गर्व और अनंत संतोष का अनुभव हुआ.’’

नरेन्द्र मोदी को भाजपा की चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाये जाने के बाद वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा पार्टी के तमाम पदों से इस्तीफा देने को ‘ दुर्भाग्यपूर्ण ’ करार देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उम्मीद जताई कि भाजपा के लोग उन्हें मना लेंगे.

संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है. भाजपा के लोग उन्हें मना लेंगे, ऐसा लगता है. वह वरिष्ठ नेता हैं. गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी में दरार खुलकर सामने आ गई, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता आडवाणी ने पार्टी के तमाम पदों से इस्तीफा दे दिया. माना जा रहा है कि उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को पार्टी की चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने के विरोध में यह कदम उठाया है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. aaj ki b j p ka chehar vo nahi hai jo deedayal ji /mukhar ji / yaa / atal ji ke vayktaavy se bana ho nishichit hi ab moka parasst nitiya chatukar longo ki halchal hi haabi hai bo be eemani se naiytikta ke virudhdy kobhi kaam karne ko sahaz hi taiyaar rahate hai jhoote logo ki bharmar ho gayee haii eemandar swayam sevak bahut pareshan hai vo ghut raha hai mazburi mai bol nahi raha hai jik ka andaza parti nahi laga sakti kaiyo ki iek kar kasha jhoote longo ki jamat ka babavarna banyajaayea chuka hai yes binaasha ke laxchhan saaf dikhane lage hai ab Dr hedgewar shahab ki padi samaappat ho chali hai ab sona 16 cerit ka bacha hai kabhi 24 cerit ka khule chunotiya bala milta atha ab bo bilkul nahi hai.

  2. Kiran Yadav says:

    MR. PALASH KYA AAP YAH BATAANE KA KAST KARENGEN KI HINDU RASTRA DESH KE LIYE SABASE KHATRNAAK KYON HAI KYA AAPANE KABHI DESH KE UN HISSON KO DEKHA HAI JO MISLIM BAHUL KSHETRA KYA KABHI AAP UN JAGAHON PAR RAHE HAI JO MUSLIM BAHUL HAI YA SIRF APANE AC ROOM MIEN BAITH KAR HI KUTTE KI TARAH BHAOUNK RAHE HAI POORE DIN MASJIDO SE MACHATE SHOR KO TUM DESH KE LIYE SUBH MANTE HO KABHI AKABARUDDIN OWAISI KO SUNA HAI KABHI MAULANA JARJIS KO SUNA JAAO PAHALE UNAKO SUNO TAB BAAT KARO NAHI TO YE SUAR PANA BAND KARO BEWKOOF AADAMI DUNIYA KI SAMAJH NAHI AUR CHALE HO DESH SODHARNE.

  3. Ashok Sharma says:

    adbani ke sath anyay hua hai.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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