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गर्म गोश्त के सौदागरों को एस. पी. सिंह पत्रकारिता सम्मान..

By   /  June 28, 2013  /  No Comments

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पुरुस्कार और सम्मान बेचने का धंधा कोई नया नहीं है, मगर पीड़ा तब होती है जब टीवी पत्रकारिता के पितामह स्व. एस. पी. सिंह  के नाम पर सेमिनार आयोजित कर उसमें ऐसे लोगों को सम्मानित किया जाये जो गरम गोश्त के सौदागर रहे हों और आज पत्रकारिता का ढोंग कर एस. पी. सिंह की बरसी पर सम्मान पा रहे हों. हिंदी पत्रकारिता जगत के शिरोमणि श्री कमर वहीद नकवी कल ऐसी ही एक सेमिनार में प्रमुख वक्ताओं में से एक थे मगर जब उन्होंने पाया कि उस सेमिनार में मुंबई के एक कुख्यात डांसिंग बार और गरम गोश्त के सौदागर और उनके कारिंदे भी एस. पी. सिंह पत्रकारिता सम्मान पा रहे हैं तो उनका कलेज़ा फट गया और उन्होंने अपनी फेसबुक वाल पर अपनी पीड़ा व्यक्त कर दी. हम उनकी फेसबुक वाल पर प्रकट उस पीड़ा को यहाँ जस का तस प्रकाशित कर रहे हैं..

 

एस. पी. सिंह की बरसी पर आज मीडियाख़बर.काम द्वारा आयोजित सेमिनार में जाना हुआ.
मीडिया की मौजूदा दयनीय स्थिति और पत्रकारीय मूल्यों के ‘घोर पतन’ पर गरमागरम बहस हुई. सम्पादकों को इस पतन के लिए ख़ूब लतियाया गया. इसके बाद कुछ लोगों को उनके संघर्ष/ योगदान के लिए ‘सम्मानित’ भी किया गया.naqwi fb
सेमिनार की समाप्ति के बाद संयोग से मेरी बातचीत उनमें से एक सज्जन से हुई, जिन्हें ‘सम्मानित’ किया गया था. वह किसी शीघ्र लाँच हो रहे चैनल में वाइस-प्रेसीडेंट बने हैं. पूछने पर पता चला कि उनके चैनल के मालिक का नाम सुधाकर शेट्टी है.
आपकी याद्दाश्त को ताज़ा कर दें कि सुधाकर शेट्टी किसी ज़माने में मुम्बई का कुख्यात दीपा बार चलाता था, जिसकी करोड़पति बार बाला तरन्नुम के उन दिनों बड़े चर्चे हुआ करते थे और वह क्रिकेट सट्टेबाज़ी के मामले में गिरफ़्तार भी हुई थी. सट्टेबाज़ी के इस मामले के अलावा मुम्बई के अंडरवर्ल्ड समेत कई संदिग्ध कारनामों में सुधाकर शेट्टी का नाम आता रहा है.

कमर वहीद नकवी

कमर वहीद नकवी

भाई, मीडिया के नैतिक पतन पर आँसू भी बहाओगे और ऐसे संदिग्ध नामवाले व्यक्तियों से जुड़े लोगों का सम्मान भी करोगे? दीपा बार के पूर्व संचालक के न्यूज़ चैनल से आपको किन नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की उम्मीद है?
पता नहीं क्या मजबूरी थी, लेकिन नैतिकता की दुहाई देनेवालों के इस दोहरेपन से बहुत हैरान हूँ.

सुधाकर शेट्टी व उसके न्यूज़ चैनल पर इंडियन एक्सप्रेस की 28 अप्रैल 2013 की यह रिपोर्ट विस्तार से जानकारी देती है:
http://www.indianexpress.com/news/deepa-bar-owner-starts-tv-channel-netas-throng-launch-party/1108701/
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You, Kumar Sauvir, Chanchal Bhu, Bipendra Kumar and 110 others like this.

Khalid Gauri Sab bikau hai
10 hours ago via mobile · Like
Abhishek Anand बहुत सही सवाल है सर, लेकिन जैसा कि आज के सेमिनार में भी आपलोगों ने माना था, सभी मीडिया हाउस के मालिकों का उद्देश्य पत्रकारिता नहीं है.. जो है नामवाला.. वोही तो बदनाम है.
9 hours ago · Edited · Like · 1
Vivek Sinha is hamam main nange hai
9 hours ago · Like · 2
Harshendra Verdhan I read this story in detailed manner. It’s nothing new in the industry now. By sitting on the Oder side of table I have actually seen the real picture of all those who claim themselves as stalwarts of d industry..for me sir; now actually there is nothing called News..
9 hours ago via mobile · Like
रहीसुद्दीन ‘रिहान’ ‘दादा’ हमाम के नंगों के बारे में आपसे बेहतर किसको पता होगा…आपकी इस पोस्ट के लिये शुक्रिया.
9 hours ago · Like · 1
Siddharth Pandya Chanel bhi baar ki tarah chalega
9 hours ago via mobile · Like
Raghvendra Dwivedi नक़वी सर, ये बड़ा और कड़वा सच है..। मुश्किल ये है कि समाज बदलने के ठेकेदार तो सब हैं लेकिन कोई भी अपने गिरेबाँ में झाँकना नहीं चाहता.. और यही मीडिया की सबसे बड़ी त्रासदी है..।
9 hours ago · Like · 3
Servius Prime पहले जठरानल फिर सामाजिक दावानल this is the chronology in which humans put the fire out…if anyone differs he is just maintaining a double standard
9 hours ago via mobile · Like
Saleem Saifi Sir,you are More Respected for me,you are man of television & print also,you knows very well about all media bosses including TRP leaders.hum bolenge tau baat dooor tak jaayegi.chalne dijiye jaisa chal raha hai..!
9 hours ago · Like · 2
Rahul Tripathi कड़वा सच ……नकवी सर की स्टाइल में ……
9 hours ago · Like
Syed Shahroz Quamar भाई, मीडिया के नैतिक पतन पर आँसू भी बहाओगे और ऐसे संदिग्ध नामवाले व्यक्तियों से जुड़े लोगों का सम्मान भी करोगे? दीपा बार के पूर्व संचालक के न्यूज़ चैनल से आपको किन नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की उम्मीद है?
9 hours ago · Like · 1
Raghuwansh Kumar Raajwanshi Sir ,ji ab to kuch kahne ko nahi rah gaya kyon is pavitra kaam men apvitra log kabja jam rahen ise to mai khud nahi sanjh pa raha ,par aap jaise varshth logo ke saamne ye sab ho raha hai ise mai khud nahi samjh pa raha !
9 hours ago · Like
Kumar Rahman आप की बेबाक टिप्पणी के लिए आपको सलाम…
9 hours ago · Like · 1
Maaz Malik India ki akhir lage gi kis tarah se…
9 hours ago · Like
Satish Singh Thakur सर..जहां ख़बरें कारपोरेट और माफिया की चाकरी करती हों…जहां कलम..जी हुजूर…हो जाएगा माईबाप..कहते थकती नहीं..यहां तक कि उसे धन पिशाचों के पैरों तले कारपेट बन बिछना भी गंवारा हो…वहां हैरानी-बैचेनी कैसे टिक सकती है? एक तरफ..चौथे खंबे को स्वान गिरोह…लगातार टांग उठाकर ‘पवित्तर’ कर रहे हैं तो दूसरी तरफ़ अतीत की गलियों से ये गूंज न जाने क्यों बार-बार उठ रही है…कि न खींचो कमानों को न तलवार निकालो…जब तोप मुकाबिल हो तो अख़बार निकालो…
9 hours ago · Unlike · 3
Hemanth Kumar Sharma भारतीय मीडिया के घटिया स्तर की चर्चा पूरी दुनिया में…

आप खुद देख लिए इस विडियो (http://www.youtube.com/watch?v=N2wYyBUB4Wk) में पत्रकार महोदय उतराखण्ड में बा…ढ़ की न्यूज़ कवर करने गए जब एक जगह पानी ज्यादा था और महोदय को कपडे ख़राब होने का डर लगा त…See More
Indian TV reporter Narayan Pargaien Keeps Pants Dry In Flood Siting On Victim’s Shoulders
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9 hours ago · Like
Rakesh Kayasth इस आधार पर तो उनका एक बार और सम्मान बनता है। किसी बार वाले का पैसा पत्रकारिता जैसे पवित्र धंधे में लगवा देना कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। ईसा ने भी कहा है– पाप से घृणा करो, पापियों से नहीं।
9 hours ago · Edited · Like · 2
Sahu Santosh media ko thekedro aur punjipati apni rakhel smjh rahey hai mujhey dukh hai ki mai in shabdo ka use kar raha hu par sachhai se bhaga nahi jaata
9 hours ago · Like
Vivek Bhatnagar mediawale tarakki kare naa kare, lekin bar wale tarakki ker rahe hain,
9 hours ago via mobile · Like
Sajid Khan Ndtv सर ,आप तो देश के इतने बड़े पत्रकार है फिर इस तरह के शब्दों का इस्तिमाल करना वो भी उस पत्रकार के लिए जिस का नाम तक आपने लिखना सही नहीं समझा,शायद कोई बड़ा नाम ही होगा,जिस तरह देश के सभी पत्रकार आप का सम्मान करते है मेरी सोच में वो जो भी होगे आप का भी सम्मा…See More
8 hours ago · Like
Dharmendra K Singh हर बात के पीछे है पैसा….चाहे वो सरकार चलानी हो या फिर मीडिया……हमारे देश में विकास चाहे हर तबके तक नहीं पहुंचा हो लेकिन मूल्यों का घोर पतन बिना किसी भेदभाव और रुकावट के हर बिरादरी, हर तबका में खूब फल फूल रहा है।
8 hours ago · Like
Tehseen Munawer Shayed woh ungli kata ker shahedon men shamil hona chahta ho…sudharne ka aik mouqa diya jaaye
8 hours ago · Like
Saleem Saifi Wo Vice president Sarfaraz Saifi hai,Jo shaandaar journalist aur damdaar anchor hai magar koi chennel head usko kehta hai hai ki tum musalmann ho isliye nahi rakh sakta,koi channel head kehta hai hai tum uske rishtedaar ho isliye nahi rakh sakta,koi ch…See More
8 hours ago · Like · 1
Mohammad Maqusood Khan Sir sawal ye hai ki ye badlega kab ?
aur kaun ise badlega… ?
Ise unchayi par lane wale bhi hum me se hain aur Girane wale bhi…
8 hours ago via mobile · Like · 2
Subhash Agarwal Is hamam mein sab nange hai
6 hours ago via mobile · Like
Pawan Kumar Bhoot very honest , salute sir
5 hours ago · Like
Shailendra Jha सर एक बात और है, इसका संचालन उन लोगों द्वारा किया गया था जिन्हें मेनस्ट्रीम मीडिया ने जगह नहीं दी. इटरनशिप करने के बाद जिन्हें इस लायक नहीं समझा गया कि नौकरी दी जाए. और आप जब इनका फेसबुक प्रोफाईल देखेंगे तो उसपर तमाम चैनलों की लि्स्ट चिपकाए रहेंगे कि यहां काम किया, बहां काम किया. ये बताने के लिए कि एस पी सिंह के बाद अगले तुर्रम संपादक यहीं बन सकते थे, पर ठुकरा के चले आए. और जो बात दबा जाएंगे वो ये कि हर चैनल में, अखबार में घूम घूम इंटर्नशिप करते रहै, नौकरिया मांगते रहें, नहीं मिली तो अब गरिया रहे हैं. मैं ऐसे भी लोगों को जानता हूं जो मेमस्ट्रीम मीडिया के प्खर आलोचक बनते हैं, पर जौसे ही किसी चैनल से घूमकर आते हैं तुरंत इस तरह फोटो लगाएंगे कि इन्हें गेस्ट पैनल में बुलाया गया था, इन लोगों का जीवन ऐसे अंतर्विरोधों का गड़बड़झाला है, जिसे ये सामंजस्य समझ बैठे है.
4 hours ago · Like
Manoj Upadhyay आपकी बेवाक और ईमानदार पत्रकारीय नैतिक मूल्यों को कोटिशः प्रणाम सर. वैसे भी सर ऐसे बेग़ैरत लोगों के सम्मान पर अब हैरान न हों तो बेहतर. वो कहते हैं न..कुपथ कुपथ जो रथ दौड़ाता, पथ निर्देशक वह है, लाज लजाती जिसे देखकर, धृति उपदेशक वह है..आज मीडिया में बल्कि हर जगह यही स्थिति है.
4 hours ago via mobile · Like · 1
Ajay Kumar Naqvi Saheb, good question, but what kind of double standard we are referring to, a person involved in all kinds of financial crimes, coalgate has all the rights to run a channel, but a person running a bar has no right, and top of it, one will also have to refer to individual record, as aJournalist, that what he or she has done, immaterial of the fact, that his owner was a bar owner or a printing press owner.
4 hours ago · Like · 1
Dhananjay Singh और ये सुधाकर शेट्टी रामदेव के उद्यम में भी बड़ा दानी/इन्वेस्टर है
4 hours ago · Like · 2
Shubhakar Dubey पहले पत्रकारिता समाजसेवा की भावना से होती थी किंतु अब यह एक उद्योग बन गया है इसी कारण जिसके पास पैसा है वह इसमें कूद पडता है. वह चोर,गुंडा,माफिआ,बलात्कारी, भ्रष्टाचारी कोइ भी हो सकता है, . आप मालिक की बात कर रहे हैं , जी न्यूज़ के पत्रकारों ने क्या किया था.
3 hours ago · Like · 1
Ravish Shukla सलीम जी हिन्दू-मुसलमान का तुर्रा यहां भी आप चला रहे हैं..नकवी सर खुद मुसलमान है..शाहीद रजा जागरण में जालधंर के संपादक है..लखनऊ में नदीम सर नवभारत टाइम्स के संपादक है और इंडिया टुडे के शानदार संपादक फरजंद अहमद थे..जिनके लिखे को हम दो से तीन बार पढ़ते थे। अच्छे संपादकों की एक लंबी फेहरिस्त है..दुआ है सैफी जी तरक्की करें..जानकार, ईमानदार और मेहनती लोगों को कोई नहीं रोक सकता है। वो चाहे हिन्दू हो या मुसलमान या ईसाई
2 hours ago · Like · 7
Abbas Masroor Qatil Se Bhi Lagaav Hai Maqtool Se Bhi Pyar, Achha Nahii Hai Zaher Milana Dawa Ke Saath!!!
2 hours ago via mobile · Like · 1
SK Chaudhary Sonu कल के समारोह मे एक अच्छी बहस और चर्चा के बाद जिन लोगों को सम्मानीत किया गया, उनमे से 2 लोगों को छोड़कर बाकियों के सम्मान पर मुझे भी आश्चर्य हुआ, उस समारोह मे सम्मानो का इस तरह से बांटवारा गले से नही उतरा ।।
2 hours ago · Like · 1
Supratim Banerjee Sir, mujhe toh lagta hai ki khaalis imaandari ke paison se aaj ke din koi saltnat khadi ho hi nahi sakti. Waise imaandari subjective issue hai. Kisi dandhe me zaroorat se zyada faida bhi beimaani ki shreni me aa sakta hai. Isliye, malikaanon ke bare me…See More
about an hour ago via mobile · Edited · Like
Ravish Shukla true word supratim..dada
54 minutes ago via mobile · Like
Dilip Khan पुरस्कार वाला फंडा तो मैं आईआईसी में भी नहीं समझ पाया था…और अब भी नहीं समझ पाया। ये कार्यक्रम गंभीर बहसों के जरिए कुछेक का प्रोमोशन कैंपेन था।
37 minutes ago · Unlike · 1
Qamar Waheed Naqvi Supratim Banerjee और Ravish Shukla ji: NBSA और BEA की समस्या यह है कि इनके सदस्यों की संख्या अत्यन्त सीमित है, और कार्यक्षेत्र का दायरा भी. मोटे तौर पर ये संस्थाएँ कंटेंट और कवरेज व सम्पादकीय आचरण व गाइडलाइन तक सीमित हैं, और इनकी बात वही मानते हैं जो इनके सदस्य हैं.
लेकिन मीडिया की दूसरी बहुत-सी जटिल समस्याएँ हैं, जिनका समाधान इन संस्थाओं के दायरे में नहीं है और न इनके वश का है.
12 minutes ago via mobile · Unlike · 1

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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