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कमाल खान, तुम्हें इस्लाम यही सिखाता है ?

By   /  June 28, 2013  /  20 Comments

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कमाल आर  खान नामक एक अभिनेता ने राँझना फिल्म की समीक्षा करते हुए  फिल्म के   हीरो धनुष (व्हाई दिस कोलावेरी डी फेम ) पर टिप्पणी करते हुए  कहा कि -“पता नहीं आप यू पी से है अथवा नहीं है बट मैं यू पी से हूँ. पुरे यू पी में जैसा धनुष है, वैसे आपको भंगी मिलेंगे, चमार मिलेंगे बट एक भी इतना सडा हुआ पण्डित आपको पूरे यूपी में कहीं नहीं मिलेगा “
वाह कमाल रशीद खान उर्फ के आर के , क्या बात कही, क्या यही सिखाया इस्लाम ने तुम्हे ? दुनिया के एक ऐसे मज़हब के मानने वाले हो तुम जिसने असमानता और जाति गत उत्पीडन के शिकार लोगों को आसरा दिया,बराबरी दी,जहाँ मस्जिदों में किसी का प्रवेश वर्जित न था, जहाँ ख़ुदा के सभी बन्दे दौराने नमाज़ बिना किसी भेदभाव के एक ही सफ़ में खड़े होकर  रब- उल- आलमीन की हम्द ओ शना करते रहे होKamaal_Rashid_Khan, उस दीन के अनुयायी हो कर जो अल्फाज़ तुम्हारी जबान से निकले उसने इस्लाम को ही कलंकित  करने का काम किया है.यह हम करोड़ों करोड़ दलितों का तो अपमान है ही, तुम्हारे दीन और इमान की भी तौहीन है .कमाल खान तुम्हारी इस बदतमीजी का तो हम लोग इलाज करेंगे ही मगर तुम्हारे हम बिरादरों को भी अब सोचना होगा कि मजहबे इस्लाम कि बुनियाद को हिल देने वाला कुकृत्य करने वाले इस आदमी के खिलाफ कितने इस्लाम के ठेकेदार उठ खड़े होते है .खैर यह दीनी लोगों का सर दरद है ,वो जाने और उनका अल्लाह ,फ़िलहाल हम बात करेंगे कमाल खान की बदजबानी की .
कमाल खान की नज़र में भंगी और चमार जैसी दलित जातियां सड़ी हुयी है ,मैं पूंछना चाहता हूँ कमाल खान से कि ये सड़ांध और गंद इस मुल्क में मचाई किसने ?भैय्या गंदे और सड़े हुए भंगी और चमार नहीं है ,ये तो तुम जैसे हरामजादों की गन्दगी ढोते ढोते ऐसे हो गए है ,दरअसल गंदे और सड़े हुए तो तुम हो कमाल खान ,तुम्हारे ख्यालात कितने बदबू मरने वाले है ,तुम्हारी मानसिकता कितनी मैली है ,तुम्हारे विचार कितने गंदे है के आर के ,ऐसा लगता है कि तुम गन्दगी का साक्षात् ढेर हो .तुम्हारी जैसी मानसिकता के लोगों ने इस देश में गुजिश्ता हजारों सैलून से ऐसी गंद मच राखी है कि किसी भी मानवतावादी इन्सान का दम  घुटने लगता है .
कमाल कहाँ कि टिप्पणी केवल दलित समुदाय का ही अपमान नहीं है बल्कि यह हमारी  बराबरी की सोच का भी अपमान है ,यह हमारे महानतम संविधान के समानता के विचार की हत्या है ,मैं बधाई देना चाहता हूँ आईपीएस अमिताभ ठाकुर को जिन्होंने सबसे पहले यह कहने कि  हिम्मत की कि कमाल आर खान की टिपण्णी सीधे सीधे जाति सूचक है .यह अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति (अत्यचार निवारण )अधिनियम 1989 की धारा 3 /1 -10 के अंतर्गत  अपराध है,श्री ठाकुर ने लखनऊ के गौमती नगर थानेमें एक अफ आइ आर भी दर्ज करवाई है जिसमे उन्होंने साफ़ लिखा कि वो स्वयं किसी दलित जाति के व्यक्ति नहीं है मगर एक बुद्धिजीवी और सामाजिक रूप से संवेदन शील व्यक्ति होने के नाते कमाल खान के इस अत्यंत घृणित और बेतुकी टिप्पणी से अन्तःस्थल तक आहत और अचम्भित है .श्री अमिताभ ठाकुर का स्पष्ट मानना है कि कमाल खान की टिप्पणी  अनुसूचित जाति की   दो उपजातियों के लोगों पर घृणित और ओछी टिप्पणी है जिसे माफ़ नहीं किया जा सकता है/
मुझे भी यही लगता है कि ऐसी घटिया और गन्दी और ओछी मानसिकता वाले इन्सान को हमें करारा जवाब देना चाहिए ,उसकी निंदा तो चारो ओर से हो ही दलित अत्याचार निवारक कानून के तहत उसे जेल भी भिजवाया जाये ,हम लोग राजस्थान में कई जगहों पर उसके विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करवाने कि तय्यारी कर रहे है ,अप भी अपने अपने इलाके में कमाल खान के वक्तव्य का विरोध कीजिये ,साथ ही मैं राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग एवं राज्यों के अनुसूचित जाति आयोगों से भी विनती करता हूँ कि वे इस शर्मनाक ओर अत्यंत अपमानजनक टिप्पणी पर ध्यान दें और आवश्यक कानूनी कार्यवाही को अंजाम दें.मेरा देश भर के दलित एवं मानवाधिकार वादी संगठनों /संस्थाओं से भी आग्रह है कि वे भी दलित गरिमा और स्वाभिमान को अक्षुण बनाये रखने के इस अभियान का हिस्सा बने और कमाल खान जैसे लोगो को मुंहतोड़ जवाब दें.
भंवर मेघवंशी
(लेखक खबर कोश डॉट कोम के संपादक है)
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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

20 Comments

  1. किसी भी व्यक्ति / समाज को किसी के धर्म पर आपत्तिजनक टिपण्णी करने का कोई अधिकार नहीं है , चाहे वो कमाल खान हों या अन्ये कोई भी , कमाल खान जेसे व्यक्ति पर क़ानूनी कार्यवाही जरुर होनी चाहिए |.

  2. Asha Dbs says:

    Bhagwan ki adbhut kruiti.

  3. KAMAL KHAN KYA TUM BIG BOSS KA THAPAD BHUL GYE HO KYA.PHIR SE TUMKO MARNA PADEGA.

  4. Dhiraj Kant says:

    bahutsubndar

  5. Badshah Khan says:

    krk ne bhangi chamar kah diya to bura lag gaya lekin in shabdo ka izaad to brahamno ne kiya hai aur unhone to dalito ka salo tak shoshan kiya hai aur aaj bhi kar rahe hai phir unhe koi kuch kyo nahi bolta kyonki wo muslim nahi hai isliye.

  6. Badshah Khan says:

    chetan [email protected] ha ha ha varn vyavastha muglo ne nahi shuru karayi yes to tumhare vado mai hi likha hai kal tak to tum hi chilla chilla kar kahte the ab badal kyo rahe ho tumhari isi palat jane ki kabiliyat ki vajah se tumhare jaise abhi tak bache hue hai.

  7. Badshah Khan says:

    chankya [email protected] tere sanskar teri bhasha se hi dikh rahe hai ki tere maa baap ne tujhe kya sanskaar diye hai.

  8. Naved Ahmed says:

    KRK toh Nitthallaa ha…… wellaa ha…… bewakoof toh pehle he thha..so see the collection of Raanjhna instead of reading his mentall.ill. eaty.

  9. हिंदू अपनी सहनशीलता के लिए जाना जाता है और इसी कमजोरी का फायदा हर कोई उठा रहा है! अब वक्त जातिवादी सोच से बाहर निकलकर एक होकर ऐसे लोगों को मुहंतोड़ जबाब दिया जाना चाहिए और इसके लिए कानून का सहारा लिया जा सकता है!

  10. mr kamal koa abhia maluam nhia hia ki ganda oa nhia tuam hoa kiwa kia tumaria gandagia oa saf krta hia to tum gadea hoan jada likhanya kia jrurarat nhia joa ganda hota hia oa ganda sochta hia.

  11. Shubham Prakash says:

    Dude aap chutie ho..

  12. Anand Upadhyay says:

    sach hi kaha hai.

  13. yes aakhir kisi ko kya jati ka paath padhayega……….. yes sala bhool gaya hai ki hindu chahe kitne v jaaiyon me bate hon lekin sb ek dushron ka sammaan karna jante hai……….. waise v is adharmi lovi pagar ko kon samjhaye ki jati aadmi ka nahi uske karm ka hota hai or koi v kaam jb chhota ya bada nahi hota to jati kaise ho sakta hai? poora ramayan , mahabharat is baat ka gawah hai ki ved vyash prashar rishi or matasyagandha k putra te (matyasha gandha khood ek machhuaare family ki thi ).
    wahi ramayan 1 jan jati dwara likha gaya hai……..

    shayad hi koi ved vyash or valmiki k vidwata pr ungli uthane ka sahas kr sake………..

    is sale ko to bs desh se nikalo…….

  14. Kamal Madaan says:

    और हाँ एक बात और कहना चाहूँगा कि इस कमाल खान नें अगर रांझणा देखी हो तो गौर करें कि धनुष इसमें दक्षिण भारतीय ब्राह्मण हैं इस फ़िल्म में, इस गधे को कौन समझाये कि दक्षिण भारतीय लोग इसी रंग रूप के होते हैं.

  15. इस कुत्ते को एक बात पहले समझ लेनी चाहिए की हिन्दू कभी की रंग और शारीरिक बनावट से नहीं जाने जाहते है हिन्दू केबल अपने संस्कारो से जाने जाते है चाहे हो किसी भी जाती से हो हम हिन्दू इन मुल्लो की तरह देश को और धर्म को बटने का काम नही करते है इस मदर जात ने आज तक इस तरह की बात कभी मुस्लिमो की जातिओ के बारे में नहीं कही मेरे हिन्दू भाइओ अब बहुत हो चूका एक साथ खड़े हो का समय आ चूका है

  16. Amarjit Singh says:

    BILKUL THEEK KAHA JI AAP NE? YEH KRK APNE AAP KO PATA NAHIN KYA SAMJHTA HAI? TABHI TO KISI FILM ME NAJAR NAHIN AAYA AUR BIG BOSS ME BHI YEH APNE AAP KO BOSS HI SAMAJHTA THA.

  17. mugalo ke pahale varn vyavashtha me kisi ko apamanit karane ki kabhi vyavastha nahi thi siraf ajivika ke hisab se varn bate gaye the par mugal or angrejo ne mela dona or kai tarah ke apamanit karya karava kar hindu samaj ko dushit karane me koi kasar nahi chodi jisaka dush parinam aaj hindu bhai ek dusare ke dushaman bane huve he.

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