/यू पी में कांग्रेस की बिगड़ी नैय्या पार लगाएंगे मिस्त्री..

यू पी में कांग्रेस की बिगड़ी नैय्या पार लगाएंगे मिस्त्री..

आर एन आई, लखनऊ

विधान सभा चुनाव में हुई दुगर्ति के बाद से उत्तर प्रदेश में बदहाली के दौर से गुजर रही कांग्रेस की बिगड़ी नैय्या को पार लगाने के लिए पार्टी हाईकमान ने मिस्त्री को प्रदेश में भेजा है। प्रदेश की कमान सौंपे जाने के बाद लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर गुजरात से आए मिस्त्री ने चुनावी बिगुल फूंक दिया।madhusudan mistri

प्रदेश अध्यक्ष निर्मल खत्री तथा वरिष्ठ कांग्रेसियों प्रकाश जौहरी, जुबेर खां, राणा गोस्वामी, नसीब पठान और प्रदीप माथुर की मौजूदगी में मधुसूधन मिस्त्री ने आहवान किया कि वह उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के मार्गदर्शन हेतु भरपूर कोशिश करेंगे। ‘‘कांग्रेस को आगे ले जाने के लिए, पार्टी के ढांचे को अधिक मजबूती प्रदान करने और जोनल स्तर पर कांग्रेस को अगले चुनाव के लिए तैयार करने के लिए मेरी टीम काम करेंगी,’’ मिस्त्री ने प्रेस वार्ता में घोषणा की। आगामी 9 जूलाई से 14 जूलाई तक और फिर 18 से 24 जूलाई तक मिस्त्री यूपी का भ्रमण शुरू करेंगे और 8 जोन में विभाजित की गई कांग्रेस के हर मुख्यालय पर स्थानीय पार्टी लीडरशिप से चर्चा करेंगे। आर एन आई से बात करते हुए मिस्त्री ने विश्वास दिलाया कि वह ‘‘चमत्कार नहीं वास्तविकता की बात करेंगे।’’

नरेन्द्र मोदी को उत्तर प्रदेश में पैर पसारने से रोकने के विषय पर बोलते हुए मधुसूदन मिस्त्री ने क्हा कि ‘‘मैं नरेन्द्र मोदी को अच्छी तरह जानता हूं। उनकी स्ट्रेटजी भी जानता हूं। भाजपा ने मोदी के नाम का हव्वा खड़ा करने की कोशिश की है परन्तु वास्तविकता यह है कि उत्तर प्रदेश ने सालों से भाईचारे का संदेश दिया है, यहां मोदी को कामयाबी नहीं मिल सकती।’’

मिस्त्री ने क्हा कि नरेन्द्र मोदी केवल कार्पोरेट जगत के प्रतिनिधी हैं। इसी कारण उनके नाम और काम को बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जा रहा है। अन्यथा दूसरे भाजपा प्रशासित राज्यों के मुख्य मंत्री क्यों इस पैमाने की पब्लिसिटी नहीं पा पाते। गुजरात के विकास पर बात करते हुए उन्होंने क्हा कि वहां कोई विकास का माॅडल सिरे से है ही नहीं। विकास के मामले में गुजरात उडि़सा से भी पीछे है। हयूमैन डेवेलप्मेंट इंडेक्स में केरल से पीछे है। गरीबी, भूख, विकास आदि कोई भी मानक देखें, कई दूसरे राज्य गुजरात से बेहतर हैं।

गुजरात के ही अमित शाह को भाजपा का प्रभारी बनाए जाने और अपने और शाह के दरमियान समानता के सवाल पर टिप्पणी करते हुए मिस्त्री ने क्हा कि कम से कम वह झूठे एंकाउंटर में निर्दोष लोगों को मारने के केस में जेल नहीं गए हैं।

ज्ञात हो कि कर्नाटक विधान सभा चुनाव में कांग्रेस को जीत दिलाने के बाद मिस्त्री को उत्तर प्रदेश का कार्यभार सौंपा गया है। परन्तु कथित तौर पर आर एस एस से पूर्व में सम्बद्ध होने के कारण पार्टी में ही कई नेता उनके प्रदेश प्रभारी बनाए जाने के फैसले को कांग्रेस हाई कमान की बड़ी भूल मान रहे हैं। उनका मानना है कि बाहर से आए मिस्त्री के प्रदेश पार्टी इंजन को दुरूस्त करने में विफल होने की संभावनाएं अधिक हैं।

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.