/ओला को केन्द्र में मंत्री बनाकर कांग्रेस ने खेला जाट वोट कार्ड

ओला को केन्द्र में मंत्री बनाकर कांग्रेस ने खेला जाट वोट कार्ड

-रमेश सर्राफ धमोरा||
झुंझुनू. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने हाल ही में किये गये मंत्रीमंडल विस्तार में झुंझुनू के सांसद व लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के उपनेता शीशराम ओला को चार साल बाद पुन: केबीनेट मंत्री बना कर एक बार फिर से उनका पूर्ववर्ती श्रम एवम रोजगार विभाग दिया गया है. 86 वर्षीय ओला ने उम्रदराज होने के उपरान्त केन्द्रीय मंत्रीमंडल में वापसी कर अपनी ताकत का अहसास करवा दिया है. राजस्थान की राजनीति में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के धुर विरोधी माने जाने वाले ओला राजस्थान में जाटों के सबसे प्रभावशाली नेता हैं. 2009 में उन्हे केन्द्रीय मंत्रीमंडल से हटा दिया गया था तभी से वे असंतुष्ट चल रहे थे. हालांकि उन्हे लोकसभा में कांग्रेस पार्टी का उप नेता बनाकर संतुष्ट करने का प्रयास किया गया था मगर वे केन्द्रीय मंत्री बनना चाहते थे. इसी दौरान उनके पुत्र ब्रिजेन्द्र ओला को राजस्थान सरकार में राज्य मंत्री भी बनाया गया था. SISH RAM OLA
महिपाल मदेरणा प्रकरण के बाद राजस्थान के जाटों में कांग्रेस के प्रति बढ़ती नाराजगी व प्रभावशाली जाट नेता नटवरसिंह, डा. हरिसिंह के खुलकर भाजपा नेता वसुन्धरा राजे सिधिंया के पक्ष में आने से ओला को महत्व देना कांग्रेस के लिये जरूरी हो गया था. राजस्थान में पिछले विधानसभा चुनाव के बाद विधायक दल नेता के चुनाव के समय अशोक गहलोत के समक्ष ओला ने विधायक दल के नेता का चुनाव लड़ा था. शीशराम ओला द्वारा लगातार अशोक गहलोत का विरोध करने के कारण गहलोत हरसंभव ओला को कमजोर करने का प्रयास करते रहें हैं. 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद गहलोत ने ओला को केन्द में मंत्री बनने से रोका ही नहीं बल्कि उनकी काट में शेखावाटी क्षेत्र के ही सीकर से सांसद व जाट नेता महादेव सिंह खंडेला को केन्द्र में राज्य मंत्री बनवा दिया था. उसके बाद गहलोत ने डा. चन्द्रभान को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनवा दिया. डा. चन्द्रभान ओला के गृह जिले झुंझुनू के ही रहने वाले हैं तथा कांग्रेस की राजनीती में वो अशोक गहलोत समर्थक व ओला विरोधी माने जाते हैं.
केन्द्रीय मंत्रीमंडल के पिछले विस्तार में भी राजस्थान से एक और जाट नेता व जयपुर ग्रामीण के सांसद लालचन्द कटारिया के केन्द्रीय मंत्रीमंडल में शामिल होना भी ओला को केन्द्र में मंत्री बनने से रोकने ही कवायद थी. मगर उसके उपरान्त भी ओला ने अपने विरोधियों के सभी चक्रव्यूह को तोडक़र यह दिखा दिया है कि उनकी बढ़ती उम्र के बावजूद राजनीतिक ताकत में कमजोरी नहीं आयी हैं. देश में संभवतया इस समय यह एकमात्र उदाहरण है जहां पिता-पुत्र दोनो एक साथ केन्द व राज्य सरकार में मंत्री हो. ओला के केन्द्र सरकार में मंत्री बनने से जहां उनका कद तो बढ़ा ही है साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्यासी तय करने में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी.
झुंझुनू लोकसभा क्षेत्र से लगातार पांच चुनाव जीत कर रिकार्ड बना चुके हैं तथा अगला चुनाव जीत कर लगातार जीत की दूसरी हैट्रिक लगाने का प्रयास करते नजर आ रहे- शीशराम ओला वर्तमान में देश के सबसे वरिष्ठतम राज नेताओं में से एक हैं. उम्र व वरिष्ठता में उनके समकक्ष द्रुमक अध्यक्ष एम. करूणानिधी ही हैं. 1957 से अपने संसदीय जीवन की शुरूआत करने वाले ओला का राजनीतिक सफर आज 56 वर्ष बीतने पर बदस्तूर जारी है. ओला मौजूदा समय में देश में एकमात्र नेता है जिन्होने सबसे ज्यादा चुनाव लडक़र जीते हैं. ओला अब तक आठ बार विधानसभा,पांच बार संसद व दो बार जिला प्रमुख का चुनाव जीत कर कुल 15 चुनाव जीतने वाले देश के एकमात्र राजनेता बन गये हैं. इस हिसाब से ओला का नाम गिनीज बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड्स में शामिल होना चाहिये.
शीशराम ओला ने 1957 लेकर 1993 तक लगातार दस बार राजस्थान विधान सभा का चुनाव लड़ा तथा दो बार को छोडक़र आठ बार जीत दर्ज की. ओला 1980 से 1990 तक राजस्थान सरकार में जगन्नाथ पहाडिय़ा,शिवचरण माथुर व हरिदेव जोशी के नेतृत्व वाला सरकारों में जलदाय,वन एवम पर्यावरण,पंचायतीराज एंव ग्रामीण विकास, सैनिक कल्याण, इन्दिरा गांधी नहर परियोजना, परिवहन, यातायात, सहकारिता, आबकारी, भू-जल,सिंचाई सहित कई विभागों को मंत्री के रूप में संभाला. ओला 1962 से 1977 तक झुंझुनू के जिला प्रमुख भी रहे.
11 वीं लोकसभा के लिये 1996 में ओला ने तिवाड़ी कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ कर कांग्रेस प्रत्याशी व केन्द्रीय मंत्री कैप्टन अयूब खान को बुरी तरह से हरा कर लोकसभा में प्रवेश किया उसके बाद बाद वे लगातार पांच बार लोकसभा चुनाव जीत कर एक रिकार्ड बनाया है. ओला 1996-97 में प्रधानमंत्री देवेगोड़ा की सरकार में स्वतंत्र प्रभार के उर्वरक एंव रसायन राज्य मंत्री, 1997-98 में इन्द्रकुमार गुजराल की सरकार में स्वतंत्र प्रभार के जल संसाधन विभाग के राज्य मंत्री रहे. 23 मई 2004 से 27 नवम्बर 2004 तक मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए वन की सरकार में श्रम एवम रोजगार विभाग के केबीनेट मंत्री तथा 27 नवम्बर 2004 से 22 मई 2009 तक खान विभाग के केबीनेट मंत्री रहें हैं. वे लोकसभा में कांग्रेस कांग्रेस संसदीय दल के उपनेता भी है.
ओला को उनके द्वारा सामाजिक क्षेत्र में किये गये विशेष कायों के लिये सरकार द्वारा 1968 में पदम श्री से सम्मानित किया गया था. ओला अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के लगातार सदस्य बनते आ रहें हैं. वे राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कोषाध्यक्ष व किसान सेल के अध्यक्ष रह चुके हैं. ओला के बड़े पुत्र बृजेन्द्र सिंह ओला वर्तमान में राजस्थान सरकार में मंत्री है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.