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अधिकारी के लॉकर से मिला 18 किलो सोना

By   /  June 29, 2013  /  2 Comments

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सीबीआई ने गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के एक अधिकारी के लॉकर से 18 किलोग्राम सोना जब्त किया है।

इसकी कीमत तकरीबन साढे़ चार करोड़ रुपये बताई जा रही है। एजेंसी को लॉकर से पांच किलो चांदी भी मिली। मामला उत्तराखंड के रुद्रपुर जिले का है।

सूत्रों के मुताबिक, भ्रष्टाचार के एक मामले की जांच करने के दौरान गेल अधिकारी भागवत सागर ओझा के बैंक लॉकर से इतनी बड़ी मात्रा में सोना-चांदी मिलने का खुलासा हुआ।gold-bars

दरअसल, गेल में संविदा पर नियुक्त क्लर्क शशिकांत पांडेय के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत एजेंसी को मिली थी। पांडेय ने एक जमीन मालिक से बीस हजार रुपयों की मांग की थी, जिसकी जमीन गेल ने ले ली थी। यह जमीन रुद्रपुर के उस इलाके में थी, जहां गेल अपनी गैस पाइप लाइन बिछा रहा है।

जमीन मालिक की शिकायत पर सीबीआई ने अभियान चलाकर पांडेय को रंगे हाथों घूस लेते पकड़ा। पांडेय के ऑफिस पर छापा मारने के दौरान एजेंसी को छह लाख रुपये नकद मिले।

पूछताछ में पांडेय ने गेल अधिकारी ओझा के भी इस अपराध में शामिल होने की बात कबूली। एजेंसी ने जब ओझा के बैंक के लॉकर की तलाशी ली तो उसे वहां से 18 किलो सोना और पांच किलो चांदी मिली।

माना जा रहा है कि एजेंसी अब ओझा के घरों की तलाशी भी ले सकती है। ओझा और पांडेय को एजेंसी ने अपनी हिरासत में ले लिया है।

दोनों के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति जमा करने के मामला दर्ज किया जा सकता है। इन्हें जल्द ही देहरादून की अदालत में पेश किया जाएगा।

(अमर उजाला)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. jab tak laxmi ji apna ghar thik se banati kisi ki kudrsti pad gayee orr raasta bhi gajab ka chuna kisi our ki aag ne paandey jiki bhi lootiya dubodi yes grha dashaa ka hi kamal hai ghar baithe bina kaaran kisis ki bala ien ke ghar aa pdi bahut annad aagay jab chori ki maya apna raasta leti hai to kanha se nikale gi koyaee nahi jaanta.

  2. एक तुकबंदी बना प्रस्तुत कर रहा हूँ—सोना चांदी का बोझ भी रह गया हल्का हो कर.,जब ओझाजी ने भी अपना बोझ लाद दिया पांडेयजी पर. अब सोयेंगे धरती पर दोनों तो धरती माँ भी सोचेगी,किस किस का बोझ ढो रही हूँ मैं भी अपने सर पर.

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