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कबूतर बाजनी तिहाड़ पहुंची, तीन बच्चे सड़क पर

By   /  June 29, 2013  /  No Comments

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पुलिस की विशेष शाखा  की पहल पर  कबूतरबाजी में लगे एक परिवार के सात सदस्यों में  सेपांच दिल्ली की  तिहाड़ जेल में, दर्जनों को चूना लगाया, करोड़ों रूपये डकारे विदेश भेजने के नाम पर ..

-शिवनाथ झा|| 

दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा ने कल एक “कबूतर-बाजनी” को मुंबई से पकड़कर तिहाड़ में न्यायिक हिरासत में बंद कर दिया है. इसके साथ सात लोगों की संख्या वाले परिवार का यह पांचवां सदस्य है जो पिछले कई वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं. इन सभी लोगों पर “कबूतरबाजी” के दर्जनों मुक़दमे दर्ज हैं जिसमे लोगों विदेश भेजने के नाम पर करोड़ों रूपये ऐठने का आरोप है.

दिल्ली पुलिस के विशेष शाखा ने रेनू शर्मा को २८ जून २ ० १ ३ को मुंबई-दिल्ली राजधानी ट्रेन से लय. रेनू शर्मा नै दिल्ली स्टेशन पर - फोटो: शिवनाथ झा

दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा रेनू शर्मा को 28 जून 2013 को मुंबई-दिल्ली राजधानी ट्रेन से लाई. रेनू शर्मा नई दिल्ली स्टेशन पर – फोटो: शिवनाथ झा

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ट अधिकारी के अनुसार दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा कल बिपिन शर्मा की पत्नी रेनू शर्मा को मुंबई के एक पौश आवासीय कालोनी से गिरफ्तार कर दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में कल पेश किया गया. रेनू शर्मा वर्षों से पुलिस और कोर्ट को चकमा देकर फरार थीं. दिल्ली पुलिस के विशेष शाखा के जज विद्या प्रकाश ने 14 दिन के न्यायिक हिरासत पर उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया.

पुलिस सूत्रों के अनुसार रेनू दिल्ली विश्वविद्यालय की एक अव्वल छात्रा थी. बिपिन शर्मा के साथ शादी के बाद उनके बिजनेस को भी देखा करती थी. धीरे धीरे सम्पूर्ण परिवार ने “कबूतरबाजी” का जाल पूरे देश में फैला दिया.

पुलिस सूत्रों के अनुसार रेनू शर्मा के पति बिपिन शर्मा पिछले चार सालों से “कबूतरबाजी” के केस में तिहाड़ जेल में बंद है. बिपिन शर्मा के परिवार के तीन अन्य सदस्य – हर्षद, अमजद और अमन – पहले से ही “कबूतरबाजी” के केस में तिहाड़ में बंद हैं. पुलिस के अनुसार, अब तक की छानबीन के अनुसार यह अपराधी देश में कबूतरबाजी का “संगठित व्यापार” चलाते थे और दर्जनों लोगों को कनाडा, अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों में भेजने के नाम पर करोड़ों रूपये ऐंठकर रफूचक्कर हो जाया करते थे.

दिल्ली पुलिस के अनुसार इन सभी लोगों के विरुद्ध दिल्ली के अतिरिक्त पंजाब और हरियाणा में भी मुक़दमे दर्ज है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि “हमारी कोशिश है की पकडे गए अपराधियों के माध्यम से सम्पूर्ण देश में चल रहे कबूतरबाजी के गोरख धंधे में लिप्त लोगों को कानून के सिकंजे में कस सके. इस बात की पुष्टि अभी नहीं की जा सकती है, परन्तु इस बात की संभावनाओं को भी नकारा नहीं जा सकता है कि इसमें कुछ संभ्रांत अधिकारियों सहित राजनेताओं का भी हाथ हो. तहकीकात जारी है.”

दिल्ली पुलिस सूत्र के अनुसार, दिल्ली के डिफेंस कालोनी, जंगपुरा एक्सटेंशन के अतिरिक देश के कई अन्य राज्यों में इन आरोपियों के बड़े-बड़े मकानात हैं और आज के बाजार भाव से इनकी कीमत कई करोड़ों की होगी.

रेनू शर्मा मुंबई के देवकी रोड पर स्थित सिल्वर अपार्टमेंट में रहती थी. जानकारी है कि इस अपार्टमेंट में बॉलीवुड के कई नामी-गिरामी अभिनेता और अभिनेत्री रहते हैं.

रेनू को कल दिल्ली पुलिस की विशेष शाखा द्वारा मुंबई से राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन से बड़े ही कड़े सुरक्षा व्यवस्था में लाया गया. रेनू के तीन बच्चे हैं – दो बेटियां और एक बेटा. सबसे बड़ी बेटी है जो लगभग बारह साल की होंगी. तीनो बच्चे रेनू के साथ दिल्ली आये हैं. स्टेशन पर उतरने के फ़ौरन बाद रेनू को मेडिकल जांच के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया. मेडिकल जांच के बाद उसे पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया. रेनू के तीनो बच्चों को रेनू का भाई समद अपने साथ ले गया.

पुलिस सूत्रों के अनुसार इस बात की भी तहकीकात की जा रही है कि समद और परिवार के अन्य सदस्य रेशमा का इस “कबूतरबाजी” में कोई हाथ है या नहीं? वैसे समद ने शुरू से इस रेनू का साथ दिया है, फिर भी क़ानूनी तौर पर जब तक इस बात की पुष्टि नहीं हो जाती, पुलिस कोई कार्यवाही नहीं कर सकती.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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