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हटा दो मेरी मूर्ति: सुभाषचन्द्र बोस

By   /  June 30, 2013  /  1 Comment

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-प्रतीक चौहान||

मैं सुभाषचन्द्र बोस पिछले कई दिनों से अपमानित हो रहा हूं। कभी किसी ने मेरा  चश्मा चुराया, कभी कोई मेरी मूर्ति के नीचे बैठकर शराब पीता है, दिन हो या रात मेरे सामने शराब ही बिकते रहती है। मैंने और न जाने कितने लोगों ने इस देश के लिए अपना बलिदान दिया। लेकिन क्या इसलिए कि मेरी मूर्ति नाले के ऊपर बनाई जाए? या फिर इसलिए कि मेरी आंखों के सामने शराब ठेकेदार दिन भर शराब बेचता रहे? जिस प्रदेश के मुख्यमंत्री को मेरी कद्र नहीं उसे कोई हक नहीं है मेरे बलिदान का मजाक उड़ाए… नहीं चाहिए साल में दो बार सम्मान मुझेनहीं चाहता मंै कि लोग मेरी मूर्ति पर फूलों के हार चढ़ाकर फोटो खिंचवाए… इससे तो अच्छा है कि मेरी मूर्ति को ही हटा दिया जाए। क्यों कि शराब दुकान तो हटेगी नहीं, शायद स्टेशन चौक में अंग्रेजी शराब दुकान के सामने लगी सुभाषचन्द्र बोस की मूर्ति यही सोचती होगी।IMG_0110

 

प्रदेश में जहां महापुरूषों के सम्मान के नाम पर लाखों खर्च किए जाते है। लेकिन दिल से किसी भी महापुरूषों का सम्मान नहीं किया जाता है। इसका जीता जागता उदाहरण है स्टेशन चौक स्थित सुभाषचन्द्र बोस की लगी वो मूर्ति जिसके ठीक सामने शराब की दुकान है। शायद सुराज की बात करने वाले प्रदेश के मुखिया और उनके अधिकारियों को ये दिखाई न दे रहा हो। या तो फिर सब कुछ जानते हुए भी अंजान बने हुए है।

IMG_0115(1)छत्तीसगढ़ में जितनी तेजी के साथ विकास हो रहा है उतनी ही तेजी के साथ शराब की खपत भी प्रदेश में बढ़ती जा रही है। खराब की खपत बढ़े भी क्यों नहीं हर गली- हर नुक्कड़ पर आपको अस्पताल मिले न मिले, दवाई की दुकान हो न हो, लेकिन एक देशी और एक विदेशी दोनों शराब की दुकाने आपको प्रदेश में मिल जाएगी। इसका पूरा श्रेय भी सरकार को ही जाता है। एक ओर सरकार ने गरिबों को मुफ्त का चावल उपलब्ध करा दिया है। जिससे लोग भुखे पेट तो नहीं सो रहे लेकिन कमाई का 50 प्रतिशत से ज्यादा शराब पिने में खर्च कर देते है।

प्रदेश में बढ़ी खपत

छत्तीसगढ़ में विदेशी मदिरा के शौकीन बढ़ रहे हैं। इसकी खपत भी 2010 की तुलना में  2011 वर्ष की में छह फीसदी बढ़ी है लेकिन प्रदेश में शराब की खपत दोनों साल यानि बराबर 8.66 करोड़ प्रूफ लीटर रही जो प्रति व्यक्ति 4.4 लीटर है। अन्य राज्यों की तुलना में यह काफी कम है। फिर भी प्रदेश में आबकारी राजस्व 1633 करोड़ रूपए की हुई जो लक्ष्य से 108 फीसदी ज्यादा है। 2011-12 में 1633 करोड़ की आबकारी आय हुई. जबकि लक्ष्य 1554 करोड़ रूपए था। विदेशी शराब की खपत 5.8 फीसदी जरूर बढ़ी मगर कुल खपत 8.66 करोड़ प्रूफ लीटर रही। वैसे देश में शराब की खपत हर साल 12 से 15 प्रतिशत बढ़ती है।

गुरूद्वारे के पास और स्कूल के पीछे

राजधानी में ऐसी कोई जगह नहीं जहां शराब  दुकान न हो। शराब ठेकेदारों ने सारे नियम कायदों को ताक में रख कर शराब की दुकाने खोल रखी है।

क्या कहते है नियम

आबकारी एक्ट के तहत बाजार, पूजा स्थल, आवासीय कॉलोनी, पेट्रोल पंप, शौक्षणिक संस्थान, स्टेशन, बस स्टैंड, स्नानघर, राजमार्ग के पास शराब दुकान नहीं खोली जा सकती। इन जगहों से दुकान कम से कम 500 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए। लेकिन राजधानी की ज्यादातर शराब दुकानों में इन नियमों का पालन नहीं होता है।

आबकारी एक्ट जेब में!

फाफाडीह

००अंग्रेजी शराब दुकान से लगभग 100 मी. की दूरी पर सेंट्रल कॉलेज

०० शराब दुकान से 50 मी. की दूरी पर आवासीय कॉलोनी  

पंडरी बस स्टैंड

००अंग्रेजी शराब दुकान से लगभग 50 मी. की दूरी पर गुरुद्वारा

००100 मी. की दूरी पर रेल क्रासिंग

तेलीबांधा

०० अंग्रेजी शराब दुकान से 60 मी. दूर उच्च माध्यमिक शाला

खमतराई 

००अंग्रेजी शराब दुकान से लगभग 100 की दूरी पर उच्च माध्यमिक शाला

भनपुरी

००शराब दुकान से लगा हुआ पेट्रोल पंप

००लगभग 100 मी. की दूरी पर उच्च माध्यमिक शाला

०० 50 मी. की दूरी पर लगती है साप्ताहिक बाजार

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. srab kia thhika sa logoa koa prasania nhia hia kuacha logoa koa mulaya sra kar sa prya sania hia mia manta hua kia srab achhia chaj nhia hia but koia deas bchanya kia bat nhia krta etania mahgae hoagiya hia eska barya ma bat nhia krya gea loagoa koa ldanya ka chakar mea rhata hia.

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