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उत्तराखंड आपदा रिपोर्ट – 1

By   /  July 9, 2013  /  No Comments

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उत्तराखंड में हुए तांडव का मंजर जो देखेने को मिला है उससे काफी ज्यादा भयावह स्थिति यहाँ के आम बाशिंदों का सर्वे करने के दौरान सामने आ रही है . दर्द सिर्फ मौत या अपनों का बिछड़ने का ही नहीं वरन उस को बार-बार एहसास दिलाने वाले पल उसकी घनत्व को और बड़ा देता है . अमूमन उजडती हुई बस्ती या परिवेश एक त्रासदी का भी मानक होता है लेकिन इस आपदा में त्रासदी का मानक एक लम्बी जिन्दगी के दर्द को बयान करता है, इस आपदा के दौरान जहाँ केदार घाटी में मौत का तांडव देखने को मिला वहीँ स्थानीय गाँव ज्यादा तबाह नहीं हुए लेकिन ग्रामीणों ने अपनी परिवार संचालकों को खोना पडा है, 80 % गाँव जहाँ पुस्तैनी परंपरा के अनुसार बाशिंदे रहा करते थे वे सब गाँव सुरक्षित है . इन गाँव के ग्रामीण जो अपनी आजीविका के लिए केदारनाथ, गौरीकुंड, रामबाड़ा इत्यादि जगह जाया करते थे इस बार उनका कमाना तो दूर लौटना भी संभव न हो सका . जो बच्चे अपनी छुट्टियों में केदार तीर्थ के गंतव्य स्थानों में जहाँ यात्री अपना पड़ाव करते थे, वहां काम करके आय जुटाया करते थे वे आज उस उफान मारती हुई मंदाकिनी में कहीं समा गए हैं . रामबाड़ा, गौरीकुंड, इत्यादि स्थान जो केदारनाथ जाने के रास्ते में पड़े जाते थे और जिन लोगों का व्यापारिक प्रतिष्ठान या आपदा में हानि हुई है उन सब में अधिकतर के पुश्तैनी घर या गाँव अभी भी जीवित है अत: सर छुपाने के लिए अपनी छत तो है लेकिन जजो घोड़े व खच्चर चालक थे, वे दोनों रूप से जान व मवेशियों की हानि से ग्रसित हैं. जो सबसे बड़ा खतरा उनके सामने हैं, वो उनकी आजीविका का ख़त्म होना है, दो से तीन महीने चलने वाले इस व्यवसाय में यहाँ के लोग साल भर की आमदनी की कल्पना करते हैं लेकिन इस त्रासदी के बाद जिनके प्रतिष्ठान बह गए हैं वो कल्पना तो दूर दोबारा कुछ करने का मादा भी नहीं रख सकते और जो बचे हुए हैं वे आने वाले तीन साल तक किसी प्रकार की आय की संभावनाएं भी नहीं  देख सकते . Uttarakhand floods
पहली सूची के अनुसार 40 गाँव के सर्वे करने के बाद 360 लोग अभी तक लापता है जिन्हें संभवत: भविष्य में मृतक भी घोषित किया जा सकता है और यह वे जो लोग है जो अपने रोजगार के लिए आपदा ग्रसित हुए इलाके में काम के लिए जाया करते थे . दर्दनाक दृश्य तो तब देखने को मिला जहाँ एक गाँव की २२ महिलाएं विधवा हो गयी, देवली गाँव के आस पास इलाके से 27 बच्चे गायब हैं और 54 लोगों की मरने की संभावनाए दिख रही थी, अपनों का खोने का ग़म व दर्द तो इन गाँव में ही नहीं आस पास के गाँव में भी पसरा हुआ दिख रहा था लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की आने वाला समय इनके आजीविका पर बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर देगा .
कालीमठ के निकटवर्ती गाँव जहाँ से संपर्क अभी तक टूटा हुआ है वहां राहत सामग्री हवाई जहाज द्वारा दी जा रही है, वहां कुछ गाँव तबाह होने की भी खबर मिली है, बाल गंगा घाटी में भी दो गाँव के तबाह होने की पुष्ठी हुई है . राहत कार्य में काफी संस्थायें व सरकारी तंत्र लगातार पूर्ण प्रयास कर रहे हैं, समय के बीतते – बीतते संभवत: इन सब में भी थोडा अंकुश लग सकता है अत: कुछ सामाजिक संगठन में मिलके साथ कम करने का विचार किया था जिसमें यहाँ के ग्रामीणों को राहत, पुन:स्थापन के साथ – साथ उनके संसाधनों के हिसाब से आजीविका खड़े करने पर कार्य करेगी .
पहले पड़ाव में आपदा ग्रसित गाँव के वासिंदो को प्रारंभिक व त्वरित राहत पहुचाया जाएगा ख़ास कर जहाँ अभी तक पहुचाना संभव नहीं हुआ है और जहाँ गाँव से समपर्क बहुत कठिन है, उन्हें रोज मर्रा की जिन्दगी के संसाधन उनको मुहैय्या कराये जाने का प्रयास किया जाएगा .
दूसरे पड़ाव में किसी दो गाँव की चिन्हित कर वहां के लोगों की आजीविका को खड़े करने का प्रयास किया जाएगा, मुख्यत: इस बात पर ध्यान रखा जाएगा कि पुश्तैनी तौर तरीके से हो रहे आय के साधनों को सृजित किया जा सके, विधवा महिलाओं को पशु पालन – गाय/ बकरी/इत्यादि. कुछ ग्रामीणों को स्थाननुसार दुकाने खोल के देना, कुछ को स्थानीय संसाधनों के माध्यम से अनेक प्रकार के रोजगार खड़े करना . जिन बच्चो की पढाई पर प्रभाव पड़ सकता है उसे आने वाले समय तक लिए व्यवस्था, साथ में जिन युवाओ या युवतिओं की शादी आपदा के कारण परेशानी में पडने जा रही हो उनकी सहायता स्वरुप विवाह संपन्न कराना प्राथमिकता होगी . अब तक 4 बालिकाओं की जिम्मेदारी स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं द्वारा ले ली गयी है जिसमें 1 बालिका की जिम्मेदारी रोटरी क्लब, श्रीनगर, 1 बालिका की शादी व्यापार मंडल श्रीनगर, 1 शादी निस्वार्थ कदम, U.S.A. और 1 शादी हिमालय बचाओ आन्दोलन से जुड़े अन्य संगठन ने भी ली है, यही नहीं आने वाले समय में सर्वे के दौरान और बालिकाओं की ऐसी ही सहायता की जायेगी.
संयुक्त रूप से काम करें तो और भी प्रभावी ढंग से काम हो सकता है, अत: सब संगठनों से निवेदन है कि आये और मिल के आगे बड़े और ग्रामीणों के दुःख दर्द के सहभागी बने . संगठन स्वयं वहां आके गाँव – गाँव में जाके राहत पहुचाये लेकिन सही जगह और सब लोगों तक पहुचाने में हम आपके सहायतार्थ हो सकते हैं, आपकी उपस्तिथी प्राथनीय है लेकिन जरुरत मंद को राहत मिलना उससे भी ज्यादा आवश्यक है, अत: आप सब की सहूलियत के लिए दो जगह रिलीफ कैंप बनाये गए हैं : इन रिलीफ कैंप में आपके रहने व खाने का पूरा इन्तेजाम भी है:
1. राहत और पुन्रस्थापन रिलीफ कैंप, मस्ता – (गुप्तकाशी के समीप) – गोस्वामी लॉज
2. राहत और पुन्रस्थापन रिलीफ कैंप, श्रीनगर – श्रीयंत्र टापू रिसोर्ट, श्रीनगर
प्रारंभिक रूप में मुख्य ससाधन की जरुरत :
1. राशन : बिस्कुट, नमकीन, इत्यादि जैसी खाद्य न लाये
2. सोलर लालटेन : 500
3. लालटेन बैटरी : 1000
4. वस्त्र : साधारण धोती, शाल, प्री- ऑटम के कपडे स्वेटर/ कार्डिगन, कृपया पुराने या उपयोग किये हुए कपडे न दें
5. बिस्तर – कम्बल, गद्दे, चद्दर, इत्यादि (500)
6. टोर्च – 2000
7. छाते – 2000
8. दूध : पैक्ड
आप सब से निवेदन है की इन संसाधनों को राहत स्वरुप अपना सहयोग दें
संपर्क सूत्र :
• अनिल स्वामी, श्रीनगर/मस्ता : 9760922194
• डॉ. अरविन्द दरमोड़ा, श्रीनगर : 9411358378
• डॉ. संतोष ममगाईं, श्रीनगर/मस्ता : 09412030199
• जगदम्बा प्रसाद रतूड़ी, श्रीनगर : 9412007059
• कृष्णा नन्द मैठाणी, श्रीनगर/कालीमठ: 9456578209
• समीर रतूड़ी : 9536010510
• मुजीब नैथानी, ऋषिकेश: 9897133989
• प्रभा जोशी, प्रथा -ऋषिकेश: 9411753031
• कांडपाल, श्रीनगर/मस्ता :
संगठन :
1. हिमालय बचाओ आन्दोलन
2. डीन- स्कूल ऑफ़ सोशल साइंस, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्व-विद्यालय, श्रीनगर संपर्क: प्रोफ. जे.पी.पचौरी
3. पर्वतीय विकास शोध केंद्र, श्रीनगर, संपर्क: डॉ. अरविन्द दरमोड़ा – 9411358378
4. रोटरी क्लब, श्रीनगर संपर्क: धनेश उनियाल : 9412079049
5. हिमालय साहित्य कला परिषद्, श्रीनगर, संपर्क: डॉ. उमा मैंठानी : 7579428846/9411599020
6. उत्तराखंड सोसाइटी फॉर नार्थ अमेरिकन, (U.S.A)
7. प्रमोद राघव, निस्वार्थ कदम – (U.S.A)
8. उत्तराखंड कौथिक ग्रुप, नयी दिल्ली: संपर्क – भरत बिष्ट – 8285481303
9. सल्ट समाज- दिल्ली
10. हिमालयन ड्रीमज ग्रुप, दिल्ली
11. उत्तराखंड जन जागृति संसथान, खाड़ी : संपर्क: अरण्य रंजन- 9412964003
12. क्रिएटिव उत्तराखंड, दिल्ली
13. उत्तराखंड विकास पार्टी – ऋषिकेश, संपर्क: मुजीब नैथानी – 9897133989, नरेन्द्र नेगी-9897496120
14. अल्मोड़ा ग्राम कमिटी, दिल्ली
15. सार्थक प्रयास, दिल्ली
16. हमर उत्तराखंड परिषद्, दिल्ली
17. उत्तराखंड चिंतन, दिल्ली
18. मेरु उत्तराखंड, दिल्ली
19. सस्टेनेबल एप्रोच ऑफ़ डेवलपमेंट फॉर आल (SADA), दिल्ली संपर्क : रमेश मुमुक्षु – 9810610400, बसंत पाण्डेय – 7579132181, डॉ. सुनेश शर्मा- 9456578242
20. प्रथा, ऋषिकेश – संपर्क: प्रभा जोशी : 9411753031, हरी दत्त जोशी: 9410103188
21. चौखट- जयपुर : दिनेश बेलवाल
निवेदक :
(हिमालय बचाओ आन्दोलन)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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