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बैंकों को हजारों करोड़ का चूना लगाया डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड ने

By   /  July 10, 2013  /  No Comments

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एक ही सम्पति को दिखा कर अलग अलग बैंकों से चार हज़ार करोड़ का कर्जा उठा लिया डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड ने. केनरा बैंक के अलावा भारत के अन्य बैंको को भी चूना लगाया होगा भारत के कई मीडिया-संस्थानों ने… केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो इस बात की तहकीकात भी करेगी की एक ही संपत्ति पर भारत के मीडिया-समूहों ने कितने बैंको और वित्तीय संस्थाओं से “फर्जी-दस्तावेजों के आधार पर कर्ज उठाया है?”…. डेकन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड तो महज एक “छोटी मछली” हो सकती है, व्हेल पकड़ने की प्रक्रिया प्रारंभ…..मीडिया दरबार की खास रिपोर्ट…..

-शिवनाथ झा||

नई दिल्ली : केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो सूत्र के मुताबिक डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड के अध्यक्ष और मीडिया बैरन टी वेंकटराम रेड्डी कुछ अन्य अपराधिक गतिविधियों में भी फंस सकते हैं, जिसका संकेत ब्यूरो को मिल रहा है. रेड्डी के अतिरिक्त संभव है दिल्ली, मुंबई क्षेत्र के प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूह और टीवी के मालिकों से भी पूछताछ हो सकती है.

डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड के अध्यक्ष और मीडिया बैरन टी वेंकटराम रेड्डी

डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड के अध्यक्ष और मीडिया बैरन टी वेंकटराम रेड्डी

 

पिछले दिनों केनरा बैंक की लिखित शिकायत पर डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड के अध्यक्ष और मीडिया बैरन टी वेंकटराम रेड्डी के कार्यालय एवं अन्य ठिकानों पर केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो के अधिकारी ने छापा मारा था. केनरा बैंक ने अपनी शिकायत में डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड पर उनके वरिष्ट अधिकारीयों की साठ-गाँठ से कम्पनी के बैलेंस शीट में बहुत सारे घपले पाए थे.

ब्यूरो सूत्रों के मुताबिक इस सम्पूर्ण घपलों में कम्पनी के ऑडिटर सी बी मौली एंड एसोसिएट के अतिरिक्त कम्पनी के उपनिदेशक पी के ऐय्यर, प्रबंध निदेशक विनायक रवि रेड्डी और वेंकटराम रेड्डी का मुख्य हाथ है.

केनरा बैंक के अनुसार कम्पनी के सभी आला अधिकारीयों ने (अध्यक्ष सहित) कम्पनी की बैलेंस शीट में बहुत बड़ी मात्र में फेरबदल किया था. इन सभी बातों का खुलासा बैंक के फोरेंसिक ऑडिट में सामने आया. कम्पनी के अलावा इन सभी लोगों पर क्रिमिनल कांस्पीरेसी, चीटिंग और फोर्जरी का मामला दर्ज किया गया है. बैंक ने इस साल के फरवरी माह में सी बी आई के पास एक शिकायत दर्ज करा कर डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड के खिलाफ जाँच करने का अनुरोध किया था.

सी बी आई सूत्रों के मुताबिक डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड के अतिरिक्त मुंबई, दिल्ली और अन्य क्षेत्रों के कुछ अन्य मीडिया हाउस पर भी निगाहें टिकी है जो बैक के नियमों के विरुद्ध जाकर दुसरे अन्य वित्तीय संस्थाओं से गलत दस्तावेज प्रस्तुत कर ऋण ले चुके है. इतना ही नहीं, सी बी आई सूत्रों का मानना है कि जिन शेयर और एसेट्स को दिखाकर ये लोग एक वित्तीय संस्था से कर्ज लिए हैं, उन्ही शेयर और एसेट्स के आधार पर दुसरे वित्तीय संस्थानों और बैंको से भी कर्ज लिया गया है. सूत्रों के मुताबिक, “इस बात की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि इन सभी प्रक्रियाओं में वित्तीय कर्ज देने वाले दुसरे वित्तीय संस्थानों और बैंको के अधिकारीयों की भी साठ-गाँठ हो सकती है.”deccan chronicle

डेक्कन क्रोनिकल होल्डिंग्स लिमिटेड कम्पनी अभी ४०००/- करोड़ रूपये का ऋणी है. केनरा बैंक का कहना है की इस “जालसाजी” के कारण उसे ३५७.७७ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

सी बी आई सूत्रों के अनुसार, एजेंसी भारत के अन्य बैंकिंग और वित्तीय संस्थाओं के संपर्क में है जिन्होंने विभिन्न मीडिया-समूहों को कर्ज दिए हुए हैं. एजेंसी उन सभी दस्तावेजों को इकट्ठा करने जुट गयी है, जिनमें एक ही सम्पति, शेयर और एसेट्स के आधार पर एक से ज्यादा बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने उन्हें क़र्ज़ दे दिया है. यदि उन्ही संपत्तियों को दिखाकर दुसरे वित्तीय संस्थानों या बैंको से कर्ज लिया गया होगा और जिसके कारण बैंकों और वित्तीय संस्थानों को घाटा हुआ होगा या हो रहा होगा – तो सभी एक ही नियम के तहत आयेंगे.

CBI-Officeसी बी आई अधिकारी किसी भी बात को खुलासा करने से इंकार किया, परन्तु उन्होंने कहा: “हमारा मानना है की केनरा बैंक सबसे पहले सामने आया है, ऐसी स्थिति में अन्य बैंकों को भी प्रश्रय मिलेगा और वे भी आगे आयेंगे, यदि उनके साथ भी धोखा-धरी हुआ है. वैसे, संभावनाओं को इंकार नहीं किया जा सकता है. संभव है बहुत बड़े कांड का पर्दाफाश हो जिसमे भारत के बड़े बड़े  मीडिया घराने दोषी हों.”

एक प्रश्न के उत्तर में सी बी आई के सूत्र ने कहा कि पिछले दिनों हुए “कोयला-घोटाला कांड” को भी देखा जा रहा है, जिसमे भारत के कुछ बड़े मीडिया हाउस सम्मिलित हैं. सूत्रों के अनुसार “इतने बड़े पैमाने पर कोई भी वित्तीय घोटाला कोई एक आदमी नहीं कर सकता है जब तक संस्थान के शीर्षस्थ अधिकारीयों, राज-नेताओं का हाथ न हो. देखना यह है कि इस समुद्र में कितने बड़े-बड़े लोगों ने डुबकी लगायी हैं या लगा रहे हैं.”

खोजबीन जारी है..

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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