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श्री-न्यूज चैनल ने चबा डाली सौ से ज्यादा पत्रकारों की रोजी

By   /  July 11, 2013  /  No Comments

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पहले 35 और बीती देर शाम 70 कर्मचारी बर्खास्त..बरेली और हिमाचल बुलेटिन बंद, स्ट्रिंगर्स भी निकाले गये…लोहा-सरिया के धंधेबाजों ने शुरू किया था यह न्यू्ज चैनल…..

-कुमार सौवीर||

लखनऊ : ताजा-ताजा पैदा हुए श्री-न्यूज चैनल ने अपने करीब एक सौ कर्मचारियों-पत्रकारों की रोजी-रोटी पर लात मार दी है। खबर है कि विगत दिनों इस चैनल ने अपने 35 से ज्यादा पत्रकारों और कर्मचारियों को बेरोजगार कर दिया था, लेकिन बीती शाम तो कुल 70 पत्रकारों और कर्मचारियों का भविष्‍य भी अंधकारमय कर‍ दिया गया। हैरत की बात तो यह है कि बेरोजगार किये गये लोगों में इस चैनल के सीईओ आलोक अवस्थी तक शामिल हैं, लेकिन इस चैनल का पूर्णकालिक कर्ताधर्ता रहे आलोक को अपनी इस बर्खास्तगी का यह नोटिस बर्खास्तगी के बाद ही मिला।Shri News Logo
आपको बता दें कि पिछले कुछ समय से यूपी के छुटभइया टाइप नवधनाढ्यों ने अपनी पीठ खुद ही ठोंकने का यह तरीका खोजा था कि एक नया चैनल या अखबार लांच कर दिया जाए। इस अंधी दौड़ में रसोई, मसाला से लेकर लोहा-लंगड़ तक के बिजनेसमैनों ने पत्रकारिता की चिंदी-चिंदी नोंचनी शुरू कर दिया था। इस कवायद में दलाली का अंश अधिकांश घुसेड़ा गया था। हुआ यह कि इन ऐसे नये-नये समाचार-संस्थानों ने दलाल टाइप लोगों को अपने यहां पत्रकार बनवा लिया और तब ऐसे पत्रकारों ने प्रेस-कांफ्रेंस का बट्ठा तोड़ डाला। होने यह लगा कि ऐसे संस्थाथनों के लोग अधिकारियों और नेताओं के यहां पहुंच कर अपने संस्थानों और साथ ही साथ अपने धंधे चौंचक करने लगे। नतीजा यह कि परम्परागत पत्रकारिता के पत्रकारों की संख्या ऐसे खोटे सिक्कों की भीड़ में खोने लगी। लेकिन कुछ ही वक्‍त में ऐसे नव-धनाढ्य पत्रकारों को जब यह पता चल गया कि उनका यह धंधा अब घाटे का है, तो आखिरकार उन लोगों ने ऐसे संस्थानों पर ताला लगाना शुरू कर दिया। श्री-न्यूज इसी परम्परा की अगली कड़ी है।
खैर, श्री न्यूज के कभी बड़े ओहदे पर रहे एक पत्रकार ने बताया है कि आलोक अवस्थी के अलावा 10 कैमरामैन, 7 रिपोर्टर, 5 मार्केंटिंग और 14 डेस्क सहायकों के साथ ही साथ बड़ी तादात में लोगों को पैदल कर दिया गया है। खबर है कि इस संस्थान ने अपने बरेली, हिमाचल बुलेटिन को बंद कर दिया है। बर्खास्त किये गये पत्रकारों में बड़ी संख्या में स्ट्रिंगर्स भी है। इन लोगों के मेहनताना का भुगतान भी लटक गया बताया जाता है।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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