Loading...
You are here:  Home  >  दुनियां  >  देश  >  Current Article

प्राण नहीं रहे…

By   /  July 12, 2013  /  2 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

हिंदी फ़िल्मों के मशहूर विलेन और चरित्र अभिनेता प्राण नहीं रहे. उनकी मौत मुंबई में हुई. वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उनके बेटे सुनील ने बताया कि वो लीलावती अस्पताल में भर्ती थे जहां उनकी मौत देर शाम हो गई.veteran-actor-pran-passed-away

उन्हें इस साल दादा साहब फ़ालके अवार्ड से सम्मानित किया गया था. लेकिन वो इस क़दर बीमार थे कि इसे ख़ुद स्वीकार करने दिल्ली नहीं आ पाए थे.

बाद में सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने उनके घर जाकर उन्हें अवार्ड दिया.

प्राण ने अपना फिल्मी करियर 40 के दशक में शुरू किया. शुरुआत की कुछ फिल्मों में उन्होंने बतौर हीरो काम किया. लेकिन उनकी असल पहचान बनी खलनायक के तौर पर.

1949 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘ज़िद्दी’ और ‘बड़ी बहन’ से उनकी पहचान विलेन के तौर पर बननी शुरू हो गई.

फिर तो उन्होंने उस समय के मशहूर हीरो जैसे राज कपूर, देव आनंद और दिलीप कुमार की कई फिल्मों में बतौर खलनायक अविस्मरणीय भूमिकाएं कीं.

लेकिन साल 1967 में मनोज कुमार की फिल्म ‘उपकार’ में उनकी निभाई मलंग चाचा की चरित्र भूमिका ने उन्हें एक अलग ही पहचान दिला दी.

फिर प्राण को चरित्र भूमिकाओं में लिया जाने लगा.

70 के दशक के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के साथ उन्होंने ज़ंजीर, डॉन, अमर अकबर एंथनी और शराबी जैसी यादगार फिल्में दीं.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. मृत्यु एक सत्य है,इसका वरण सभी को करना ही पड़ता है कोई चाहे या न चाहे किन्तु मरणोपरांत भी हम जीवित रह सकते है..लोगों के दिलो में ये उक्ति प्राण साहब पर चारित्राथ होती है..बचपन में मैंने एक लेख पढ़ा था जो उन पर लिखा गया था उसका शीर्षक मुझे आज भी यातावत स्मरण है ''परदे पर बुरा बना एक भला आदमी'' इस लेख से मैं बहुत प्रभावित हुई थी असल जीवन में उनका व्यक्तित्व उनके द्वारा निभाए गए नकारात्मक किरदारों के बिलकुल विपरीत था ,वो एक सीधे,' सच्चे,विनम्र और जमीन से जुड़े हुए इन्सान थे परदे की झूठी चमक उनके व्यकतित्व पर कोई कुप्रभाव नहीं डाल पाई….अपने पुरे फ़िल्मी सफ़र १९४९ की जिद्दी से लेकर २००७ में आई तुम जियो हजारो साल…तक उनका अभिनय बेजोड़ रहा नकारात्मक अभिनय हो या चरित्र अभिनेता का उन्होंने सभी में अपनी अमिट छाप छोड़ी..आज वो हमारे बीच नहीं है परन्तु वो हमारी स्म्रतियों में सदा रहेगे…ईश्वर उन्हें शरण दे……कसमे वादे प्यार वफ़ा सब……

  2. Siddu Kumble says:

    अभिनेता प्राण हिन्दी सिनेमा जगातला महिल स्टोन आहे जिव्हा भविष्यात भारतीय सिनेमाचा इतिहास लिहले जाईल तेव्हा त्या महिल स्टोनचा विचार केल्याशिवाय पुढे जाता येणार नही , प्राण सर्वगुणसंपन्न अभिनेता होता जेव्हा खलनायक भूमिका करायचं तेव्हा भारतीय महिला आपल्या मुलाचा नाव प्राण ठेवण्यास घाबरत असे , याचा अर्थ प्राणला मिळालेली अभिनयची पावती होती, नंतरच्या काळात चिरित्र भूमिका करताना त्या काळातले सुपरस्टार देखील प्राण बरोबर भूमिका करायला तयार नसत कारण प्राण त्या सिनेमात भाव खाऊन जायचं. आशा अभिनेता आज आपल्यातून निघून गेला, कदाचित स्वर्गात देवानबरोबर भूमिका करायची असेल. आशा महान कलावंतला विनम्र प्रणाम.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

जौहर : कब और कैसे..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: