/उल्टा पड़ा बाबा पर वार, चारों तरफ से घिरी सरकार

उल्टा पड़ा बाबा पर वार, चारों तरफ से घिरी सरकार

भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा रामदेव की मुहिम को हथकंड़ों से खत्म करने के बाद भारत सरकार घिर गई है. अन्ना हजारे ने लोकपाल विधेयक की बैठक का बहिष्कार कर दिया, जबकि बीजेपी विशेष संसद सत्र की मांग कर रही है. इन सबसे अलग खुद बाबा रामदेव ने अपना सत्याग्रह फिर शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि सरकार ने अपने ताबूत में कील ठोंकना शुरू कर दिया है क्योंकि उन पर कार्रवाई की जो प्रतिक्रिया होगी, उसे सरकार झेल नहीं पाएगी. अन्ना हजारे ने सोमवार को कहा है कि बाबा रामदेव पर कार्रवाई के बाद यह साफ हो गया है कि सरकार भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए कृतसंकल्प नहीं है और ऐसे में वह लोकपाल विधेयक बनाने के लिए तैयार की गई संयुक्त ड्राफ्टिंग कमेटी का बहिष्कार कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कह दिया कि वह आठ जून को होने वाली दूसरी बैठक में भी हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि उनका पहले से कुछ कार्यक्रम है. लोकपाल विधेयक ड्राफ्टिंग कमेटी में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं की बैठक के बाद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को चिट्ठी लिख कर कहा कि सरकार तो सभी जिम्मेदार लोगों को इस कानून से बाहर रखना चाहती है. इसमें प्रधानमंत्री, सांसदों की खरीद फरोख्त और ज्यादातर न्यायाधिकारी शामिल नहीं किए जा रहे हैं. मुखर्जी इस ड्राफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष हैं. सरकार पर शक उन्होंने चिट्ठी में कहा, “सरकार का यही नजरिया है.” उनका कहना है कि इस मामले में मुख्यमंत्रियों के लिए जो प्रश्न तैयार किए गए हैं, उसमें जरा भी गंभीरता नहीं दिखती है. बाबा रामदेव पर आधी रात की गई कार्रवाई का जिक्र करते हुए पत्र में लिखा गया है कि सरकार जिस तरह से काम कर रही है, उससे यह शक पैदा होता है कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ करने का इरादा रखती है. उन्होंने लिखा, “शनिवार की रात रामलीला मैदान पर जो कुछ हुआ, उससे हमारा शक और पुख्ता होता है. इन सारी गतिविधियों से सरकार पर शक बढ़ रहा है और इसलिए हम आज की बैठक का बहिष्कार कर रहे हैं.” उन्होंने कहा कि 9 से 11 जून तक अन्ना हजारे का पहले से कार्यक्रम तय है, इसलिए 10 जून की बैठक को भी टालना होगा और कोई दूसरी तारीख तय करनी होगी. हालांकि उन्होंने कहा कि वक्त गुजरता जा रहा है और इस पर जल्द कोई कदम उठाए जाने की जरूरत है. नतीजा भुगतेगी सरकार उधर, हरिद्वार में बाबा रामदेव ने कहा कि कांग्रेस छोड़ कर सभी राजनीतिक पार्टियां उनके साथ हैं और उनके साथ जो कुछ हुआ है, उसके बाद केंद्र सरकार को इसका नतीजा जरूर भुगतना पड़ेगा. रामदेव ने कहा, “निजी तौर पर मैं प्रधानमंत्री की इज्जत करता हूं लेकिन उन्होंने अपने राष्ट्रीय दायित्व का निर्वाह नहीं किया है.” यह पूछे जाने पर कि उन्हें किन संगठनों से मदद मिल रही है, रामदेव ने कहा, “कांग्रेस को छोड़ कर सभी पार्टियां मेरा साथ दे रही हैं. हालांकि कुछ मेरी आलोचना भी कर रही हैं लेकिन मुझे पता है कि दिल से वे मेरे साथ हैं. मुझे आध्यात्मिक और धार्मिक गुरुओं का सहयोग भी मिल रहा है.” बाबा रामदेव ने सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा किया और कहा कि खुद से संज्ञान लेते हुए अदालत ने अच्छा काम किया है. उन्होंने कहा कि मानवाधिकार संगठनों और राष्ट्रीय महिला आयोग को भी कदम उठाने चाहिए क्योंकि रामलीला ग्राउंड पर महिलाओं और बच्चों सहित सभी लोगों के साथ बुरा सलूक किया गया. यह पूछे जाने पर कि उन्हें महिलाओं के कपड़े में क्यों भागना पड़ा, रामदेव ने कहा, “इससे मेरी कमजोरी साबित नहीं होती. महिला कमजोर नहीं होती. वही पुरुषों को जन्म देती है.” बीजेपी का वार उधर, वरिष्ठ नेता लाकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में बीजेपी के एक प्रतिनिधिमंडल ने इस मौके का पूरा राजनीतिक फायदा उठाते हुए राष्ट्रपति से मुलाकात कर संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है. राष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने बीजेपी नेताओं को बताया कि प्रतिनिधिमंडलों से मिलना और ज्ञापन लेना कभी मात्र औपचारिकता नहीं रही है और हमेशा कार्रवाई की गई है. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राजघाट पर सत्याग्रह शुरू कर दिया और उनका कहना है कि सरकार घोटालेबाजों को बचाने की कोशिश कर रही है. राजघाट पर आडवाणी के अलावा बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली सत्याग्रह कर रहे हैं. प्रसाद ने कहा कि कांग्रेस को याद रखना चाहिए कि बीजेपी ने “गॉडमदर ऑफ इंडिया” इंदिरा गांधी के खिलाफ भी संघर्ष किया और जीत हासिल की. बाबा रामदेव भ्रष्टाचार और विदेशी बैंकों में जमा काले धन को भारत लाने की मुहिम में जुटे हैं. इस मामले में उन्होंने शनिवार को दिल्ली के रामलीला मैदान पर अनशन शुरू किया, जिसे उसी रात पुलिस ने भंग कर दिया और रामदेव को दिल्ली से बाहर कर दिया.

(पोस्ट www.dw-world.de में छपे आलेख पर आधारित)

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.