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बाड़मेर में प्रस्तावित रिफाइनरी को लेकर घमासान

By   /  July 14, 2013  /  No Comments

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लीलाला से रिफाइनरी नहीं जाने देंगे’.. बाड़मेर मुख्यालय पर रिफाइनरी महापड़ाव कल, जुटेंगे हजारों लोग..स्थान परिवर्तन किए जाने से खफा है जनता… दिखाएंगे ताकत…

-चन्दन सिंह भाटी|| 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लीलाला के लिए स्वीकृत रिफाइनरी को पचपदरा शिफ्ट कर बाड़मेर की जनता के साथ पीठ पीछे छूरी घोंपने का काम किया है. रिफाइनरी लीलाला में ही लगेगी, चाहे इसके लिए जान क्यों न देनी पड़े. पचपदरा में रिफाइनरी का शिलान्यास करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सोनिया गांधी को लाशों के ऊपर से गुजरना होगा. यह बात भाजपा नेता कैलाश बैनीवाल ने कही.barmer refinery

बाड़मेर में प्रस्तावित रिफाइनरी को लेकर अब घमासान तेज होता जा रहा है, जहां पूर्व में प्रस्तावित स्थान को बदले जाने के बाद बायतु सहित बाड़मेर जिले के किसान सरकार के विरोध में खड़े हो गए. जबकि बायतु विधायक व पूर्व सांसद कर्नल सोनाराम चौधरी पहले से ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विरोधी माने जाते हैं और वो रिफाइनरी को लीलाला में लगाए जाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

रिफाइनरी बायतु का हक : कर्नल

बायतु विधायक कर्नल सोनाराम चौधरी ने कहा कि रिफाइनरी का हक केवल बायतु को है. इसके अलावा अन्य स्थान पर रिफाइनरी लगाना बर्दाश्त पर नहीं होगा. गहलोत सरकार जनता को रिफाइनरी के नाम भ्रमित कर रही है. अशोक गहलोत रिफाइनरी को मोहनगढ़ ले जाने की बात कर मेरे ऊपर दोष लगा रहे हैं. अब जनता 15 जुलाई को बताएगी कि अशोक गहलोत की तानाशाही कैसे चलती है.

बायतु का दौरा किया

रिफाइनरी को लेकर 15 जुलाई को बाड़मेर जिला मुख्यालय पर होने वाले महापड़ाव के लिए शनिवार को कर्नल सोनाराम चौधरी ने बायतु क्षेत्र के कई गांवों का दौरा किया और लोगों से मिलकर आंदोलन में शरीक होने की अपील की. साथ ही रिफाइनरी बचाओं संघर्ष समिति के अन्य नेताओं ने भी बायतु क्षेत्र के गांवों का दौरा किया.

 

जहां तेल निकले वहां लगे रिफाइनरी

रिफाइनरी बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष चेतनराम चौधरी का कहना है कि तेल तो बायतु क्षेत्र में निकल रहा है और रिफाइनरी पचपदरा में लगे, यह ठीक नहीं है. रिफाइनरी बायतु के लीलाला में ही लगेगी, इसके लिए जनता एकजुट है. ताकत 15 जुलाई को होने वाले महापड़ाव में दिखाएंगे.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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