Loading...
You are here:  Home  >  दुनियां  >  देश  >  Current Article

अण्णा को बिना शर्त अनशन की इज़ाजत, ‘ थर्ड मीडिया’ के तेवरों से घबराई सरकार

By   /  August 18, 2011  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

बुधवार शाम जब किरण बेदी तिहाड़ जेल में अण्णा से मिल कर बाहर निकलीं तो उनसे टीवी और प्रिंट के मीडियाकर्मियों ने पूछा कि उनकी अगली योजना क्या है? इस पर किरण बेदी ने कहा, “आपको जल्दी ही पता चल जाएगा..”

किरण बेदी का ट्विटर पेज

लेकिन सब को उनके ट्वीट के जरिए अन्ना के संदेश मिले। बाद में ढाई बजे रात के बाद किरण बेदी ने दोबारा ट्वीट किया और लिखा कि अण्णा दिल्ली पुलिस के प्रस्तावों पर रामलीला मैदान जाने के लिए राज़ी हो गए हैं। पूरे देश में यह खबर ट्विटर के हवाले से टीवी चैनलों पर भी फैल गई। अण्णा के आंदोलन में सबसे बड़ी भूमिका अगर किसी की रही है तो वह है थर्ड मीडिया, यानि वह इंटरनेट जिस पर आप यह खबर पोस्ट के जरिए पढ़ रहे हैं।

न सिर्फ किरण बेदी के ट्वीट बल्कि लाखों समर्थको के फेसबुक और गूगल प्लस से भेजे गए संदेशों ने अण्णा को आम आदमी के और पास ला खडा किया है, लेकिन खबर है कि अब केंद्र सरकार इस पर चुपके-चुपके लगाम कस रही है। बताया जा रहा है कि ब्लॉगिंग और नेटवर्किंग की जंग में आम आदमी से नहीं जीत पाई तो उसने यह हथकंडा शुरु कर दिया।

बुधवार को दिल्ली समेत देश के कई इलाकों में न सिर्फ इंटरनेट बुरी तरह प्रभावित रहा, बल्कि इस पर खुलने वाली कई साइटें भी लड़खड़ा कर ही खुलीं। दिलचस्प बात यह है कि इस कदम में सरकार का साथ कई आईएसपी ने भी दिया। पूर्वी दिल्ली, जहां कई मध्यम स्तर के अखबारों और पोर्टलों के दफ्तर हैं, में बुघवार को एयरटल का ब्रॉडबैंड ठप पड़ गया। गौरतलब है कि अण्णा को पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार से ही गिरफ्तार किया गया था और जहां फौरन स्थानीय लोगों ने पुलिस की गाड़ी को घेर लिया था। देश के कई हिस्सों में फेसबुक और दूसरे आंदोलन से जुड़े वेबसाइटों के नहीं खुलने की शिकायतें आ रही हैं। बीएसएनएल का सर्वर भी कई जगह और कई बार ठर हो गया। ऐसा लगता है सरकार मीडिया से कम, थर्ड मीडिया से ज्यादा घबराई हुई है।

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

You might also like...

नरेंद्र मोदी दिवालिया होने के कगार पर खड़े अनिल अम्बानी का कौन सा क़र्ज़ा उतार रहे हैं..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: