Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

आय से अधिक संपत्ति के मामले में अब न्यायालय ही सहारा

By   /  July 26, 2013  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

राजनैतिक गलियारों में एक कथित डील होने की खबर मीडिया के माध्यम से सामने आई. नेताजी ने डील न होने के संकेत दिए किन्तु केंद्र सरकार के कदमों से डील होने जैसे संकेत मिले. सत्य क्या है ये तो डील का लाभ लेने वाले ही जानते हैं. स्थितियां, समस्या, सवाल इस डील से इतर हैं जो अक्सर हम सभी के सामने उपस्थित हो जाते हैं. आये दिन समाचार आता है कि फलां राजनीतिज्ञ पर, फलां मंत्री पर आय से अधिक संपत्ति का आरोप, जाँच प्रारम्भ. तब लगता है कि शायद राजनीति को धन पैदा करने का मैदान समझने वालों पर अंकुश लगेगा. कुछ समय इस खुशफहमी में गुजरने के बाद सारी खुशफहमी दूर हो जाती है जब पुनः समाचार मिलता है कि फलां राजनेता, मंत्री बरी. ऐसे में लगता है कि प्रथम तो इस तरह का मामला बनाया ही क्यों गया और जब बनाया गया तो किस कारण से सम्बंधित व्यक्ति को ऐसे आरोप से मुक्त कर दिया गया?money

एक बार किसी भी व्यक्ति का राजनीति में प्रवेश हो भर जाए फिर वो कुछ ही दिनों, महीनों में (यहाँ वर्षों का इंतज़ार नहीं करना होता है) अकूत संपत्ति का मालिक हो जाता है. जबकि उस सम्बंधित व्यक्ति का न तो कोई छोटा-बड़ा कारोबार चल रहा होता है, न ही किसी तरह की बहुराष्ट्रीय कंपनी का पैकेज उसके साथ होता है, न ही वह किसी कंपनी-मिल-कारखाने का मालिक होता है, कृषि-योग्य भूमि भी इतनी नहीं होती है कि उसके द्वारा लाखों-करोड़ों रुपयों को पैदा किया जा सके. एकबारगी उक्त स्थितियों में किसी भी स्थिति को सत्य मान लिया जाये तो वह राजनीति में प्रवेश के पूर्व इतनी अकूत संपत्ति का मालिक क्यों नहीं था? कहीं न कहीं ये सन्देश आसानी से जगजाहिर होता है कि जो भी संपत्ति उस व्यक्ति के द्वारा बनाई गई है वो सिर्फ और सिर्फ राजनीति का सुफल है. इस कथित सत्य के साथ एक सत्य राजनैतिक स्वार्थ-पूर्ति करता दिखता है और वो है आय से अधिक संपत्ति का मामला बनाकर सम्बंधित राजनैतिक व्यक्ति, राजनैतिक दल में सीबीआई का डर पैदा करना.

ऐसी स्थिति से समाज में एक तरह का निराशाजनक माहौल बनता है. एक तरफ ऐसे लोग हैं जो बिना किसी कारोबार, कारखाने, नौकरी के लाखों-करोड़ों रुपये की संपत्ति के मालिक हैं और दूसरी तरफ ऐसे लोग हैं जो अनथक मेहनत के बाद भी दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाने में असफल रहते हैं. एक तरफ ऐसे सत्तासम्पन्न व्यक्ति हैं जो अकारण अकूत संपत्ति के मालिक होने के बाद भी न तो आयकर विभाग के लपेटे में आते हैं, न ही सरकारों के और न ही जाँच-एजेंसियों के झमेले में फंसते हैं और दूसरी तरफ वे लोग भी हैं जो अपने पसीने की कमाई से ही मकान-दुकान-कार लेने के चक्कर में आये दिन सरकार, आयकर, जाँच-एजेंसियों के सवालों का जवाब देते-देते टूट जाते हैं. शायद ही कोई मामला ऐसा रहा हो जिसमें राजनैतिक व्यक्ति को आय से अधिक संपत्ति मामले में किसी तरह की सजा हुई हो. देखा जाये तो वर्तमान में जितने राजनैतिक व्यक्तियों पर इस तरह के आरोप लगाये गए हैं वे सब के सब अंत में किसी न किसी कथित डील (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष) के बाद ही आरोप-मुक्त हो सके हैं.

वर्तमान में माननीय न्यायालय ने अपनी सक्रियता से बहुत से मामलों में जनहित का ध्यान रखा गया है; राजनीति के अपराधीकरण को रोकने हेतु, स्वच्छ राजनैतिक वातावरण बनाने के प्रति भी सकारात्मक कदम उठाये हैं. ऐसी अपेक्षा आय से अधिक संपत्ति के मामलों में भी जा सकती है. माननीय न्यायालयों को स्वतः इस तरह के मामलों में संज्ञान लेते हुए जाँच करवाई जानी चाहिए, आरोप तय करके मुकदमों को चलाया जाना चाहिए. जब कार्यपालिका, विधायिका अपना काम सही से नहीं करे और स्वघोषित चौथा स्तम्भ ‘मीडिया’ भी चापलूसी सी करता दिखे तो फिर न्यायपालिका को ही आगे आना चाहिए. आखिर अव्यवस्थित, भ्रष्ट, तानाशाहात्मक, राजशाही व्यवस्था से त्रस्त नागरिकों का न्यायालयों से ऐसी अपेक्षा रखना कतई गलत नहीं कहा जा सकता है.

.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

बुन्देलखण्ड के उरई-जालौन में जन्म। बुन्देलखण्ड क्षेत्र एवं बुन्देली भाषा-संस्कृति विकास, कन्या भ्रूण हत्या निवारण, सूचना का अधिकार अधिनियम, बाल अधिकार, पर्यावरण हेतु सतत व्यावहारिक क्रियाशीलता। साहित्यिक एवं मीडिया क्षेत्र में सक्रियता के चलते पत्र-पत्रिकाओं एवं अनेक वेबसाइट के लिए नियमित लेखन। एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन।
सम्प्रति साहित्यिक पत्रिका ‘स्पंदन’ और इंटरनैशनल रिसर्च जर्नल ‘मेनीफेस्टो’ का संपादन; सामाजिक संस्था ‘दीपशिखा’ तथा ‘पीएचड होल्डर्स एसोसिएशन’ का संचालन; निदेशक-सूचना अधिकार का राष्ट्रीय अभियान; महाविद्यालय में अध्यापन कार्य।
सम्पर्क – www.kumarendra.com
ई-मेल – [email protected]
फेसबुक – http://facebook.com/dr.kumarendra, http://facebook.com/rajakumarendra

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

पाकिस्‍तान ने नहीं किया लेकिन भाजपा ने कर दिखाया..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: