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राजस्थान में जुबानी जंग से गर्माया राजनीतिक माहौल

By   /  July 22, 2013  /  No Comments

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-संगीता शर्मा||

राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अब राजनीतिक माहौल गर्माने लगा है. कांग्रेस और भाजपा के एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप से लेकर जुबानी जंग तेजी पकड़ने लगी है. कांग्रेस की संकल्प यात्रा और भाजपा की सुराज संकल्प यात्रा अब आखिरी पड़ाव पर है. अब तक चल रही जंग में सीधा मुकाबला मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के बीच है.Gehlot-vasundhra

दोनो ही एक दूसरे पर तीखे प्रहार करने का कोई मौका नहीं चूकना चाहते. गहलोत अपने पांच साल के कार्यकाल और नई लुभावनी योजनाओं के बलबूते अपनी सरकार की पीठ थपथपाने के साथ ही वसुधंरा राजे सरकार के भ्रष्टाचार के किस्से सुनाने से लेकर व्यक्तिगत टिप्पणियां करने में भी गुरेज नहीं करते है. वहीं राजे भी उनकी सरकारी योजनाओं पर सवाल उठाने से लेकर कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रोबर्ट वाड्रा और मंत्रियों के पचपदरा में जमीन खरीदने का आरोप खुलकर लगा रही है.

यही नहीं गहलोत वसुंधरा की चाल चरित्र व चेहरा सामने आने और धार्मिकता का आंडबर की बात कहते हुए उन पर तीखे कटाक्ष कर रहे है तो वसुंधरा गहलोत के दूध का धुला व गांधीवादी होने पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए उनके ही जमीन घोटालों में लिप्त होने का गंभीर आरोप लगा रही है. एक सभा में राजे गहलोत पर तीखे प्रहारों के साथ निशाना दागती है तो गहलोत भी उन पर तल्ख पलटवार कर जवाब दे रहे है.

जुबानी जंग में मुकाबला बराबर पर चल रहा है है और एक दूसरे को भ्रष्ट बताकर अपना वोट बैंक मजबूत करने की जुगाड़ं कर रहे है. गहलोत दुबारा सत्ता हासिल करने में पूरी ताकत लगाए है. दूसरी ओर वसुधंरा राजे भी अब तीखे तेवरों के साथ मैदान में बरसते हुए सत्ता हासिल करने की जुगत लगा रही है. वे जनता से नए नए वादे कर रही है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दुष्प्रचार के बावजूद फिर से सत्ता में लौटने को लेकर आश्वस्त है और आत्मविश्वास उनके चेहरे पर स्पष्ट झलक रहा है तो कांग्रेस के गढ़ मारवाड में देखने और सुनने वाले लोगों का हुजुम देखकर राजे भी सत्ता में लौटने की उम्मीद पाले है. वे सभाओं में कांग्रेस पर गजब बरस रही है तो कांग्रेस के विवादित महासचिव दिग्विजय सिंह सुराज को सुरा यात्रा कह भाजपाइयों को बयानबाजी करने का मुदृदा दे गए है.

यह अलग बात हे कि कांगेस और भाजपा दोनों पार्टियों में खिलाफत भी है और बगावत भी है. मौका आने पर कांग्रेस के केन्द्रीय मंत्री सी पी जोशी गहलोत पर कटाक्ष कर जाते है तो वहां घनश्याम तिवाड़ी सहित कई भाजपा नेता सुराज यात्रा और वसुंधरा से दूरी बनाए है. गहलोत के साथ भी अभी तक कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष डा.चन्द्रभान सिंह नजर आ रहे हैं तो वसुधंरा के साथ गुलाबसिंह कटारिया ही दौड़ रहे है.

हालांकि वसुधंरा राजे के साथ पिछले कार्यकाल में उनकी खुलकर खिलाफत करने वाले पूर्व केन्द्रीय मंत्री जसवंतसिंह  अब उनके साथ हो गए है. पांच साल पूर्व उन्होने ही राजे की खिलाफत करने वाले तमाम मंत्रियों को जसोल में रियाण के बहाने अफीम की मुनहार कर एकजुट किया था और बाद में उनकी पत्नी शीतल कंवर ने राजे के देवी वाले पोस्टर का खुला विरोध कर मुकदमा तक दर्ज करवाया था. मंझे हुए़ राजनीतिज्ञ जसवंतसिंह अब फिर से उनके नजदीक आ गए और वजह भी साफ है कि उनके बेटे मानवेन्द्रसिंह को फिर से लोकसभा चुनाव लड़ना है. सिंह बाड़मेर दौरे के दौरान वसुधंरा राजे को भावी मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट कर चुके है.

राजे मारवाड़ में तुफानी दौरा कर रही है तो गहलोत किरोड़ीलाल मीणा के इलाके से लेकर मेवात व मारवाड में वसुंधरा पर हमले बोल रहे है. मजेदार बात यह है कि अब इन सभाओं में टिकट पाने वाले दावेदार गहलोत व राजे को घेरे अधिक नजर आने लगे है और वे किसी तरह उन दोनों की नजर में आने की मशक्कत में लगे हुए है. वे अपने समर्थकों के साथ अपनी ताकत भी दिखा रहे है. जुबानी जंग के अलावा फेसबुक पर भी दोनो नेताओं का हर मूवमेंट नजर आता है. शहरी और युवा मतदाताओं को जोडने के लिए फेसबुक पर जंग छिड़ी हुई है और कौन अधिक लोकप्रिय है यह जताने की होड़ मची हुई है.

हालांकि गहलोत पर भाजपा नेता फेसबुक पर घोटाला करने का आरोप लगा रहे है लेकिन उसके बावजूद लोकप्रियता और अच्छे कमेंटस में गहलोत का ग्राफ निरंतर बढ़ता जा रहा है और राजे भी फेसबुक की दुनिया में उनसे कही पीछे नहीं रह रही है. हाईटेक हुए चुनाव से पहले के इस हाईटेक प्रचार पर आम जनता की तो नजर है ही, विदेशों से भी कई राजनीयिक राजस्थान का दौरा कर गहलोत व राजे की स्थिति का आंकलन कर चुके और उनकी नजर इस पर लगी है कि दोनों में से किसका पलड़ा भारी है और अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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