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भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया का मोस्ट वांटेड आतंकवादी है दाऊद इब्राहीम..!

By   /  July 24, 2013  /  2 Comments

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आईपीएल क्रिकेट में स्पॉट फिक्सिंग से एक बार फिर चर्चा में आये अंडरवर्ल्ड के सबसे बड़े डॉन दाऊद इब्राहीम का नाम भारत के गृहमंत्रालय द्वारा पाकिस्तान को सौंपी जाने वाली मोस्ट वांटेड अपराधियों की नई सूची में तो सबसे ऊपर रखा गया है लेकिन फोर्ब्स मैग्जीन ने भी  2011 में उसे दुनिया के दस मोस्ट वान्टेड की लिस्ट में चौथे नंबर पर रखा था. मुम्बई पुलिस के एक हैड कास्टेबल की संतान दाऊद इब्राहीम बचपन में ही गुनाहों के दलदल में धंस गया था.

भिंडीबाज़ार..यहीं पर मुंबई अंडरवर्ल्ड के बीच कभी छिड़ी थी खूनी गैंगवार. मुंबई का ये पूरा इलाका गवाह रहा है मौत के उस सबसे खतरनाक खेल का क्योंकि यहां की सड़कों ने अपने कानों से सुनी है अंडरवर्ल्ड के खतरनाक शूटरों की गोलियों की भयानक आवाज.dawood ibrahim1

यहां की गलियों ने देखा है मौत का वो खूनी मंजर जिसे देखकर एक आम इंसान की रूह तक कांप जाए और यही वो पूरा इलाका भी है जहां खेलते-कूदते जवान हुआ मुंबई अंडरवर्ल्ड का सबसे बडा डॉन दाऊद इब्राहीम.

चाल मुसाफिर खाना की दूसरी मंजिल पर डान अपने परिवार के साथ रहता था.

कभी स्मग्लरों की जन्नत रही है ये मुंबई. हाजी मस्तान और करीम लाला से लेकर वरदराजन मुदलियार, छोटा राजन और अरुण गवली तक ना जाने कितने नाम है जो मुंबई में समंदर के इस किनारे को अपने काले धंधों के लिए इस्तेमाल करते रहे और करीब बत्तीस साल पहले इन्ही नामों के बीच से उभरा एक और नाम दाउद इब्राहीम.

मुंबई अंडरवर्ल्ड का डॉन बनने से पहले दाउद इब्राहीम का बचपन टेमकर स्ट्रीट की चाल में बीता, जहां वो अपने पिता शेख इब्राहीम औऱ अपने छह भाई बहनों के साथ रहता था दाउद के पिता मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच में हेड कांस्टेबल थे बावजूद इसके दाउद का जहन कम उम्र से ही गुनाह की अंधेरी गलियों में भटकने लगा.

सत्तर के दशक में जब मुंबई अंडरवर्ल्ड पर हाजी मस्तान और करीम लाला जैसे स्मग्लरों का सिक्का चलता था, तब जवानी की दहलीज पर खडे दाउद इब्राहीम ने करीम लाला का साथ पकड़ लिया और फिर स्मगलिंग, वसूली के काले धंधे में कूद पड़ा.

दाउद अंडरवर्ल्ड की दुनिया में तेजी से तरक्की की सीढिया चढता चला गया. अगले दस सालों में ही उसने अपनी खुद अलग डी कंपनी बना ली और इसी के बाद शुरु हुआ दाउद की डी कंपनी और मुंबई की पठान गैंग के बीच खूनी गैंगवार.

करीब सत्ताईस साल पहले 1981 से 1985 के बीच मुंबई के इसी नागपाडा पुलिस स्टेशन के लिए दाऊद एक जाना पहचाना नाम बन चुका था. क्योंकि यही वो वक्त था जब मुंबई अंडरवर्ल्ड में पठान गैंग को कुचलकर दाउद बन चुका था डॉन.

इस दौरान दाउद मर्डर के केस में दो बार पुलिस की गिरफ्त में भी आया लेकिन मई 1984 में जब पीरजादा नवाबखान के मर्डर केस में उसे अंतरिम जमानत मिली तो वो फरार हो गया.

देश में डॉन दाऊद इब्राहीम की आखिरी बार गिरफ्तारी भी कम दिलचस्प नहीं है. अस्सी के दशक में ही जब मुंबई पुलिस को समद खान और रहीम खान मर्डर केस में दाउद की तलाश थी तब दाऊद देश छोडकर भागने की फिराक में था.

दरअसल 1985 के आसपास मुंबई गैंगवार के चलते जब दाउद इब्राहीम पर कानून का शिकंजा कसा तो वो घबराकर दुबई भाग निकला और दुबई में बैठकर रिमोट कंट्रोल से चलाने लगा मुंबई अंडरवर्ल्ड में स्मगलिंग, वसूली, हवाला और कान्ट्रेक्ट किलिंग का अपना काला कारोबार.

डॉन का काला धंधा दुबई में भी चमक रहा था लेकिन तभी आया वो काला शुक्रवार जिसने डॉन दाऊद इब्राहीम को एक आतंकवादी में तब्दील कर दिया. 12 मार्च 1993 को जब मुंबई सीरियल बम धमाको से दहली तो इसकी साजिश के पीछे से निकला डॉन दाउद इब्राहीम का चेहरा और उसके बाद दाऊद भारत ही नहीं बल्कि दुनिया की नजरों में भी बन गया है मोस्ट वॉन्टेड आतंकवादी.

मुंबई में 1993 के सीरियल बम धमाकों को बीस साल गुजर गए लेकिन आज भी आजाद धूम रहा है डॉन. पाकिस्तान के कराची में डॉन का ठिकाना है. दाऊद पाकिस्तान में शानों शौकत की जिंदगी जीता है, वो आंतकी अलकायदा से लेकर तालिबान तक आतंकवादियों को फायनेंस करता है क्योंकि मुंबई अंडरवर्ल्ड का ये डॉन आज पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का बन गया है गुलाम.

कराची में बैठा दाउद नशीले पदार्थ, जाली करेंसी, आर्मस स्मगलिंग और इस तरह के तमाम आर्गेनाइज्ड क्राइम का कारोबार आज भी कर रहा है. मोस्ट वान्टेंड दाऊद के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कार्नर नोटिस जारी कर रखा है.

फोर्ब्स मैग्जीन ने 2011 में उसे दुनिया के दस मोस्ट वान्टेड की लिस्ट में चौथे नंबर पर रखा है लेकिन दाऊद आज भी पकडा नहीं जा सका है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. बे शक, वाह दुनिया का मोस्ट वांटेड भी होगा, पर उसे पकड़ने के लिए किस देश की सरकार ने ईमानदारी से क्या प्रयास किये?सबसे ज्यादा नुकसान उसने भारत को पहुँचाया पर पर भारत सरकार ने पाकिस्तान के आगे उसे सोंपने के लिए गिदगिदाने के अलावा क्या ठोस प्रयास किया? इस में भी कई लिंक ऐसे हैं, जो सत्तानीशों के कारनामों की परते खोलती हैं.इसलिए किसी भी दल की सरकार ने ठोस प्रयास नहीं किये.

  2. mahendra gupta says:

    बे शक, वाह दुनिया का मोस्ट वांटेड भी होगा, पर उसे पकड़ने के लिए किस देश की सरकार ने ईमानदारी से क्या प्रयास किये?सबसे ज्यादा नुकसान उसने भारत को पहुँचाया पर पर भारत सरकार ने पाकिस्तान के आगे उसे सोंपने के लिए गिदगिदाने के अलावा क्या ठोस प्रयास किया? इस में भी कई लिंक ऐसे हैं, जो सत्तानीशों के कारनामों की परते खोलती हैं.इसलिए किसी भी दल की सरकार ने ठोस प्रयास नहीं किये.

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