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बड़े गोलमाल में ईटीवी-यूपी से लतियाये गये प्रणब लाल..

By   /  July 27, 2013  /  No Comments

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बड़े गोलमाल में ईटीवी-यूपी से लतियाये गये प्रणब लाल..चोरी, उगाही और रंगदारी में पकड़ा गया इस मैनेजर को…ईटीवी दफ्तर में सन्नाटा, पुलिस भी हस्तक्षेप कर सकती है…

कुमार सौवीर||

लखनऊ : बिलकुल ताजा-ताजा खबर है कि ईटीवी-यूपी का एक बड़ा अफसर चोरी में पकड़ा गया है। और चोरी ही नहीं, इस पर तो यह तक आरोप हैं कि उसने अपने अधीनस्थों से भारी घूस उगाही है। यह रकम लाखों से ऊपर बतायी जाती है।etv news

फिलहाल, नया डेवलपमेंट यह है कि इस बड़े  अफसर को दफ्तर से निकाल बाहर कर दिया गया है। जल्दी ही कुछ अन्या लोगों की भी विदाई पूरी बेइज्जती के साथ हो सकती है। अंदरखाने की खबरों को अगर सच माना जाए तो हो सकता है कि इस प्रकरण की पूरी जांच के बाद इस अधिकारी को पुलिस के हवाले कर दिया जाए। उल्‍लेखनीय है कि प्रणब लाला इससे पहले ईटीवी-बिहार में भी तैनात रहे हैं।

आपको बता दें कि ईटीवी के सारे वेंचर्स में यह पहली बार हुआ है कि किसी बड़े कर्मचारी को कभी रंगेहाथों दबोचा गया। तुर्रा यह है कि यह घटना के एक बड़े अफसर को लेकर है। जाहिर है कि यूपी ईटीवी के पूरे अमले में इस घटना से सन्नाहटा फैल गया है। वैसे इस मामले में किसी आला किस्म  के बड़े अफसर ने अभी तक कोई भी टिप्पणी नहीं की है।

रामूजी राव के हाथों पैदा हुए ईटीवी ने न्यूज चैनलों की दुनिया में शुरू से ही अपनी एक जोरदार छाप लगायी है। लेकिन रामूजी के बाद से अब इस साख को विध्वंस वाला धक्का लग चुका है। सबसे बड़ा कलंक तो तब लगा जब ईटीवी-यूपी के प्रशासनिक और विज्ञापन के प्रभारी प्रबंधक प्रणब लाला को खुलेआम चोरी और उगाही में पकड़ा गया।

शुरूआती जांच में ही पता चल गया कि प्रणब लाला ने पिछले सात बरसों के बीच सैकड़ों लाखों का चूना ईटीवी को लगाया। जांच अभी चल रही है। विश्वास्त सूत्रों के मुताबिक प्रणब लाला अपने चेला-चपाटियों को मिलाकर विज्ञापन के पैसों को लेकर गोलमाल किया। बड़े पैमाने पर तो ऐसा भी हुआ कि विज्ञापन तो प्रसारित हो गया लेकिन उसके आरओ जारी ही नहीं हो सका था। अचानक यह चोरी-डकैती पकड़ ली गयी और प्रणब लाला को सरेआम बेइज्जतत कर दफ्तर से बाहर कर दिया गया।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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