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दुर्गा शक्ति ने मस्ज़िद निर्माण में बाधा डाली थी: अखिलेश यादव

By   /  July 29, 2013  /  6 Comments

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आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन पर अखिलेश यादव ने सफाई दी है कि दुर्गा शक्ति ने ग्रेटर नोएडा में मस्ज़िद बनने से रोक दिया था, जिसके चलते प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव फ़ैल सकता था. शनिवार को नागपाल ने ग्रेटर नोएडा में अवैध रूप से सरकारी जमीन पर बनाई जा रही मस्जिद को तोड़ने का आदेश दिया था. उत्तर प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार का कहना है कि नागपाल ने रमजान के पवित्र महीने में समस्या खड़ी करने वाला फरमान जारी किया था. अखिलेश यादव ने कहा कि सांप्रदायिक तनाव से बचने के लिए हमें यह फैसला लेना पड़ा.durga-shakti

अखिलेश यादव सरकार के इस तर्क को लोग बहाने के रूप में देख रहे हैं. लोगों का मानना है कि दुर्गा शक्ति नागपाल जिस तरीके से काम कर रही थीं उसका नतीजा अखिलेश सरकार में यही होना था. नागपाल रेत खनन माफियाओं पर लगातार शिकंजा कसती जा रही थीं. ऐसे में अखिलेश सरकार पर खनन माफियाओं का भारी दबाव था कि नागपाल को हटाया जाए.

गौरतलब है कि नागपाल 2009 बैच की आईएएस ऑफिसर हैं. कुछ हफ्तों से ग्रेटर नोएडा में अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए नागपाल युद्धस्तर पर काम कर रही थीं. इन्होंने यमुना नदी से रेत से भरी 300 ट्रॉलियां को अपने कब्जे में किया था. नागपाल ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यमुना और हिंडन नदियों में खनन माफियाओं पर नजर रखने के लिए विशेष उड़न दस्तों का गठन किया था. नागपाल ने सस्पेंड होने से पहले ही कहा कि था इन माफियाओं पर कार्रवाई की वजह से धमकियां मिलती हैं.

नागपाल पर सरकार के फैसले के बाद विपक्ष हमलावर तेवर में आ गया. विपक्ष ने एक स्वर में कहा कि अखिलेश सरकार को माफिया चला रहे हैं, इसलिए ईमानदार आईएएस को सजा दी गई. बीजेपी से सीनियर नेता कलराज मिश्रा ने कहा कि अब यह साबित हो गया है कि सरकार उन ऑफिसरों को बर्दाश्त नहीं करेगी जो माफियाओं के खिलाफ हैं. आखिर दुर्गा शक्ति नागपाल की गलती क्या थी कि सस्पेंड कर दिया गया? अखिलेश सरकार के इस फैसले की चौतरफा आलोचना हो रही है. पहले से ही उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर चिंताएं कायम हैं.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

6 Comments

  1. Ashok Gupta says:

    Chief minister ya CHEEP MINISTER LAGATA HAI YE CHEEP MINISTER HAI ISLEYE CHEEP HARKAT KAR REHE HI

  2. mahendra gupta says:

    तथाकथित स्वय्म्शम्भु धरम निरपेक्ष तथा माफिया सरकार से इसके अलावा ज्यादा उम्मीद करना खुद की नासमझी व उनके साथ अन्याय ही होगा.अभी हज़ार रंग देखने को मिलेंगे.सरकारी ज़मीं पर मंदिर मस्जिद बनाना इस अर्थ में अपराध नहीं.गैर कानूनी कार्य कर साम्रदायिक तनाव फ़ैलाने वालों से सरकार डरती है,और कानूनी प्रक्रिया से चलने वाले अफसरों पर अन्याय करती है,ऐसे मुर्ख नेता केंद्र में और सरकार बना बाकी देश का भी बंटाधार करेंगे .

  3. तथाकथित स्वय्म्शम्भु धरम निरपेक्ष तथा माफिया सरकार से इसके अलावा ज्यादा उम्मीद करना खुद की नासमझी व उनके साथ अन्याय ही होगा.अभी हज़ार रंग देखने को मिलेंगे.सरकारी ज़मीं पर मंदिर मस्जिद बनाना इस अर्थ में अपराध नहीं.गैर कानूनी कार्य कर साम्रदायिक तनाव फ़ैलाने वालों से सरकार डरती है,और कानूनी प्रक्रिया से चलने वाले अफसरों पर अन्याय करती है,ऐसे मुर्ख नेता केंद्र में और सरकार बना बाकी देश का भी बंटाधार करेंगे.

  4. ab janta jug gayee hai koi bhi bhrast mantry bachega nahi akhilesh singh ka comments sunkar hi lag raha tha ki wo kitane ghabraye huye the.

  5. ये नेता लोग देश को बहुत तेजी से जातीय गृहयुद्ध की तरफ ले जा रहे है… वोट बैंक बनाने के चक्कर में ये हर चीज को सांप्रदायिक और जातीय रंग देने पर तुले हैं..

  6. aisi mansha Sirf akhilesh sarkar ki hi nahi sare hindustan me sabhi party me hai….. gundo, bharasto ke dwara hi jyadatar sarkar chal rahi hai. sima par china, pak ghuspaith karta hai lekin sarkar ke dwata kya kadam uthaye ja rahe hai. kabhi kahbi to apna bharatwasi hone par sharma aati hai ki ham 10 salo se bharast sarkar ko satta ka sukh bhogne de rahe hai.

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