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छद्मनामी लेखन का तिलिस्म

By   /  July 29, 2013  /  No Comments

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-अनन्त विजय||

अंग्रेजी साहित्य में इन दिनों एक दिलचस्प वाकए पर जमकर चर्चा हो रही है, चुटकी ली जा रही है, क्षोभ प्रकट किया जा रहा है, आश्चर्य जताया जा रहा है । वाकया जुड़ा है एक खुलासे से । खुलासा भी जुड़ा है अंग्रेजी की बेहद लोकप्रिय लेखिकाओं में से एक से । उसका नाम है जे के रॉलिंग । जे के रॉलिंग ब्रिटिश उपन्यासकार हैं और उनके हैरी पॉटर सीरीज ने दुनिया भर में धूम मचाई हुई है । हैरी पॉटर सीरीज के नए उपन्यास के उपन्यास का पाठक बेसब्री से इंतजार करते हैं और उसकी महीनों पहले से एडवांस बुकिंग भी होती है ।J-K-Rowling

एक अनुमान के मुताबिक अबतक दुनियाभर में हैरी पॉटर सीरीज की चालीस करोड़ किताबें बिक चुकी हैं । इस सीरीज को विश्व साहित्य के इतिहास में अबतक का बेस्ट सेलर माना जाता है । 1997 में इस सीरीज का पहला उपन्यास आया था –हैरी पॉटर एंड द फिलॉसफर्स स्टोन । सोलह साल से रॉलिंग साहित्य की दुनिया में अपना राज कायम रखे हुए है । लेकिन इन दिनों रॉलिंग गुस्से में है । हुआ यह था कि जे के रॉलिंग ने रॉबर्ट गॉलब्रेथ के नाम से एक क्राइम थ्रिलर – द कुक्कूज कॉलिंग लिखा । इस उपन्यास ने छपते ही धूम मचा दिया और प्रकाशन के पहले ही दिन लंदन के एक दुकान से इस उपन्यास की पंद्रह सौ हॉर्ड बाउंड प्रतियां बिक गई । माना यह गया कि इस क्राइम थ्रिलर का लेखक सेना या फिर नागरिक सुरक्षा से जुड़ा कोई ऐसा शख्स है जो अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहता है । आलोचकों ने इस क्राइम थ्रिलर को हाथों हाथ लिया और लेखक के तौर पर रॉबर्ट गॉलब्रेथ की खूब सराहना की गई । कहा तो यहां तक गया कि रॉबर्ट गॉलब्रेथ ने थ्रिलर लेखन की दुनिया में एक नई शैली की शुरुआत की है । लेकिन यह सब चल ही रहा था कि एक दिन एक अख़बार ने खुलासा कर दिया कि रॉबर्ट गॉलब्रेथ दरअसल कोई और नहीं बल्कि जे के रॉलिंग हैं । उसके बाद तो साहित्य की दुनिया में भूचाल आ गया । छद्म नाम से लेखन को लेकर कई लेख छपने लगे । कुछ लोगों ने जे के रॉलिंग पर छद्म नाम से लेखन कर पैसे कमाने का आरोप भी जड़ा ।

आलोचना बढ़ती देख जे के रॉलिंग ने स्वीकार किया कि उन्होंने ही रॉबर्ट गॉलब्रेथ के नाम से यह उपन्यास लिखा था । रॉलिंग ने यह भी स्वीकार किया कि बगैर किसी अपेक्षा और शोर शराबे के बीच उपन्यास लिखना और फिर उसकी तारीफ सुनना एक अलग तरह का अनुभव था । अबतक होता यह रहा है कि जे के रॉलिंग के नए उपन्यास का आना अंग्रेजी साहित्य की दुनिया में खबर होती थी । रॉलिंग का कहना है कि इससे उनपर एक खास तरह का दबाव होता था जो छद्म नाम से लिखने पर नहीं था । रॉलिंग स्वीकार करती हैं कि जब उपन्यास को पाठकों के साथ-साथ आलोचकों ने स्वीकार किया तो उन्हें एक विशेष प्रकार की अनुभूति हुई थी और वो इसका आनंद उठा रही थी लेकिन तभी उसका खुलासा हो गया ।
जे के रॉलिंग का नाम खुलने के पीछे भी एक बेहद दिलचस्प कहानी है । जे के रॉलिंग जिस लीहल फर्म की क्लाइंट हैं उस फर्म के एक वकील ने यूं ही बातों बातों में अपनी पत्नी की दोस्त बता दिया कि क्राइम थ्रिलर द कुक्कूज कॉलिंग के लेखक रॉबर्ट गॉलब्रेथ असल में एक छद्म नाम है । उत्साह में वो यह भी कह गए कि रॉबर्ट गॉलब्रेथ के नाम से जे के रॉलिंग ने यह उपन्यास लिखा है । बात आई गई हो गई लेकिन उस मुलाकात के बाद वकील साहब की पत्नी की दोस्त वे ट्वीट कर दिया कि चर्चित उपन्यास द कुक्कूज कॉलिंग की असली लेखिका जे के रॉलिंग हैं । उस ट्वीट से क्लू लेते हुए एक अखबार ने यह खबर छाप दी । बाद में कानूनी फर्म ने यह स्वीकार किया कि उसके पार्टनर से यह गलती हुई है और उसके लिए उन्होंने जे के रॉलिंग से माफी भी मांग ली है । लेकिन रॉलिंग ने माना कि वो ठगी हुई महसूस कर रही हैं । उन्होंने इस बात पर भी आश्चर्य जताया कि एक ऐसी महिला ने उसके सबसे बड़े राज का फाश कर दिया जिसको वो जानती तक नहीं, मिलना तो दूर की बात है । एक ऐसे राज को खोल दिया जो उनके निकटतम मित्रों को भी नहीं पता था । खैर अंग्रेजी साहित्य की दुनिया में यह दिलचस्प प्रसंग चल रहा है । ऐसा नहीं है कि साहित्य की दुनिया में यह इकलौता वाकया हो । पहले भी हर भाषा में लेखक छद्म नाम से लेखन करते रहे हैं । छद्म नाम से लेखन के पीछे भी वही मानसिकता काम करती है जो कि फिल्मों में हीरो के एक ही तरीके के रोल निभाने को विवश कर देती है और वो टाइप्ड हो जाते हैं । लेखन की दुनिया में भी ऐसा ही होता है । प्रकाशक क्राइम फिक्शन लिखने वाले लेखक से रोमांटिक लेखन या फिर फैंटेसी लेखक से क्राइम फिक्शन की अपेक्षा नहीं करते हैं । अगर कोई लेखक इस तरह का जोखिम मोल लेना चाहते हैं तो प्रकाशक उसे हतोत्साहित करते हैं और यहीं से छद्म नाम से लिखने की शुरुआत होती है । अंग्रेजी में तो चार्ल्स डिकेंस से लेकर स्टेनली मार्टिन तक ने छद्म नाम से लेखन किया है । स्टेनली मार्टिन ने तो स्टेन ली के नाम से लंबे समय तक कॉमिक्स लिखा और स्पाइडरमैन जैसे चरित्र की रचना की ।

हिंदी साहित्य में भी छद्म नाम से लेखन की बेहद लंबी परंपरा रही है । अभी ज्यादा दिन नहीं बीते हैं जबकि हिंदी में कहानी लेखिका स्नोबा बार्नो की पहचान को लेकर खासा विवाद हुआ था । कई खोजी तो स्नोबा की तलाश में कुल्लू और मनाली की वादियों तक जा पहुंचे थे । स्नोबा बार्नो के नाम से जब पहली कहानी हंस में छपी तो उसने पाठकों का ध्यान अपनी ओर खींचा था । कहानी लोगों को पसंद आई तो कहानीकार पर चर्चा शुरु हुई । कहानीकार के बारे में पता लगाने की कोशिशें शुरू हुईं लेकिन हिंदी जगत में स्नोबा एक मिस्ट्री बनी रहीं । स्नोबा की कहानियों से ज्यादा उसके होने या ना होने पर चर्चा शुरू हो गई । कई लोगों ने कहा कि सैन्नी अशेष स्नोबा के नाम से लिखते हैं लेकिन वह भी सिर्फ कायसबाजी ही साबित हुई । अब भी स्नोबा की कहानियां छप रही हैं लेकिन स्नोबा को किसी ने देखा नहीं है लिहाजा उसके बारे में तरह-तरह की कयासबाजी समय समय पर होती रहती है । 1957 में जब विष्णुचंद्र शर्मा ने -कवि -पत्रिका निकाली थी तो उसमें नामवर जी कविमित्र के छद्म नाम से एक विशेष कालखंड में लिखी गई कविताओं पर टिप्पणी करते थे । उस स्तंभ की काफी चर्चा होती थी । बहुत बाद में जाकर भेद खुला कि कविमित्र असल में नामवर सिंह हैं । मुझे लगता है कि छद्म नाम से लेखन के पीछे एक मानसिकता यह भी होती है कि अपने समकालीनों पर तल्ख टिप्पणी की जा सके और उनके गुस्से से बचा भी जा सके । हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका कल्पना में सच्चिदानंद हीरानंद वात्साययन अज्ञेय भी कुट्टीचातन के नाम से लेखन किया करते थे । आलोचना की पत्रिका कसौटी के अंकों में विवेक सिंह के नाम से उसके संपादक नंदकिशोर नवल आलोचनात्मक टिप्पणियां लिखा करते थे । बाद में उन्होंने खुद ही स्वीकार किया था कि विवेक सिंह के नाम से वही लिखा करते थे । इसके अलावा साहित्य की गतिविधियों पर भारत भारद्वाज भी ब्रह्मराक्षस के नाम से -दुनिया इन दिनों-नाम की पत्रिका में लोगों की खबर लिया करते थे । हिंदी के आलोचक और प्रतिष्ठित लेखक सुधीश पचौरी अब भी अजदक के छद्म नाम से मीडिया पर टिप्पणी करते हैं । हालांकि सालों पहले उनका नाम खुल चुका है लेकिन स्तंभ अजदक के नाम से ही जारी है । इतनी लंबी सूची गिनाने का उद्देश्य सिर्फ और सिर्फ यह है कि साहित्य में कई बार अपनी छवि के विपरीत लेखन के लिए तो कई बार साथी लेखकों के कोप से बचने के लिए तो कई बार लेखन की वस्तुनिष्ठता को बचाए रखने के लिए छद्मनाम से लेखन का सहारा लिया जाता है । साहित्य की परंपरा को ही जे के रॉलिंग ने आगे बढ़ाने की कोशिश की थी और उनकी योजना रॉबर्ट गॉलब्रेथ के नाम से और कई उपन्यास लिखने की थी जो अब शायद ही परवान चढ़ सके । हलांकि इस खुलासे के बाद द कुक्कूज कॉलिंग की बिक्री और बढ़ गई है क्योंकि उसेक साथ जे के रॉलिंग का नाम जुड़ गया है । अब देखना दिलचस्प होगा कि फैंटेसी लेखिका रॉलिंग को पाठक ज्यादा पसंद करते हैं क्राइम थ्रिलर लेखिका को पाठकों का प्यार मिलता है । क्योंकि क्राइम थ्रिलर में रॉलिंग का मुकाबला जेम्स पैटरसन जैसे मशहूर अमेरिकी लेखक से होगा । आलोचकों के सामने भी रॉलिंग को उसके नए अवतार में परखने की चुनौती होगी । जो भी हो लेकिन विमर्शकारों के सामने आनेवाले दिनों में रॉलिंग और चुनौतियां पेश कर सकती हैं ।

(यह लेख अनन्त विजय के ब्लॉग हाहाकार पर प्रकाशित हो चुका है) 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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