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चौधरी वीरेन्द्रसिंह बताएं, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री कितने सौ करोड में बने..?

By   /  July 29, 2013  /  3 Comments

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मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्री, प्रदेश अध्यक्ष कितने सौ करोड में बनते हैं चौधरी साहब?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पूर्व महासचिव चौधरी वीरेन्द्रसिंह ने कल रहस्योद्घाटन करके अपनी पार्टी कांग्रेस को ही कटघरे में खडा कर दिया है कि कि राज्यसभा सांसद बनने के लिए 100 करोड़ रूपये तक लोग खर्च करते हैं. उनके अनुसार आज के दिन जनसेवा व प्रतिभा के दम पर नहीं अपितु थेली के बल पर ही यहां राज्यसभा सांसद बनते है. उन्होंने दावा किया कि वे ऐसे एक ही नहीं अपितु 20 सांसदों को जानता हूँ जिन्होंने धन बल के बल पर राज्यसभा की सीट अर्जित की.chaudhari virender singh

आज पूरा उत्तराखण्ड ही नहीं पूरा देश यह भी सर छोटू राम के वंशज चौधरी वीरेन्द्रसिंह से इस रहस्य को भी जानना चाहते हैं कि उनके प्रभारी रहते हुए उत्तराखण्ड के विधायकों व जनता दोनों की भावनाओं को रौंदते हुए क्या मुख्यमंत्री भी इसी प्रकार की थैली सौंपने से बनाये गये? अगर बनाये गये तो कितने सौ करोड़ में. जब एक सांसद बनने के लिए सौ करोड़ तक का रेट चौधरी वीरेन्द्रसिंह खुद बता रहे हैं तो एक प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने की कीमत को सैकडों या हजारों करोड़ की होगी? उनको न केवल उत्तराखण्ड की अपितु हरियाणा व महाराष्ट्र सहित कई प्रदेशों के मुख्यमंत्री बनने की कीमत की भी जानकारी अवश्य होगी. होगी क्यों नहीं वे आखिर कांग्रेस में कई मुख्यमंत्री बनाने में निर्णायक रणनीतिकारों में से थे. इसके साथ चौधरी साहब यह भी देश की जनता को बताने की कृपा करेंगे कि केन्द्रीय मंत्री व प्रदेश सरकार के मंत्री या प्रदेश अध्यक्ष बनने में कितने की थेली चढायी जाती है. सवाल यही है कि जब राज्य सभा सांसद बनने के लिए कीमत चुकानी पडती है तो ये राजनीति के व्यापारी क्यों मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष, केन्द्रीय मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद मुफत में किसी को यो ही खैरात में क्यों देगे.

चौधरी वीरेन्द्रसिंह के आरोपों में उसी प्रकार की सच्चाई हो सकती है जिस प्रकार की सच्चाई कांग्रेसी दिग्गज नेत्री मार्गेट अल्वा ने कांग्रेस में टिकट बेचने का आरोप लगाने में थी. उसके बाद टिकटों की खरीद फ़रोख्त में शायद ही कोई कमी आयी होगी परन्तु अल्वा को कांग्रेस के दिग्गज नेत्री के पद से हटा दिया गया. उसके बाद उनको मनोगुहार लगाने के बाद दया करके कांग्रेस नेतृत्व ने राज्यपाल जैसे पद पर नवाजा. परन्तु इस प्रकरण के कई साल बाद भी मार्गेट अल्वा अभी तक कांग्रेस की मुख्यधारा में वापसी नहीं कर पायी.

यही हाल अब लगता है कि हरियाणा के दिग्गज नेता व मुख्यमंत्री के एक प्रमुख दावेदार रहे चौधरी वीरेन्द्र सिंह का हो गया है. उनकी बात को लोग केवल उनको केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में व कांग्रेस की कार्यकारिणी में सम्मलित न किये जाने की खीज के रूप में ही देख रहे हैं. हालांकि वे हरियाणा के मुख्यमंत्री बनने की लालसा आज भी अपने दिलो दिमाग से चाह करके भी दूर नहीं कर पा रहे है. इसी को हासिल करने की प्रगाढ़ इच्छा को देखते हुए हरियाणा के वर्तमान मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा (जो खुद भी इस कुर्सी पर जमें रहने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकते हैं) ने उनको हरियाणा से दूर रखा. अब जब कांग्रेसी नेतृत्व ने उनको बेताज कर दिया, उत्तराखण्ड, हिमाचल व दिल्ली के प्रभार से भी मुक्त करने के साथ साथ केन्द्रीय महासचिव पद से भी हटा दिया . एक आशा जगी थी उनके दिल में कि उनको केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में केन्द्रीय मंत्री बनाया जाने का वह भी नहीं बनाया गया. अब वे भी बेरोजगार हो गये हैं. इसी गुस्से में या कुछ नया खेल खेलने की रणनीति के तहत उन्होंने राज्यसभा सांसद बनने के रेट का रहस्योदघाटन किया. हो सकता हो कि उनको इस बात का भान हो गया हो कि हुड्डा के आगे कांग्रेस में उनकी दाल अब नहीं गलने वाली. आगामी लोकसभा चुनाव से पहले हो सकता है वे कुछ राजनैतिक गुल खिलाने या राजीव गांधी के करीबी मित्र होने का कुछ लाभ उठाने के लिए यह दाव चल रहे हो. हालांकि उनके कार्यकाल में कितने कीर्तिमान बने इसकी लम्बी सूचि उनकी कृपा पात्रों ने कांग्रेस नेतृत्व को सौंप दिया था, इन्हीं महान कार्यो के देख कर शायद कांग्रेस नेतृत्व ने उनको इस उम्र में ज्यादा काम न दे कर विश्राम करने का निर्णय लिया. अब देखना है राजनीति जगत में उठापटक की राजनीति के लिए विख्यात रहे हरियाणा में चौधरी वीरेन्द्रसिंह आगामी लोकसभा चुनाव में किस नाव पर सवार हो कर चुनावी भंवर को पार लगने का दाव खेलते है. परन्तु उनके बयानों से साफ हो गया कि वे समझ चुके हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सवारी करना बुद्धिमता का काम नहीं है.

(सौजन्य: प्यारा उत्तराखंड {फेसबुक पेज})

प्यारा उत्तराखण्ड

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

3 Comments

  1. Ashok Gupta says:

    ghar ka bhedi lanka dhaye choudhary ko RAIL MANTRI nahi banaya hum too khata kidayege

  2. कांग्रेस के नेता का बयान देश के राजनीतिज्ञों व दलों के चरित्र को उजागर करता है.हंसी और आश्चर्य भी होता है कि कुछ दिन पहले मुंडे के आठ करोड़ चुनाव खर्च के बयान पर सब कांग्रेसी नेता दिग्गी,तिवारी,शकील अहमद मीडिया में आ कर जांच की मांग कर रहे थे,और चुनाव आयोग ने आज्ञाकारी पुत्र की तरह श्री मुंडे को नोटिस भी थम दिया, पर आज किसी को भी न तो ऐतराज हुआ न पुत्र को जांच की याद आएगी.इस हरित्र भी.देश में दो पैमाने हर स्तर पर किये जाते हैं.कांग्रेस का दोहरा चरित्र तो खेर जग जाना है ही.

  3. mahendra gupta says:

    कांग्रेस के नेता का बयान देश के राजनीतिज्ञों व दलों के चरित्र को उजागर करता है.हंसी और आश्चर्य भी होता है कि कुछ दिन पहले मुंडे के आठ करोड़ चुनाव खर्च के बयान पर सब कांग्रेसी नेता दिग्गी,तिवारी,शकील अहमद मीडिया में आ कर जांच की मांग कर रहे थे,और चुनाव आयोग ने आज्ञाकारी पुत्र की तरह श्री मुंडे को नोटिस भी थम दिया, पर आज किसी को भी न तो ऐतराज हुआ न पुत्र को जांच की याद आएगी.इस हरित्र भी.देश में दो पैमाने हर स्तर पर किये जाते हैं.कांग्रेस का दोहरा चरित्र तो खेर जग जाना है ही.

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