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वापस खुलेगी धर्म गुरु गाजी फ़क़ीर की हिस्ट्रीशीट..!

By   /  July 30, 2013  /  No Comments

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-चन्दन सिंह भाटी||

जैसलमेर गाजी फकीर की 48 साल पुरानी हिस्ट्रीशीट एक बार फिर सीमावर्ती जैसलमेर-बाड़मेर जिले की चर्चा में है. जैसलमेर जिला प्रमुख अब्दुला फकीर और पोकरण विधायक सालेह मोहम्मद के पिता गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट दो साल पहले पुलिस अधीक्षक की गैरमौजूदगी में गुपचुप तरीके से बंद कर दी गई थी. अब सीआईडी सीबी के एडीजी कपिल गर्ग के नए आदेशों से यह हिस्ट्रीशीट दुबारा सामने आई है. गर्ग के आदेश में साफ कहा गया है कि हिस्ट्रीशीट बंद करना गलत है. इसलिए जैसलमेर एसपी पिछले कुछ सालों में बंद हुई सभी हिस्ट्रीशीटों की जांच करवा रहे हैं. इनमें गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट भी शामिल है. एसपी का कहना है कि जांच के बाद बंद हुई हिस्ट्रीशीट दुबारा खोली जाएगी अथवा व्यक्तिगत पत्रावलियां बना कर निगरानी रखी जाएगी. Copy of Jpr112125807-large
कौन हें गाजी फ़क़ीर 

सरहदी जिलों बाड़मेर जैसलमेर के सिन्धी मुस्लिमो के धर्म गुरु के रूप में ख्याति प्राप्त गाजी फ़क़ीर सरहदी जिलो की राजनीति के पुरोधा हें. इस पूरे रेगिस्तानी सीमा क्षेत्र की राजनीति उनके रहमो करम पर चलती हें खासकर कांग्रेस की राजनीती का गाजी फ़क़ीर परिवार के बिना कोई.  एक तरह से कांग्रेस का रहनुमा हें गाजी फ़क़ीर. जैसलमेर से बीस किलोमीटर दूर भागु का गाँव गाजी फ़क़ीर की राजधानी हें. उन्हें पाकिस्तान के पीर जो गाथ के  प्राप्त हें. गाजी  पदवी दे राखी हें. सिन्धी मुसलमान उनके आदेश के बगैर कदम नहीं भरते ,गाजी फ़क़ीर क्षेत्र की राजनीती में   पुत्र  पोकरण से  दूसरा जैसलमेर जिला  प्रमुख हें उनके परिवार से आधा दर्जन लोग जिला परिषद् और पंचायत समितियों के सदस्य भी हें. कांग्रेस की राजनीती और रणनीति गाजी फ़क़ीर से शरू होकर उन पर ही ख़त्म होती हें. यह पहला मौका हें जब गाजी फ़क़ीर की हिस्त्रिशीत की सार्वजानिक चर्चा हो रही हें वर्ना अब तक तो लोगों को  गाजी के हिस्ट्रीशीटर होने की जानकारी नहीं थी. अपने समय में गाजी का नाम तस्करी के प्रकरणों में शामिल था. गाजी फ़क़ीर चुनावो में सीमापार से किसी राजनितिक दल के समर्थन में चिठ्ठी आने का हमेशा दम भरते हें. उनके अनुयाई सीमा पर से समर्थन की चिठ्ठी आने के बाद गाजी के फतवे का इंतज़ार करते हें. गाजी के फतवे के अनुरूप किसी पार्टी के पक्ष में एक मुश्त मत डालते हें. गाजी फ़क़ीर पर अब उम्र का असर साफ़ दिखता हें. उनके उम्र के लिहाज़ से स्थानीय पुलिस के एक अधिकारी ने गाजी की हिस्ट्रीशीट बंद करवा दी थी. जब गाजी की हिस्ट्रीशीट बंद करने की बात उच्च अधिकारियो तक पहुंची हडकंप मच गया. कांग्रेस के खेवनहार होने के कारन गाजी की हिस्ट्रीशीट पुनः खोलने के निर्णय पर अब राजनितिक कयास लगाये जा रहे हें. आखिर किसके इशारे पर गाजी की हिस्ट्रीशीट वापस खुलवाई गई. राजनैतिक पार्टियों को गाजी की कमजोरी ध्यान में हें, इस कमजोरी का फायदा उठा कर परतिया उनका समर्थन हासिल करती थी.  जिले की राजनितिक उठापटक में गाजी फ़क़ीर परिवार की राजनीती को  गया. उनके  जैसलमेर में जमे अधिकारियो को एक एक करके चलता कर दिया. विधायक सालेह मोहम्मद ने इन अधिकारियो को वापस लगाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय तक पग पटक लिए मगर उन्हें सफलता नहीं मिली. हाल ही में नगर परिषद् के आयुक्त को सरकार ने बदल दिया. कुछ दिनों पहले ही विधायक की डिजायर पर उन्हें वापस जैसलमेर लगाया गया था. एक महीने के भीतर उसे बदल दिया. हालांकि जिला कलेक्टर उन्हें कार्यमुक्त करना नहीं चाह रहे  उच्च स्तरीय हस्तक्षेप के बाद उन्हें जाना पडा. ज़ैसल्मेर जिले में गाजी फ़क़ीर परिवार के दबदबे को ख़त्म करने की कवायद जैसलमेर के एक गुट ने शुरू की इस गुट को सफलता भी मिली ,गाजी की हिस्त्रीशीर वापस खोल उन पर दबाव बनाने की रणनीति को हवा मिल रही हें. गाजी की चौखट पर सलाम ठोकने छोटे से छोटा और बड़े से बड़ा नेता और अधिकारी. पहुंचता हें गत साल उनके परिवार में दो मौको पर पक्ष विपक्ष के  उपस्थित थे तो जिले का कोई अधिकारी हजारी देने से नहीं. चुका अलबता गाजी फ़क़ीर की हिस्ट्रीशीट वापस खोलने का निर्णय राजभर जरुर हें जिसकी परते धीरे धीरे खुलेगी. पांच लाख सिन्धी मुस्लिमो के रहनुमा के रूप में गाजी फ़क़ीर की आज भी तूती बोलती हें.

उम्र और आचरण को बनाया आधार

गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट बंद करने का आधार उनकी उम्र और आचरण को बनाया गया था. उनकी उम्र 70 वर्ष से ज्यादा हो चुकी है और काफी समय से किसी आपराधिक गतिविधियों में उनकी भूमिका सामने नहीं आई है.

जबकि बंद करने का अधिकार सिर्फ एसपी को 

एएसपी का कारनामा 

गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट 31 जुलाई 1965 को खोली गई थी. तब से गाजी का नाम कोतवाली थाने के हिस्ट्रीशीटरों में दर्ज था. जैसलमेर के पूर्व एसपी अंशुमान भोमिया का तबादला 31 माई 11 को हुआ और ममता विश्नोई ने 18 मई 11 को कार्यभार ग्रहण किया. इस बीच पचास दिन तक जैसलमेर में एसपी का पद खाली रहा. तब एएसपी गणपतलाल ने ममता विश्नोई के ज्वाइन करने से पांच दिन पहले 12 मई 11 को गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट बंद कर दी जबकि आरपीआर नियम कहता है कि हिस्ट्रीशीट का फैसला सिर्फ एसपी ही कर सकता है.

पाक में भी दबदबा: तस्कर सीकिया की पाक में जमानत कराई

कुख्यात तस्कर सीकिया को 1990 में बीएसएफ ने पकड़ा तब ज्वाइंट इंटेरोगेशन हुआ था. इंटेरोगेशन में सीकिया ने इकबालिया बयान में बताया था कि गाजी फकीर उसके धर्मगुरु हैं और उनका दबदबा पाकिस्तान के सिंध में भी है. सीकिया ने यह भी बताया कि जब वह पाकिस्तान में पकड़ा गया था तब गाजी फकीर ने ही उसकी जमानत करवाई थी.

व्यक्ति जिंदा, हिस्ट्रीशीट जिंदा, बंद करना गलत 

एडीजी के आदेश 
सीआईडी सीबी के एडीजी कपिल गर्ग ने जून 13 में एक आदेश निकाला है. इसमें कहा गया कि कई मामलों में अफसर राजस्थान पुलिस नियम 4.13(4)के तहत हिस्ट्रीशीट बंद कर देते है जो गलत है. …क्योंकि यह नियम व्यक्तिगत पंजिका के संबंध में लागू होता है. हिस्ट्रीशीट पर नियम 4.12 लागू होता है. इसके अनुसार हिस्ट्रीशीट मृत्युपरांत ही बंद की जा सकती है. यदि वह व्यक्ति आपराधिक गतिविधियों में नहीं हैं तो हिस्ट्रीशीट को व्यक्तिगत पंजिका में शामिल कर दें और व्यक्तिगत पंजिका भी मृत्युपरांत ही बंद की जा सकती है.

॥एडीजी के आदेशानुसार उन सभी हिस्ट्रीशीट पत्रावलियों को चैक कर रहे हैं और हिस्ट्रीशीट व व्यक्तिगत पंजिका खोलने की प्रक्रिया चल रही है. उनमें गाजी फकीर की हिस्ट्रीशीट भी शामिल है. गाजी फकीर की पिछले कुछ सालों की गतिविधियां चैक की जाएंगी. उनकी हिस्ट्रीशीट तत्कालीन एएसपी गणपतलाल ने बंद कर दी थी.

– पंकज कुमार चौधरी, एसपी, जैसलमेर. 

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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