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दो बड़ों की करतूत से पत्रकारिता की मर्यादाएं गटर में

By   /  August 2, 2013  /  No Comments

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पत्रकारिता के तराजू में तोली गयी एक-दूसरे की मां-बहन.. जौनपुर के कप्तान की प्रेस-कांफ्रेंस में लेत्तेरे-धत्तेरे की हुंकार…

-कुमार सौवीर||

जौनपुर : आज पुलिस अधीक्षक की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान दो कथित वरिष्ठ कहे जाने वाले पत्रकार आपस में ही भिड़ गए। शुरूआत हुई पुलिस के खिलाफ शिकायतनामा से, लेकिन जल्दी ही एक-दूसरे की मां-बहन को अनावश्यक तौर पर तोल डालने की कवायद शुरू कर दी गयी। एक-दूसरे ने एक-दूसरे का जान से मारने की धमकी दी और बाद में तो एक पत्रकार ने पुलिस लाइंस में ही दूसरे पत्रकार के खिलाफ गाढ़ा लगाने का ऐलान कर दिया। बोले:- इस आदर-फादर को तो आज ही निपट लूंगा।fighting

यह मामला हुआ यहां के पत्रकार अनिल पांडेय और नसीम फरीदी के बीच। मामला था डीआईजी के निरीक्षण के बाद पुलिस लाइंस में हुई प्रेस-ब्रीफिंग का। महिला एसपी हैप्पी गुप्त महिला सीओ सिटी अलका भटनागर के साथ ही साथ एएसपी श्रीपत और एएसपी सुरेश्वर भी मौजूद थे। इस बैठक के शुरूआत में ही मामला भड़क गया। अफसर जब कुछ नहीं कर पाये तो वहां मौजूद कुछ पत्रकारों ने हस्तक्षेप कर मामला जैसे-तैसे निपटा दिया।

दरअसल एक पत्रकार ने इस बात को लेकर बीच प्रेस कांफ्रेंस में ही बखेड़ा खड़ा कर दिया कि उस पर हुए हमले की शिकायत के बाद भी आजतक कोर्इ भी कार्रवार्इ क्यों नहीं हुर्इ। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले नसीम फरीदी पर एक अपराधी ने सरेआम हमला बोल दिया था, इसमें फरीदी को खासी चोटें आ गयी थीं। इस बारे में फरीदी ने एसपी को कई बार अर्जियां लगायीं और आज भी इसी प्रकरण को इस ब्रीफिंग को मुद्दा बनाने लगे। जब एसपी ने इस बात को दरकिनार करने की कोशिश की तो पत्रकार महोदय और भड़क गए और अपने पत्रकार साथियों को ही कोसने लगे।

उन्होंने तो यहां तक कह डाला कि जौनपुर के पत्रकार सिर्फ बिसिकट और चाय के लिए एसपी की प्रेस कांफ्रेंस में मुंह उठाए चले आते हैं। लेकिन उनका असल मकसद केवल एसपी से लेकर दारोगा तक की दलाली करना ही होता है। ये बात वहां बैठे एक दूसरे पत्रकार को गहरे तक चोट कर गर्इ। उन्होंने चिल्ला-चिल्लाकर बखेड़ा कर रहे पत्रकार को मारने-पीटने की धमकी देनी शुरू कर दी। लगातार बढ़ रही इस चिल्लाहट में पुलिस अधीक्षक, अपर पुलिस अधीक्षक और क्षेत्राधिकारी का सारा का सारा पुलिसिया हथकंडा फेल हो रहा था कि इस झगड़े को कैसे सुलझाएं। क्योंकि ये कोर्इ आम आदमी का झगड़ा नहीं बल्कि दो पत्रकारों के बीच का झगड़ा था।

पूरा मामला आदर-फादर-मादर-सिस्टर तक पहुंच चुका था और सब मौन धारण किए इस झगड़े के खत्म होने का इंतजार करने लगे। आखिरकार इलेक्ट्रानिक मीडिया के कुछ पत्रकारों ने दोनो वरिष्ठों को हाथ पैर जोड़कर और पत्रकारिता की इज्जत की दुहार्इ देकर मामला शांत कराया।

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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