/हिमाचल में पिछली भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री और क्रिकेट संघ पर शिकंजा कसा

हिमाचल में पिछली भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री और क्रिकेट संघ पर शिकंजा कसा

-अरविन्द शर्मा||

हिमाचल में पिछली भाजपा सरकार में पॉवर में रहे नेताओं के अब बुरे दिन आने वाले है. अरसे से कांग्रेस के आँखों की किरकरी बना हिमाचल क्रिकेट संघ आखिरकार क़ानून के दायरे में फंसता नज़र आने लगा है. धर्मशाला में क्रिकेट खिलाडियों के लिए बनाये गए पांच सितारा होटल द पेवेलियन की भूमि की किस्म बदलने को लेकर सरकार एचपीसीए पर शिकंजा कसती जा रही है. इस भूमि के इस्तेमाल की गलत इजाज़त देने को लेकर दो आईएस अधिकारियों को पहले ही चार्जशीट किया जा चुका है.anurag thakur

मामला एफ़ आई आर तक जा पहुंचा है. मामले संगीनता देख सरकार ने भी हंटर उठा लिया है. अंततः हिमाचल के मज़बूत दिख रहे क्रिकेट साम्राज्य पर विजिलेंस ने कदम बढ़ाने शुरू कर दिए है.  धर्मशाला स्थित होटल दि पैवेलियन के खिलाफ जांच के दायरे में जो खामियां नजर आईं, उसके परिप्रेक्ष्य में सरकार अब आरोपों से आगे की कार्यवाही में जुट गयी है. यह कहना मुश्किल है कि द पैवेलियन की कितनी परतें सामने आएंगी, लेकिन इस मुद्दे को आंच पर रखने में कांग्रेस की सत्ता ने पहल जरूर कर दी. कायदे से दि पैवेलियन की आवश्यकता को क्रिकेट जगत समझ सकता है. परन्तु इसके वजूद को किस तरह अमलीजामा पहनाया गया, ये बात संदेह के घेरे में है, हालांकि उस समय प्रदेश की बाग़डोर अनुराग के पिता के हाथ थी फिर भी कागज़ी कार्यवाही में कसर रही तो मामला खुद में ही संगीन लगता है.

दरअसल जब अनुराग ठाकुर ने हिमाचल की क्रिकेट पिच पर कदम रखे, तो वह दिल से पूरी तरह खेल को समर्पित थे, लेकिन बाद में उन्होंने हमीरपुर में कांग्रेस की पिच रौंद कर सियासत के समीकरणों से खेलना शुरू कर दिया. बीच की सच्चाई के लिए  ईमानदारी से खंगाल कर ही निष्कर्ष निकलेंगे. अब यह एक सामान्य लीज से वीआईपी लीज का मामला हो गया, तो पिछली सरकार की दरियादिली को नापा जाना भी जरूरी हो गया है.

anurag thakur and kapil devयह मामला एक पंचायत के अनापत्ति प्रमाणपत्र से दि पैवेलियन की व्यापारिक शक्ल तक का है. अपनी तरह का अनूठा मामला भी क्योंकि फाइलें ओवर स्पीड में  भागीं. बेशक सांसद अनुराग ने क्रिकेट का संसार हिमाचल में उतारा, लेकिन अब यही कसौटियां कसूरवार लगने लगीं है. देखना यह होगा कि तत्कालीन धूमल सरकार ने किस हद तक क्रिकेट संघ को गोद लिया और यह भी कि वीरभद्र सरकार की नजरों में कानून के कटघरे कितने काबिल हैं.

दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने पूर्व मंत्री व भाजपा नेता किशन कपूर के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर जांच करने के आदेश दिए हैं. मुख्य न्यायाधीश एएम खानविलकर व न्यायाधीश वीके शर्मा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पुलिस अधीक्षक के ओहदे वाला पुलिस अधिकारी ही मामले की जांच करे. न्यायालय ने उपरोक्त आदेश अरुण बिष्ट द्वारा दायर याचिका पर पारित किए, जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि हिमुडा के अध्यक्ष पद पर रहते हुए किशन कपूर ने प्लाट आवंटन गैर कानूनी ढंग से किया. उन्होंने बिना विज्ञापन दिए तथा नियमों का उल्लंघन करते हुए एक प्लाट अपने नाम तथा एक अपनी धर्मपत्नी के नाम अलॉट कर दिया. इसी प्रकार अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपने भाई सुभाष कपूर को नियमों को ताक पर रखकर हिमुडा के ठेके दिलाए. इसी प्रकार धर्मशाला में किशन कपूर द्वारा बनाया गया होटल भी अवैध निर्माण के दायरे में आता है.

शहरी विकास मंत्री रहते हुए उन्होंने पास किए हुए नक्शे का उल्लंघन किया तथा अवैध निर्माण किया. याचिकाकर्ता ने प्रश्न उठाए थे कि हिमुडा ने स्वैच्छिक कोटे के तहत बड़ा प्लाट आवंटित करने के लिए विज्ञापन क्यों नहीं दिया. धर्मशाला के एक पत्रकार को प्लाट देने के लिए क्या आधार बनाया गया था और नियमों के विरुद्ध मै. इंद्रू नाग फर्म को पैसे का कैसे भुगतान किया गया. न्यायालय ने इन सभी तथ्यों के मद्देनजर किशन कपूर के खिलाफ जांच कर 20 सितंबर, 2013 तक अनुपालना रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष रखने के आदेश दिए गए हैं. मामले पर सुनवाई 20 सितंबर को होगी.himachal pradesh cricket association

पूर्व मुख्यमंत्री एवं विपक्ष के  नेता प्रो. प्रेम कुमार धूमल का कहना है  कि एचपीसीए मामले में कानूनी और राजनीतिक दोनों तरह से लड़ाई लड़ी जाएगी. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस बदला-बदली की भावना से काम कर रही है. पहले पूर्व मंत्री डा. राजीव बिंदल पर केस बनाया गया और अब हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जबकि एचपीसीए ने धर्मशाला में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनाकर देश-विदेश में एक अलग पहचान बनाने का काम किया है. इससे कांगड़ा घाटी के पर्यटन व्यवसाय में भी इजाफा हुआ है. श्री धूमल ने कहा कि कांगे्रस क्रिकेट स्टेडियम के निर्माण के प्रारंभ से ही विरोध करती आई है. वर्ष 2003 में भी एचपीसीए के खिलाफ कानून पास किया था, लेकिन वर्ष 2007 में उद्देश्य हासिल न होने के कारण इसे रद्द करना पड़ा. प्रो. धूमल ने केंद्र की यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महंगाई से आम जनता बुरी तरह से त्रस्त है. सरकार का बढ़ते दामों पर कोई नियंत्रण नहीं है.The-Pavilion-Hotel

प्रदेश क्रिकेट संघ के अध्यक्ष सांसद अनुराग ठाकुर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ के विरुद्ध मामला दर्ज करने को कहा है या पुलिस विभाग ने मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की है, इसका मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को खुलासा करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश क्रिकेट संघ एक खुली किताब की तरह है और इसका हर कार्य आइने की तरह पाक साफ है, वह किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने बताया कि स्टेडियम की जगह पर दि पैवेलियन होटल नहीं बनाया गया है, बल्कि इसे अलग स्थान पर सरकार से स्वीकृति लेकर ही बनाया गया है और उसका किराया संघ सरकार को अदा करता है. उधर गगल में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह हिमाचल क्रिकेट संघ पर कब्जा करना चाहते हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.