/सेना की जमीन अवैध रूप से दी गई राजपरिवार के ट्रस्ट को..

सेना की जमीन अवैध रूप से दी गई राजपरिवार के ट्रस्ट को..

-संगीता शर्मा||

जोधपुर . उम्मेद भवन पैलेस की तलहटी में सेना की जमीन मेजर महाराजा हरीसिंह चेरिटेबल ट्रस्ट को  अवैध रूप से  सेना और रक्षा संपदा अधिकारियों की सांठगांठ से हस्तांतरित की गर्इ थी. यह बात सेना की प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया है. सेना के स्थानीय अधिकारियों और रक्षा संपदा के अधिकारियों की मिलीभगत से  सेना की  कब्जे वाली 4.84 एकड़ जमीन  जोधपुर राजपरिवार के ट्रस्ट को छह साल पूर्व हस्तांतरित कर दी थी. उस जमीन पर ट्रस्ट ने  भूंखड काट बेच भी  दिए और उस पर कर्इ बंगले  भी आबाद हो चुके है. इस मामले में सीबीआर्इ भी जांच कर रही है.umaid-bhawan-heritage

जांच में पता चला है कि 2006  में तत्कालीन रक्षा मंत्री वीरेन्द्रसिंह  के  ट्रस्ट को सेना की खसरा नंबर 426 में से अतिरिक्त जमीन हरीसिंह टस्ट को देने का पत्र लिखा था. विशेष सचिव डा रेखा भार्गव की अध्यक्षता में 21 दिसंबर 2006 को एक  कमेटी का गठन किया गया था. उस कमेटी के बैठक के मिनट्स के अनुसार तत्कालीन सचिव संयुक्त सचिव आनंद मिश्रा ने सेना की जमीन के बारे में पूरा ब्यौरा दिया. उन्होने बताया कि सेना की अतिरिक्त जमीन का सर्वे करने के लिए कमेटी का गठन किया गया है.  उस बैठक में मंत्रालय के एडीजी मेजर बी. थाबिया और रक्षा संपदा के एडीजी अशोक हरनाल  ने  ट्रस्ट की  पैरवी करते  हुए कहा कि पूर्व नरेश के साथ सेना के खिलाफ मुकदमों का उस ट्रस्ट से कोर्इ नाता नहीं है. अतिरिक्त जमीन का सीमांकन करवाने के लिए राजस्थान सरकार व जोधपुर कलेक्टर से आग्रह किया जाएगा. सेना ट्रस्ट को अदालती मामलों से जोड़े  बिना  अतिरिक्त जमीन दे सकती है. इसके  बाद स्थानीय सेना व रक्षा संपदा की अधिकारियों ने राजस्व विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत कर सेना जमीन को ही अतिरिक्त बताते हुए बिना केबिनेट की मंजूरी के 4.84 एकड़ जमीन टस्ट को हस्तातंरित कर दी गर्इ.

मेजर जनरल थाबिया ने किया गुमराह

महाराजा हरिसिंह मेमोरियल  ट्रस्ट पूर्व नरेश गजसिंह के चाचा के नाम का है. उसके संचालक बिग्रेडियर शक्ति सिंह थे और वे सेना के खिलाफ तमाम मुकदमों का काम भी वे ही देखते थे. इसके बावजूद मेजर जनरल थाबिया ने बैठक में क्यो गुमराह किया कि सेना के खिलाफ राजपरिवार की ओर से चल रहे मामलों को ट्रस्ट से कोर्इ सबंध नहीं है. गौरतलब है कि मेजर जनरल थाबिया और रक्षा संपदा के एडीजी हरनाल ही ट्रस्ट को जमीन देने की पैरवी  की थी और उन पर अब गाज गिरना तय है.

वीरेन्द्रसिंह ने क्यों भेजा पत्र

तत्कालीन रक्षा मंत्री  राव वीरेंद्रसिंह के निजी सचिव ने जमीन की जमीन ट्रस्ट को सौपने के लिए पत्र भेजा था. यह मामला भाजपा नेता किरीट सोमैय्या के उठाने पर  रक्षा मंत्री ए के एंटोनी ने कोर्ट ऑफ़ इन्क्वायरी के आदेश दिए थे. उस जांच में  गलत तरीके से जमीन देना पाया गया था. इस पर मामले की जांच सीबीआर्इ को सौंपी गर्इ और सीबीआर्इ ने 14 मई 2012 में  एफआर्इ दर्ज की गर्इ. इसके साथ ही सेना की जांच में रक्षा मंत्रालय और रक्षा संपदा के अधिकारियों की मिलीभगत होने के सबूत मिले है. रक्षा मंत्री एंटोनी ने सोमवार को लोकसभा में अधिकारियों की मिलीभगत से गलत तरीके से सेना की जमीन देने की पुष्टि की है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.