/लखनऊ विश्वविद्यालय की चार हाई प्रोफाइल छात्राओं ने किया यौन शोषण…

लखनऊ विश्वविद्यालय की चार हाई प्रोफाइल छात्राओं ने किया यौन शोषण…

लखनऊ विश्वविद्यालय के महिला प्रबंधन छात्रावास में रहने वाली चार हाई प्रोफाइल छात्राओं पर एमबीए प्रथम वर्ष की छात्रा ने यौन शोषण का आरोप लगाया है.rape

बुधवार को पीड़ित छात्रा ने शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न व यौन शोषण की लिखित शिकायत प्रॉक्टर से की. प्रॉक्टर प्रो. मनोज दीक्षित ने बताया कि छात्रा की तरफ से शिकायत मिलने के बाद जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई है.

पीड़ित छात्रा पटना की रहने वाली है और लखनऊ विश्वविद्यालय में एमबीए कर रही है. प्रबंधन महिला छात्रावास में वार्डेन अमिता कनौजिया के कक्ष के सामने ही इसका भी कक्ष है. छात्रा ने चार छात्राओं पर आरोप लगाए हैं.

चारों ही हाई प्रोफाइल घरानों से ताल्लुक रखती हैं. पीड़ित का आरोप है कि चारों ने कई दिनों तक उसका यौन शोषण करने के साथ शारीरिक एवं मानसिक उत्पीड़न भी किया. भद्दी गालियां दी गई और किसी को जानकारी देने पर गोली मारने की धमकी भी दी. चारों छात्राएं उस छात्रा को पढ़ने के लिए साथ ले जाती थीं और साथ ही वापस आती थीं.

आरोपियों ने उत्पीड़न की सारी सीमाएं लांघ दीं तो पीड़ित छात्रा का सब्र टूट गया. बुधवार को वह पढ़ने नहीं गई. बाकी छात्राओं के जाने के बाद उसने वार्डन अमिता कनौजिया से शिकायत की. उच्च अधिकारियों को भी जानकारी दी गई. प्रॉक्टर ने महिला सेल की संयोजक डॉ. शीला मिश्रा, डॉ. मनीषा गुप्ता, डॉ. अल्का पांडेय व डॉ. अपर्णा गोडबोले को इसकी तत्काल जांच सौंप दी.

प्रबंधन महिला छात्रावास की कुछ छात्राओं ने बताया कि यहां एक महिला कर्मचारी शराब की सप्लाई करती है. इसके लिए वह मोटा दाम वसूलती है. आरोप है कि छात्रा के साथ जो भी हुआ, उसे भी शराब के नशे में अंजाम दिया गया. कुलपति एसबी निम्से ने कहा, मामले की जांच की जा रही है.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.