/बिहार के मंत्री भीम सिंह ने दिया बेहूदा बयान, नीतीश की फटकार के बाद मांगी माफ़ी..

बिहार के मंत्री भीम सिंह ने दिया बेहूदा बयान, नीतीश की फटकार के बाद मांगी माफ़ी..

पटना. पुंछ में शहीद हुए जवानों पर हमारे राजनेताओं के बेहुदे बोल सुनने को मिल रहे हैं. मंत्री-नेता अपने बयानों से जवानों की शहादत का मजाक उड़ा रहे हैं. बिहार के ग्रामीण कार्यमंत्री भीम सिंह ने ऐसा ही एक बयान देकर शहीदों की शहादत का मजाक उड़ाया है. भीम सिंह ने कहा है कि सेना और पुलिस में लोग शहादत देने के लिए ही जाते हैं.BHIM  SINGH

जब भीम सिंह से बिहार के जवानों की शहादत के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि लोग सेना और पुलिस में शहीद होने के लिए ही आते हैं. जब पत्रकारों ने ये पूछा कि बिहार का कोई मंत्री जवानों के अंतिम संस्कार में क्यों नहीं गया, तो उन्होंने उल्टा सवाल दागते हुए कहा कि क्या आपके माता-पिता शहीद के अंतिम संस्कार में गए थे.

जब भीम सिंह के इस बयान की चौतरफा निंदा होनी शुरू हो गई और बिहार सरकार की थू थू होने लगी तो बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भीम सिंह को लताड़ पिलाई. तब कहीं जाकर भीम सिंह ने अपने इस बयान पर खेद जताया.

गौरतलब है कि सीमा पर पाक हमले में मारे गए पांच जवानों में से एक शहीद प्रेम नाथ का अंति‍म संस्कांर आज सुबह छपरा में कर दिया गया. बिहार सरकार की ओर से कहा गया था कि शहीदों का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा, लेकिन प्रेम नाथ के अंति‍म संस्कार में बि‍हार सरकार का एक भी मंत्री नहीं पहुंचा. वहीं बिहार रेजीमेंट के चारों शहीद जवानों का पार्थिव शरीर जब पटना एयरपोर्ट पर पहुंचा तो बिहार सरकार का कोई भी नुमाइंदा मौजूद नहीं था.

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.