Loading...
You are here:  Home  >  अपराध  >  Current Article

रैगिंग के चलते आत्महत्या, मुझे पिंक सूट पहना कर जलाना..

By   /  August 8, 2013  /  2 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

भोपाल, फार्मेसी सेकंड ईयर की छात्रा ने डेढ़ साल से लगातार चल रही रैगिंग के चलते फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. घटना के वक्त घर में सिर्फ उसकी सात साल की भांजी मौजूद थी. पुलिस को उसके कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उसने कॉलेज की चार सीनियर छात्राओं पर रैगिंग लेने का आरोप लगाया है. खुदकुशी से पहले उसने यह बात अपने भाई को भी बताई थी. इससे पहले अनीता ने कॉलेज के एक शिक्षक मनीष को भी अपनी व्यथा से अवगत करवाया था मगर मनीष ने कोई कार्यवाही करने की बजाय अनीता को चुप रहने और सहने के लिए बोल मामले की इतिश्री कर दी.anita

आरकेडीएफ कॉलेज में बी-फार्मा सेकंड ईयर की छात्रा 18 वर्षीय अनीता पिता कमलेश शर्मा जीवन विहार सोसायटी स्थित फ्लैट नंबर 611 में रहती थी. उसके पिता मुंबई की एक निजी कंपनी में लाइजनिंग ऑफिसर हैं.

उसकी बड़ी बहन सरिता ने बताया कि मंगलवार दोपहर अनीता ने कॉलेज से घर लौटने के बाद अपने भाई हेमंत को चार छात्राओं द्वारा उसे परेशान किए जाने की बात बताई थी.

हेमंत ने यह कहते हुए उसे ढांढस बंधाया कि पापा के आने पर इस संबंध में शिकायत करेंगे. करीब छह बजे हेमंत सब्जी लेने के लिए घर से निकल गया. इसके बाद अनीता ने श्रुति को बरामदे में खेलने के लिए भेज दिया. इसी दौरान उसने अपने कमरे में जाकर फांसी लगा ली.

माता-पिता को संबोधित नोट में लिखा है कि ‘मॉम एंड डैड आई लव यू. आप मुझे मिस मत करना. ब्रदर सबसे ज्यादा तूं रोने वाला है, बी कॉज तेरी बेस्ट फेंड्र जा रही है. मैं न गंदी बन सकती हूं, न स्ट्रांग. मुझे पिंक सूट पहना कर जलाना.’ पापा मैं जानती हूं कि मैं आपकी फेवरेट रही हूं. चाहती थी कि पढ़ लिखकर खूब पैसा कमाऊं और एक बड़ा घर बनवाऊं.

‘मैं अनीता शर्मा आरकेडीएफ कॉलेज में बी-फार्मा सेकंड ईयर की छात्रा हूं. जब से मैं कॉलेज आई, तभी से मेरे साथ रैगिंग हो रही है. ये चारों लड़कियां बहुत गंदी हैं. मैंने इन्हें एक साल तक कैसे झेला, ये मैं ही जानती हूं. मुझसे इन्होंने मिड सैम की कॉपी तक लिखवाई. उनकी शिकायत करने पर मनीष सर ने मुझे कहा था कि कॉलेज में रहने के लिए सीनियर्स की बात माननी पड़ती है.’

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email
  • Published: 4 years ago on August 8, 2013
  • By:
  • Last Modified: August 8, 2013 @ 3:07 pm
  • Filed Under: अपराध

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. Armaan Bhati says:

    Bina teachers ke support ke ragging impossible hai.

  2. Etania sarm kia bat hia kia eak ldkia ka mjak udanya sa kya milta naga dans krya sram nhiaata all student koa sram ana chahiy tuam loag kagharmiya bhan nhiya thia nyatikta ka ptan hogya hia.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

पनामा के बाद पैराडाइज पेपर्स लीक..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: