/पाक ने माना दाऊद इब्राहीम पाकिस्तान में ही था…

पाक ने माना दाऊद इब्राहीम पाकिस्तान में ही था…

एक तरफ लाहौर में शुक्रवार को लश्कर ए तैयबा सरगना हाफिज सईद ने नमाजियों की अगुआई कर पाकिस्तान सरकार की ‘पाबंदी’ की पोल खोल दी, वहीं नवाज सरकार के खास दूत शहरयार खान ने साफ तौर पर माना कि दाऊद इब्राहीम अभी तक उनके मुल्क पाकिस्तान में ही था.dawoodibrahim

दाऊद को पनाह देने से लगातार इनकार के बाद पहली बार आधिकारिक तौर पर माना गया कि दुनिया में दहशत और जरायम का पर्याय बन चुका यह माफिया सरगना हाल तक पाकिस्तान में पनाह लिए था.हालांकि इस स्वीकारोक्ति में यह भी कबूल किया गया है कि बदले हालात को देखते हुए वह पाकिस्तान से निकल कर दूसरे मुल्क में चला गया है.
लंदन में शुक्रवार को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विशेष दूत शहरयार खान ने बेबाकी से कहा कि दाऊद पाकिस्तान में था. लेकिन मेरा मानना है कि उसे पाकिस्तान से बाहर खदेड़ दिया गया है. अगर वह पाकिस्तान में है तो उसे ढूंढ़ कर गिरफ्तार कर लिया जाएगा. हम इस तरह के गैंगस्टरों को अपने देश से गतिविधियां चलाने नहीं दे सकते. पूर्व राजनयिक ने जोर देकर कहा कि अगर दाऊद उनके देश में होता तो उसे अब तक गिरफ्तार कर लिया गया होता.
यहां भारतीय पत्रकार एसोसिएशन के एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम से पहले संवाददताओं से बात करते हुए  खान ने कहा-मुझे लगता है कि दाऊद संयुक्त अरब अमीरात में है. नवाज शरीफ सरकार उन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के पक्ष में है जो न सिर्फ पाकिस्तान को, बल्कि दूसरे देशों को भी प्रभावित कर रहे हैं चाहे वह भारत हो या अफगानिस्तान या कोई और देश. हम देश में अपराधियों को फूलते-फलते नहीं देख सकते. अगर वे हमारे यहां आते हैं तो हम कार्रवाई करेंगे. यही वजह है कि मुझे लगता है कि दाऊद पाकिस्तान छोड़ चुका है.
पाकिस्तान के पूर्व विदेश सचिव ने तालिबान के नरमपंथी तत्त्वों के साथ वार्ता करने के पाकिस्तान की नव निर्वाचित सरकार के वादे को भी दोहराया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान नरमपंथी तालिबान के साथ वार्ता करने के पक्ष में है. लेकिन काफी संख्या में तालिबान नरमपंथी नहीं हैं. पाकिस्तान में जो संचालित हो रहे हैं वे नरमपंथी नहीं हैं. हालांकि, पाकिस्तान उपयुक्त लोगों के साथ वार्ता के लिए तैयार रहेगा.
इस बीच लाहौर में लश्करे-तैयबा के सरगना  हाफिज सईद ने शुक्रवार को यहां गद्दाफी स्टेडियम में ईद की नमाज की अगुआई की और भारत के खिलाफ जहर उगला. नमाज के कुछ ही घंटों पहले जमात उद दावा प्रमुख ने ट्वीट किया -समय नजदीक है जब कश्मीर, फिलस्तीन और बर्मा के दबे-कुचले लोग आजादी की हवा में ईद मनाएंगे. सईद पर एक करोड़ अमेरिकी डॉलर का इनाम है. लोगों के जमा होने से पूर्व सईद की फोटो वाले पोस्टर शहर में विभिन्न स्थानों पर लगे हुए थे. सईद ने अपने एट दी रेट ऑफ हाफिज सईद जेयूडी एकाउंट से ट्वीट किया-वह समय करीब है जब कश्मीर, फिलस्तीन और बर्मा के लोग आजादी की हवा में ईद मनाएंगे. इंशाल्लाह. इसलिए इस परीक्षा की घड़ी में हम आपको ईद मुबारक कहते हैं. जल्द ही दुनिया आपकी जीत के बाद आपको ईद मुबारक कहेगी. अल्लाह इसे स्वीकार करे. अल्लाह आपके बलिदान को बेकार नहीं जाने देगा. इस्लाम मजबूत होगा, वह समय करीब है.
याद रहे, भारत बार-बार पाकिस्तान से कह चुका है कि वह मुंबई हमलों के साजिशकर्ता को कानून के कठघरे में खड़ा करे. उसे कई बार पाकिस्तान में
भारत विरोधी रैलियों को संबोधित करते देखा गया है. पाकिस्तान कहता है कि उसके पास सईद के खिलाफ कोई सबूत नहीं है.
इस बीच दिल्ली में खुफिया सूत्रों ने सरकार को जानकारी दी कि लश्कर सरगना ने कराची में एक तकरीर देकर दिल्ली में फिर से हमला करने की धमकी दी है. सईद ने कहा है कि वह सन 2000 में लालकिले पर हुए हमले को दोहरा सकता है. सूत्रों के अनुसार, हाफिज की इस धमकी के बाद दिल्ली पुलिस को आईबी ने चिट्ठी लिखी थी. लाहौर में शुक्रवार को ईद की नमाज के बाद सईद ने ट्वीट किया है कि कश्मीर में भी लोग आजादी की हवा में ईद मनाएंगे. सईद आज जिस तरह लाहौर में सरेआम घूमा उससे पाकिस्तान सरकार के इस दावे की पोल खुल गई है कि उस पर पाबंदी लगाई गई है.
(एजंसियां).

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.