/भीम सिंह के बाद नरेंद्र सिंह ने उड़ाया शहीदों का मज़ाक…

भीम सिंह के बाद नरेंद्र सिंह ने उड़ाया शहीदों का मज़ाक…

बिहार सरकार के मंत्री तो जैसे शहीदों को शहादत को हँसी-ठट्ठा समझते हैं. सीमा की रक्षा के लिए अपनी जान न्यौछावर कर शहीद होने जाने वाले सैनिकों का बिहार की सुशासन सरकार के मंत्री किस तरह मज़ाक उड़ा रहे हैं, इसका नमूना ग्रामीण विकास मंत्री भीम सिंह के बाद कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह के बेहूदा बयान से मिलता है. अबकी बार जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के बिहार के कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह ने हमले को लेकर अजीबो-गरीब दलीलें दी हैं.narendraSingh

नीतीश कुमार की सुशासन कैबिनेट में नंबर दो का रुतबा रखने वाले कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह ने सैनिकों पर हुए हमले में पाकिस्तान को क्लीन चिट दी है. यही नहीं, उन्होंने पाकिस्तान के प्रति सहानुभूति भी प्रकट कर दी. इसके बाद भी वे रुके नहीं और शहादत पर शर्मनाक बयान देने वाले मंत्री भीम सिंह के बयान को भी सही ठहराया. हद तो तब हो गई, जब उन्होंने शहीद विजय राय के परिवार के अनशन पर बैठने पर ही सवाल खड़ा कर दिया.

नरेन्द्र सिंह शनिवार को जमुई में एक संवाददाता सम्मलेन को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा, ‘पाकिस्तान तो खुद ही आतंकवाद से पीडि़त है, ये आतंकियों की कार्रवाई है. भीम सिंह ने कोई गलत बात नहीं कही थी. उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया. शहीदों के परिवारों को अनशन नहीं करना चाहिए.’

नरेन्द्र सिंह के इस बयान के बाद बवाल मच गया. शहीदों के परिवारों ने इसे शहीदों का अपमान करार दिया तो विपक्षी नेताओं ने इसे नीतीश कुमार की वोट बैंक पॉलिटिक्‍स कहा. शहीद विजय राय के चाचा रामवीर सिंह ने कहा कि जनता ही इन नेताओं को जबाब देगी. उन्‍होंने सवाल उठाया कि मंत्री को कैसे मालूम कि इसमें पाकिस्तान का हाथ नहीं है?

शहीद विजय राय के परिवार के साथ बैठे बीजेपी नेता गिरिराज सिंह के मुताबिक, ये सरकार की वोट बैंक पॉलिटिक्स की सोची-समझी चाल है और नीतीश सरकार अब बेशर्मी पर उतर आई है. आरजेडी ने भी नरेन्द्र सिंह के बयान के बाद उनसे इस्तीफा मांगा है. मगर लगता नहीं कि बेशर्मी की सारी सीमायें तोड़ देने वाले यह मंत्री इस्तीफ़ा देगें.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.