/रोबर्ट वाड्रा ने किया फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल – अशोक खेमका की रिपोर्ट…

रोबर्ट वाड्रा ने किया फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल – अशोक खेमका की रिपोर्ट…

आईएएस अशोक खेमका ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के कथित फर्जी जमीन सौदे के मामले में अपनी जवाबी रिपोर्ट हरियाणा सरकार को सौंप दी है.  हरियाणा के शिकोहपुर गांव में 3.53 एकड़ भूमि सौदा मामले में आईएएस अशोक खेमका की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सौदे के लिए रॉबर्ट वाड्रा ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि सौदे के लिए सेल डीड में लगाया गया चेक भी फर्जी था क्योंकि इस चेक के ज़रिये बैंक में कोई ट्रांजेक्शन ही नहीं हुआ.Robert-Vadra

आईएएस अशोक खेमका की रिपोर्ट के मुताबिक रोबर्ट वाड्रा ने शिकोहपुर गांव की 3.53 एकड़ भूमि को महज 7.5 करोड़ रुपये में खरीद कर तुरंत उसको 58 करोड़ रुपये में डीएलएफ को बेच दिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि वाड्रा-डीएलएफ सौदे में पैसे का कोई लेन-देन नहीं किया गया और कागजों पर फर्जी तरीके से जमीन का सस्ते भाव में सौदा हो गया. इस सौदे के पेपर में चेक नंबर भी फर्जी डाला गया.

गौरतलब है कि अशोक खेमका ने इस सौदे को रद्द करते हुए इसमें फर्जीवाड़ा होने की बात कही थी लेकिन इसके बाद उनका तबादला दूसरे विभाग में कर दिया गया था. खेमका के अनुसार रॉबर्ट वाड्रा ने दस्तावेजों में हेराफेरी कर रजिस्ट्रेशन एक्ट 82 का उल्लंघन किया गया. इस मामलें मे दोषी पाए जाने पर वाड्रा को सात वर्ष की सजा हो सकती है. इस जमीन मामले में वाड्रा ने 2 माह के भीतर ही 50 करोड़ से अधिक का मुनाफा कमाया था. वाड्रा ने यह जमीन डीएलएफ से खरीदी और बाद में यह जमीन उसे ही बेच दी. जमीन खरीदे सौदे में 7.5 करोड़ के चेक का जिक्र है लेकिन चेक नंबर फर्जी निकला.

हरियाणा सरकार ने इस फर्जीवाड़े की जांच करने के लिए तीन सदस्यों वाली एक जांच समिति बनाई थी. अशोक खेमका के मुताबिक जिन वरिष्ठ अधिकारियों की कमेटी ने इस सौदे को क्लीन चिट दी, उन्होंने उनकी रिपोर्ट के पूरे तथ्यों को देखने की कोशिश ही नहीं की और आनन-फानन में सौदे को क्लीन चिट दे दी. खेमका ने आरोप लगाया है कि जब से यह मामला सामने आया है तब से लेकर अब तक उन्हें तंग किया जा रहा है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.