/पीएम हैं बस…

पीएम हैं बस…

-आलोक पुराणिक ||

पाकिस्तान के प्राइम-मिनिस्टर नवाज शरीफ हाल में किसी मुल्क के पीएम से फोन पर बात कर रहे थे. उनकी ये बातचीत रिकार्ड होकर मुझे मिल गयी है. पता नहीं लग पा रहा है कि पाकिस्तानी पीएम किस मुल्क के पीएम से बात कर रहे हैं, आप अंदाज लगायें. बातचीत पंजाबी, हिंदी और इंगलिश में मिक्स्ड है.नवाज शरीफ

नवाज शरीफ-होर की हाल हैगा. मैं पीएम बोल रयां.

दूसरे मुल्क के पीएम उर्फ दूमुपीएम-होर फुल मजे हैं. पीएम हैंगे तो तो कुछ करण वास्ते ही नहीं हैगा. हमारे मुलुक विच पीएम को कोई पूछता ही नहीं है.

नवाज शरीफ-हमारे मुल्क विच भी यही हाल हैगा. कोई ना पूछता पीएम नू. कदी सेना कुछ कर आती है. कदी आईएसआई कुछ कर आती है, कदे तालिबान. मुझे तो सब होने के बाद पता लगता है कि कुछ हो गया. क्या करिये, असी तो बस पीएम हैं.

दूमुपीएम-अजी तुहाड़ा हाल तो चंगा हैगा, होने के बाद तो पता चल जांदा है कि क्या हो लिया. हमारे मुल्क विच तो कुछ होणे के बाद भी पता ना चलता कि क्या हुआ . कुछ पूछो किसी से, तो बताते हैं कि तुसी की करोगे, तुसी तो पीएम हो. वो तो सब तरफ से गालियां पड़नी शुरु होती हैं, पब्लिक चिल्लाती है, तब समझ में आता है कि कुछ हो गया है. पर क्या करिये, असी तो बस पीएम हैं.

आलोक पुराणिक
आलोक पुराणिक

नवाज शरीफ-जे कुछ हो जाये तुहाड़े मुल्क विच, तो तुसी किसको जिम्मेदार ठहराते हो.

दूमुपीएम-मैं तो कह देता हूं कि ग्लोबल कारण जिम्मेदार हैं. अभी शहर में बारिश में एक जगह सड़क पर पानी भर गया, तो मैंने कह दिया कि ग्लोबल कारण हैं. पब्लिक हंसने लगी. क्या करिये, असी तो बस पीएम हैं.

नवाज शरीफ-मुल्क में कुछ अच्छा हो जाये, तो सब क्रेडिट लेण वास्ते आ जाते हैं. जे कुछ खराब हो जाये, तो सब कहदें कि पीएम ने कुछ ना किया. अब बताओ असी क्या कर सकदे हैं, असी तो बस पीएम हैं.

दूमुपीएम-बिल्लकुल्ल जे ही मेरे मुल्क विच हो रहा हैगा. सब पूछते हैंगे कि पीएम क्या कर रहे थे. अब बताओ कैसे समझायें कि असी क्या कर सकदें, असी तो बस पीएम हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.