/इंडियन डे परेड में अर्द्धनग्न युवतियों के बीच झंडारोहण करेगें अन्ना हजारे…

इंडियन डे परेड में अर्द्धनग्न युवतियों के बीच झंडारोहण करेगें अन्ना हजारे…

-सुग्रोवर||

जन लोकपाल की मांग के साथ भारतीय फलक पर छाये अन्ना हजारे एफआईए के अमेरिकन शहर न्यूयार्क में होने वाले सालाना ज़लसे इंडियन डे में न केवल झंडारोहण ही करेगें बल्कि अर्धनग्न युवतियों की परेड में हिस्सा भी लेगें. इस ज़लसे में अन्ना हजारे के साथ साथ “डर्टी गर्ल” विद्या बालन भी हिस्सा लेगीं. पूर्व सेनाध्यक्ष वी. के. सिंह भी अन्ना हजारे के साथ इस परेड का हिस्सा बनने जा रहे हैं. अब अन्ना हजारे ओर वी.के. सिंह दोनों जा रहे हैं तो यह संभव ही नहीं है कि वी. के. सिंह को अन्ना हजारे से मिलवाने वाले पूर्व सांसद और वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय न जाएँ.indian-day-pared

18 अगस्त को अमेरिका में होने वाले इस जलसे को भारतीय स्टेट बैंक समेत भारत के चार बड़े सरकारी बैक प्रायोजित कर रहे हैं. इस परेड पर करीब चार लाख अमेरिकन डॉलर का खर्च आयेगा जो कि इस परेड के प्रायोजक चुकायेगें.

गौरतलब है कि यह परेड अमेरिका में रह रहे कुछ भारतीयों द्वारा बनाई गई संस्था फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एसोसियेशन (एफआईए) द्वारा आयोजित की जाती है. देश भर के कि वरिष्ठ पत्रकार और बुद्धिजीवी इस संस्था के सदस्यों पर अंगुली उठाते रहे हैं. मगर इस सब के बावजूद भारतीय बैंकों द्वारा ऐसे आयोजनों पर जमाकर्ताओं का पैसा लुटाने का सबब समझ से परे है.

 

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एफआईए की इस परेड की स्वागत समिति के चेयरमैन सर्वेश धरयान हैं. एक अख़बार अमर भारती में छपी खबर के अनुसार सर्वेश धरयान को इसी सत्रह जुलाई को अमेरिका में मनी लांड्रिंग और ट्रेवल एक्ट की कुछ धाराओं के तहत गिरफ्तार भी किया गया था. इसी स्वागत समिति का दूसरा चेहरा है, नीरव मेहता. नीरव मेहता को दो हज़ार पांच में गुजरात स्माल स्केल इण्डस्ट्रीज में घपला करने के आरोप में मुंबई हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था. कुछ समय बाद जेल से जमानत पर बाहर आकर नीरव मेहता भारत से भाग गया और अमेरिका पहुँच गया. वहां इस नटवर लाल ने अपनी चालाकी दिखाई और भारतीयों के एक एनजीओ ट्रस्ट का ट्रस्टी बन बैठा. यही नीरव मेहता अब एफआईए का प्रेसिडेंट है.

अब आप खुद अंदाज़ा लगायें कि अन्ना हजारे किस चंगुल में फंसे हैं. कम पढ़े लिखे होने के कारण अन्ना हजारे उनके इर्द गिर्द हो रही चालाकियों में फंस जाते हैं और दूसरों के फायदे के लिए हथियार साबित होते हैं.

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.