/जेठ ने किया दुष्कर्म, तीन माह का गर्भ गिरा..

जेठ ने किया दुष्कर्म, तीन माह का गर्भ गिरा..

-चन्दन सिंह भाटी||

बाड़मेर में महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाओं की बढ़ोतरी ने पुलिस को परेशान किया हो या नहीं लेकिन आम जनता इससे बेतरह परेशान हो चुकी हैं. ऐसे ही एक मामले ने एक बार फिर से स्थानीय महिलाओ को चिंतित कर दिया है कि वो अपने घर में भी सुरक्षित नही हैं. बाड़मेर के बायतू इलाके में घर पर ही घरेलू सदस्य द्वारा किये गए इस सनसनीखेज मामले ने महिलाओं की नींद हरम कर दी है.rape by brother in law

एक महिला ने आरोप लगाया है कि उसके सगे जेठ ने उसके साथ दुष्कर्म और मारपीट की और इसकी वजह से उसका तीन माह का गर्भ भी गिर गया. जेठ द्वारा किये गए दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद पुरे इलाके में सनसनी फ़ैल गई. पुलिस ने इस मामले अब अपनी जाँच शुरू कर दी है.
बाड़मेर जिले के बायतू थाने में एक विवाहिता ने मामला दर्ज करवाया हैं कि उसके सगे जेठ ने उसके साथ दुष्कर्म और मारपीट की और इसकी वजह से उसका तीन माह का गर्भ गिर गया. पुलिस ने इस मामले में भी तक आरोपी को गिरफ्तार तक नही किया है और इसकी वजह से महिला बार बार पुलिस और प्रशासन के दर पर ठोकरे खाने को मजबूर हैं. महिला की माने तो उस पर आरोपी बार बार राजीनामा करवाने का दबाव बना रहा है. जबकि पुलिस भी उसकी रिपोर्ट पर कार्यवाही करने की बजाय दुष्कर्मी जेठ का साथ दे रही हैं. पीडिता के परिजन और पीडिता स्वयं बार बार की परेशानी और जिला मुख्यालय आकर अधिकारियों से गुहार करने की जिल्लत से मुक्ति नहीं पा सकी है. क्यूंकि उसे बार बार अधिकारियो को यह बताना पड़ रहा हैं कि उसके साथ क्या क्या हुआ हैं. जिससे इस महिला को बार बार शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है.

परिजनों और महिला की मांग हैं कि बायतू थाना में दर्ज उसका मामला महिला थाने में शिफ्ट किया जाए ताकि उसे न्याय मिल सके.

दूसरी तरफ जिला पुलिस अधीक्षक सवाई सिंह गोदारा ने इस मामले की गम्भीरता को देखते हुए इसकी जांच करने और न्याय संगत कार्यवाही करने की बात कही है.

इस साल बाड़मेर जिले में बलात्कार की घटनाओ में लगातार हो रहे इजाफे ने हर किसी को हैरान कर  दिया है. गौरतलब है कि बाड़मेर जिले में इस साल करीब दो दर्जन के आस -पास बलात्कार के मामले तो अब तक दर्ज हो गए जबकि पिछले साल बाड़मेर जिले  में डेढ़ दर्जन ही मामले दर्ज हुए थे. जिसके चलते बाड़मेर में महिला यौन हिंसा और ख़ास कर घरेलू हिंसा का ग्राफ बढ़ता जा रहा हैं. ऐसे में बाड़मेर पुलिस ने ऐसे मामलों में संवेदनहीनता दिखाने पर बाड़मेर की पहचान कहीं बलात्कारमेर ना हो जाये.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.