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सिर्फ वोटर गरीब है भारत में…

By   /  August 16, 2013  /  18 Comments

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-अब्दुल रशीद||

छियासठ साल पहले विदेशी सत्ता से मुक्त होने के बाद से हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रुप में राष्ट्रीय पर्व मनाया जाता रहा है, और कल भी बड़े धूमधाम से मनाया गया. कहीं देशभक्ति के नारे लगाए जा रहें थे तो कहीं शहीदों के नाम के कसीदे पढे जा रहे थे. मैं भी इसी जश्न को मनाने में शरीक रहा, लेकिन जब मेरी नज़र भूखे नंगे बच्चों पर पड़ती है तो मेरी आंखे भर आती है, और मन में सवाल उठता है की आज़ादी क्या चंद लोगों को नसीब हुआ है, यदि ऐसा नहीं तो इस देश में किसान आत्महत्या क्यों करते है? और भूखे नंगे बच्चे सड़को पर भीख क्यों मांगते नजर आते है? मां बहने घर के बाहर महफूज़ क्यों नहीं? कुछ लोग कहेंगे के यह सही वक्त़ नहीं है बात करने का,  आखिर छह द्शक गुजरने के बाद आज भी हम गरीबी मिटाने की सियासी बात तो कर ही रहें हैं न, तो क्यों न ईमानदारी से बात करें? हमारे बड़े और बुजुर्ग हमें बचपन से यह बात  समझाते रहें कि कुशासन व अन्याय करने वाली विदेशी राज से देश आजाद हो चुका है. अब अपने लोग,  अपने लोगों वाली, अपनी सरकार होने की खुशी मे हम लोग हर साल आजादी का जश्न मनाते, तिरंगा लेकर प्रभातफेरी निकालते हैं और  छोटा सा बालक मैं तब उन्हें कौतुहल भरे नज़रों से निहारा करता था. आज अपने जीवन के 32वें साल मे मै फिर वही मंजर देख रहा हूँ. हांथों मे तिरंगा लिये फिर लोग सड़कों पर और बच्चे प्रभातफेरी करते खुश हो रहे हैं. क्या उन्हे पता है कि आजादी का मतलब क्या  है.poor kids

विदेशी शासन से आजादी पाने के बाद हमारे देश के संविधान निर्माताओं ने देश के हर नागरिक की सत्ता मे  भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये जो नियम कानून बनाये उस चुनावी प्रणाली वाले संविधान का  ही एक नाम है  “लोकतंत्र”. संविधान के प्रस्तावना में ही समस्त नागरिकों की विचार,अभिव्यक्ति,विश्वास,धर्म और उपासना की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने का जिक्र किया गया. इस संविधान की न्यायिक व्यवस्था मे देश के सभी नागरिकों को एक समान आधिकार दिये गये. इस व्यवस्था मे न कोई बडा है न कोई छोटा न कोई अमीर है न कोई गरीब. कहने को तो अपने मूलभूत अधिकारों के साथ  सभी लोग सम्मान जनक रूप से जीने को आजाद हैं, लेकिन इस भ्रष्ट तंत्र में  आम नागरिक के लिए आजादी के मायने  है क्या? जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने तक के लिए तो देश के तंत्र को चढावा चढाना पड़ता है.

casteism_in_India_-_Cast_Politicsआसानी से न्याय मिलने कि बात तो छोडिये, मूलभूत अधिकार भी आजादी के 66 साल बाद आम नागरिक के लिए कस्तूरी मृग बना हुआ है. कारण राजनैतिक माया जाल में फंसा आम नागरिक  रोजी रोटी के लिए इतना उलझकर रह गया के उसे अपने अधिकार का बोध ही न रहा.  सूचना पाने के अधिकार को कुचला जा रहा है. दो साल की सजा भुगत चुके लोगों को चुनाव लड़ने से रोकने वाले सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को बदलने की कोशिश की जा रही है. दान मे मिलने वाली रकम को राजनैतिक दल सार्वजनिक करने को तैयार नहीं और आरटीआई  का अधिकार छीनने की तैयारी करने में लगे हैं. पारदर्शी एवं सशक्त जन लोकपाल  न लाकर लोकतांत्रिक  तानाशाही का दरवाजा खोल दिया गया है. जीविका के हर संसाधन पर भ्रष्टाचार का बोलबाला है और मंहगाई के बोझ तले आम जनता दबी जा रही है, तो ऐसे हालात में स्वतंत्र  है कौन?india-poverty

स्वतंत्र भारत की पहली  स्वदेशी सरकार से अब तक  सत्ता की पुश्तैनी पकड़ के लालच मे आमजनता को  बराबर बांटा गया. पहले  बहुसंख्यक व अल्पसंख्यक मे बांटे गये और फिर धार्मिक रूप से भी आपस मे अलग थलग कर दिए  गये. सवर्णों व कुवर्णों मे बाटने से जब काम नही चला तो हमे जातिवादी बेडियों  मे जकड़ दिया गया. स्थिति ऐसी बना दी गयी है कि  आम नागरिक के मन में नफरत के बीज पड़ गए और एक दूसरे से सामाजिक सरोकार का लेश मात्र ही बस दिखाई पड़ रहा है. यह संकीर्ण मानसिकता नहीं तो और क्या है, के अब अधिकांशतः लोग पार्टी की बात करते हैं  देश की बात कम ही लोग करते हैं. हमारी पार्टी का नेता है तो सही है भले ही वह अपराध के दलदल में सर से पांव तक सना हो. यही कारण है के राजनैतिक बंदरबांट के खेल में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप मे  शामिल हो कर  हम संकीर्णता के गुलाम हो चुके हैं. और हम आजाद भारत मे भी आपस मे बंट कर वोट बैंक बन कर रह गये हैं.

तो क्या अब आम नागरिक इस देश का आवाम नही, सिर्फ वोटर हैं. जिसका इस्तेमाल सत्ता पाने के लिए राजनैतिक दल   करते हैं. क्या यही पहचान बन कर रह जाएंगी आज़ाद भारत के नागरिकों की ? या वह दिन भी आएगा जब सत्ता आम नागरिक के लिए होगा, और तंत्र लोक के लिए काम करेगा? ऐसा समय आएगा, यकीनन आएगा लेकिन उसके लिए हमें जाति – धर्म, अल्पसंख्यक – बहुसंख्यक जैसी मनोरोग से उपर उठना होगा,और देशप्रेम की भावना का अलख जगाना होगा, तभी हम राजनैतिक कुचक्र को तोड़ पाएँगें और आने वाली पीढी को स्वतंत्रता का वास्तविक मतलब समझा पाएंगे.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

18 Comments

  1. Aap watsapp par ho agar ho to no. Dena.

  2. Happy dhanteras and diwali in advance

  3. I m in middle east shaadi ke ek saal baad hi yaha shift ho gaye they.meri two daughters h aur husband ko to tumney dekha hi hua h. Wat abt ur kids. Tumhari shaadi kab hui.

  4. Vijay Nand says:

    Sheelu Biswas Fat ho fir bhi charming ho..;-)

  5. Vijay Nand says:

    Sheelu Biswas Thanks for Complement Sheelu..! But aisa bhi nahi hai…Mainey bhi weight put on kiy hai…but its suits my built and height…maen apna weight hamesha 75kg se 80kg ke beech maintain rakhta hoon..! That suits my 6 feet height..! Family ke baarey mein..? hmmmm…Chhoti sister ki shaadi kar dii hai..Wife is working…sab apni apni families mein mast hain..! sab theek chal raha hai…tum bhi toh kuchh batao na? India mein nahi ho toh kahan ho? How's ur family? about kids…hubby etc..

  6. Vijay Nand says:

    Sheelu Biswas Yes..I've changed so many jobs meanwhile…!

  7. Aur mai to pahley se hi fat hu. Arrey sab aap ki tarah lucky to nahi hotey ki weight put on hi nahi ho.aur apni family ke barey mai kuch batao

  8. Wo reply bhi meri tarah kho gaya ha ha ha

  9. 3Hi I m nt bong my husband is bong. Aur tumhari job change kar le tumbey.

  10. Vijay Nand says:

    Sheelu Biswas – Tumhara reply nahi mila jabki facebook dikha raha hai ki tumney 30 minutes pehle reply kiya hai? Kahan hai woh reply?

  11. 3Hi I m nt bong my husband is bong. Aur tumhari job change kar le tumbey.

  12. Vijay Nand says:

    Sheelu Biswas – Maen gayab nahi huha tha…tum antardhyan ho gayin thii Sheelu ;-)…life is good..life mein kya chalna hai…wahi chal raha hai jo shaadi ke baad chalta hai..! Tum batao? Agar India mein nahi ho toh kahana ho? You still look beautiful and gorgeous…but put on weight…that's not a good thing…hahahahaha! aur ek baat…mujhe toh pataa hii nahi thaa kii tum Bong ho!! Tumharey sirname se jaana!

  13. Hi I m fyn. Wat abt u. Aur kya bolu tum to gayab hi ho gaye the. Aur batao tumhari life m kya chal raha h. Mai india m nahi hu.

  14. Vijay Nand says:

    Sheelu Biswas What a pleasant surprise Sheelu..! And what a wonderful start of the day! I am good.! How are you and where have u been for such a long time?

  15. Vijay Nand says:

    Bahut Khoob kaha Rashid Bhai. 100% tanch baat kahi hai aapne! Sadhuwaad!

  16. abdual rasid jia stamea loag atya hia deas ko lutany ka liya bachanya kea liya nhia and ya etna sambhwa nhia hia jitna ha smjha rhehia hia kiwakia.
    pahla karan jatiy dharm sbsay bda kran hia yah sabhva hoga to uskia mrjiasea miya jada kiya likhua ap khuad samjhha dar hia.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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