/चेन्नई एक्सप्रेस में पिज्जा…

चेन्नई एक्सप्रेस में पिज्जा…

-आलोक पुराणिक||

उफ्फ कित्ती महंगाई, कित्ती महंगाई क्या करें.

चोप्प, सस्ताई मच गयी है, शुक्रवार, 16 अगस्त,2013 को टाइटन कंपनी का शेयर एक दिन में 12 परसेंट सस्ता, यस बैंक का शेयर बारह परसेंट सस्ता, रिलायंस कम्युनिकेशन का शेयर 11 परसेंट सस्ता हो गया, और कित्ती सस्ताई लेगा बे.OLYMPUS DIGITAL CAMERA

उफ्फ, आलू टमाटर प्याज के भाव देखो, कहां आसमान पे हैं.

चोप्प, आलू टमाटर खाते काहे को, इनवेस्टमेंट के लिए इस्तेमाल करो. आज खऱीदो प्याज अस्सी रुपये किलो, परसों सौ रुपये किलो बेच देना.

उफ्फ, नौकरियां जा रही हैं, गरीबी आ रही है.

चोप्प, हमारे सैंपल सर्वे के हिसाब से कुछ दामाद तो दो साल में हजार परसेंट अमीर हो गये. इकोनोमी चकाचक जा रही है, हमारे सैंपल के हिसाब से.

उफ्फ, सब लोग तो दामाद नहीं हो सकते इकोनोमी में. कुछ गैर-दामाद भी होते हैं.

चोप्प, ये पर्सनल मैटर हैं, हम इन पर कमेंट नहीं कर सकते. हमारे हिसाब से इकोनोमी चकाचक है.

उफ्फ, रोटी खाने में आफत आ रही है, आप कहते हो इकोनोमी चकाचक है.

चोप्प, मनहूस रोटी पे रोता है. पब्लिक दबादब पिज्जा खा रही है, देख देश में डोमिनो पिज्जा बेचनेवाली सबसे बड़ी पिज्जा कंपनी ने जून, 2013 को खत्म हुए तीन महीनों में ही करीब चार सौ करोड़ के पिज्जा बेच दिये. एक साल पहले इन्ही तीन महीनों में ये कंपनी सिर्फ 314 करोड़ रुपये के पिज्जा बेच पायी थी. झमाझम पिज्जा खा रहे हैं लोग, तू रोटी को रोता है. मार्च, 2013 में खत्म हुए साल में इंडियन पब्लिक इस कंपनी के 1407 करोड़ रुपये के डोमिनो पिज्जा खा गयी. करोड़ों के पिज्जा देख, तू दो टके की रोटी पे रोता है.

उफ्फ, रोने का हक भी ना है क्या हमारा.

चोप्प, पब्लिक चेन्नई एक्सप्रेस देखकर धकाधक हंस रही है. सात दिनों में चेन्नई एक्सप्रेस अकेले इंडिया में 150 करोड़ रुपये की कमाई के स्टेशन को पार कर गयी, एक था टाइगर को 150 करोड़ रुपये के स्टेशन पर पहुंचने में दस दिन लगे थे. मस्त रहने का एक ही तरीका है, चेन्नई एक्सप्रेस में बैठकर पिज्जा खा.

उफ्फ, मेरी इकोनोमी को ठप्प है.

चोप्प, हमारे सैंपल सर्वे के हिसाब से इकोनोमी चकाचक है.

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.