/रोबर्ट वाड्रा हफ्ता वसूलते हैं: अशोक खेमका

रोबर्ट वाड्रा हफ्ता वसूलते हैं: अशोक खेमका

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े गुडग़ांव के विवादित जमीन करार मामले में हरियाणा के आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने रविवार को कहा कि सच्चाई को सामने लाने के लिये आपराधिक जांच की जरूरत है. एक टीवी न्यूज चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा, ”यदि आपको कार्रवाई करनी है, तो नैतिकता का तकाजा ये है कि इसकी शुरुआत ऊपर से, एकदम ऊपर से होनी चाहिए. नीचे के लोगों पर कार्रवाई करना काफी आसान होता है, लेकिन बात जब ऊंचे दर्जे की आती है तो धोखे को धोखा कहने के लिये साहस और हिम्मत की जरूरत होती है.” खेमका ने कहा कि वह जानते थे कि कांग्रेस अध्यक्ष के दामाद को निशाना बना रहे हैं और इससे उनका करियर प्रभावित होगा.

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खेमका ने रोबर्ट वाड्रा पर गंभीर आरोप लगते हुए कहा कि वाड्रा ने लैंड डील से जो पैसा बनाया है, वह किसी बिजनस वेंचर से पैसा बनाने जैसा बिल्कुल नहीं है. यह एक तरह से ‘हफ्ता वसूलने’ जैसा है.

खेमका ने कहा कि ‘यह बिजनस कतई नहीं है. यह बिचौलिए का कमीशन भी नहीं है. बिचौलिया भी कुछ काम करता है. मुझे लगता है कि इसकी तुलना ‘हफ्ता वसूलने’ से की जा सकती है. यह इस तरह है कि आप यहां बिजनेस कर रहे हैं, तो कुछ पैसे भी चुकाइए. इसमें कहीं कोई सर्विस नहीं है.’

खेमका ने कांग्रेस के इन आरोपों को खारिज किया कि वह बीजेपी के उकसावे पर यह सब कर रहे हैं. खेमका ने कहा कि 22 साल के करियर में उनका 44 बार ट्रांसफर हुआ है. हरियाणा में सहयोगी दल के तौर पर बीजेपी के सत्ता में आने पर भी उनका ट्रांसफर हुआ. खेमका ने कहा कि जब राज्य में अगली सरकार आएगी और वह इसी तरह ईमानदारी से अपना काम करते रहेंगे, तो उन्हें कांग्रेस का एजेंट करार दिया जाएगा.

अशोक खेमका ने पिछले साल अक्टूबर मे वाड्रा और रियल इस्टेट क्षेत्र की दिग्गज कंपनी ‘डीएलएफ यूनिवर्सल लिमिटेड’ के बीच हुये जमीन के दाखिल-खारिज से जुड़े करार को रद्द कर दिया था.

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने जल्दबाजी में कार्रवाई की या बदले की भावना से, इस पर खेमका ने कहा, ”कोई और जांच करा लीजिए और यदि मैं गलत साबित हुआ तो आप मुझे दंडित करें.” खेमका ने कहा कि गुडग़ांव में एक वाणिज्यिक कॉलोनी के लाइसेंस पर बड़ा प्रीमियम हासिल किया गया है.

पिछले साल अक्टूबर में हरियाणा सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच कमेटी को अपने जवाब में उन्होंने कहा था कि फरवरी 2008 में गुडग़ांव के शिकोरपुर गांव में स्काइलाइट हॉस्पिटेलिटी की ओर से खरीदी गई 3.5 एकड़़ जमीन एक ”दिखावटी बिक्री” थी. ये सौदा एक अनुमान के आधार पर हुआ था, जिसे ”आपराधिक जांच” कर साबित किये जाने की जरूरत है. यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो फौजदारी अदालत को इसे सौंपना चाहिये.

मेरे आदेश के विरोध में हाईकोर्ट जाना चाहिये था

यह पूछे जाने पर कि उन्होंने उस वक्त जमीन की दाखिल-खारिज रद्द की, जब उन्हें कार्रवाई करने का अधिकार नहीं था और उनका तबादला हो गया था, इस पर खेमका ने कहा कि वह ऐसा करने के लिए पूरी तरह अधिकृत थे. भू-चकबंदी मामलों के महानिदेशक रहे खेमका का पिछले साल 11 अक्तूबर को तबादला किया गया था और उन्होंने 15 अक्तूबर को जमीन की दाखिल-खारिज रद्द की थी. उन्होंने कहा, ”मैंने अपना प्रभार 15 अक्टूबर को सौंपा और मुझे उस दिन तक उक्त पद पर काम करने का अधिकार था.” खेमका ने कहा कि डीएलएफ या वाड्रा की कंपनियों को उनका आदेश दरकिनार करवाने के लिए हाईकोर्ट जाना चाहिए था.

(एजेंसी)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.