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राज्यरानी एक्सप्रेस से कटकर करीब 37 लोगों की मौत…

पटना. बिहार के सहरसा में दर्दनाक रेल हादसा हुआ है. यहां धमारा घाट रेलवे स्टेशन पर राज्यरानी एक्सप्रेस से कटकर करीब 37 लोगों की मौत हो गई है. ये ट्रेन सहरसा से पटना आ रही थी. धमारा घाट रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर सैकड़ों की संख्या में मंदिर में जल चढ़ाने जा रहे लोग और कांवड़िए मौजूद थे. तभी राज्यरानी एक्सप्रेस आई और इससे कटकर 37 लोगों की मौत हो गई. इसके अलावा हादसे में 25 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.dhamoraghat railway station

इस हादसे के बाद लोगों में भारी आक्रोश है. गुस्साए लोगों ने ड्राइवर को पीट-पीटकर मार डाला. लोगों ने रेल कर्मचारियों को भी जमकर पीटा. इसके अलावा भीड़ ने राज्यरानी एक्सप्रेस और यहां खड़ी एक और ट्रेन में आगजनी की. इस वक्त भारी संख्या में लोग धमारा स्टेशन पर जमा हैं और माहौल गर्म है.

जानकारी के मुताबिक सोमवार होने के चलते सहरसा के धमारा घाट इलाके में श्रद्धालु कात्यायनी मंदिर में जल चढ़ाने चल रहे थे. कई लोग ट्रैक से ही स्टेशन को पार कर रहे थे. तभी राज्यरानी एक्सप्रेस आ गई और करीब 37 लोग इसकी चपेट में आ गए. हादसे के बाद ट्रेन को मौके पर ही रोक दिया गया है.

आक्रोशित लोगों ने रेलवे ट्रेक को बाधित कर रखा है. इस रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही पूरी तरह बाधित हो चुकी है.

दरअसल, धमारा में भारी बारिश की वजह से सभी सड़के बंद थीं, आवागमन का कोई और साधन नहीं था, इसलिए लोग ट्रैक को पार कर मंदिर जा रहे थे. धमारा स्टेशन पर इस एक्सप्रेस ट्रेन का कोई स्टॉपेज भी नहीं है.

उधर, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अरुणेंद्र कुमार ने बताया कि लोग ट्रैक पर चल रहे थे. यहां मेला चल रहा था. ये 2-3 लाइन का स्टेशन है. रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है. राज्य सरकार से जो अपेक्षा थी वो पूरी नहीं हुई.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.