/कोलगेट से जुड़ी ग्यारह सौ फाइलें गायब करने का जिम्मेदार कौन…

कोलगेट से जुड़ी ग्यारह सौ फाइलें गायब करने का जिम्मेदार कौन…

पहले कोयला ब्लॉक आवंटन मामले की रिपोर्ट में फेरबदल करने की वजह से कानून मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था मगर अब तो कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ी ग्यारह सौ फाइलें ही गायब हो गई हैं.coal-scam

भारतीय जनता पार्टी ने कोयला ब्लॉक आवंटन फाइलें गुम होने के मामले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सदन में आकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.

विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने सदन की कार्यवाही साढे ग्यारह बजे फिर शुरू होने पर कोयला ब्लॉक आवंटन फाइल गुम होने का मामला उठाया. उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच उच्चतम न्यायालय की देखरेख में हो रही है. पहले कानून मंत्री को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले की रिपोर्ट में फेरबदल करने की वजह से कानून मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था और अब फाइलें गायब होने का मामला सामने आया आया है.

उन्होंने अध्यक्ष मीरा कुमार से आग्रह किया कि वह सरकार को निर्देश दे कि फाइल गायब होने के मामले में प्रधानमंत्री सदन को आकर स्थिति स्पष्ट करें. उन्होंने कहा कि आवंटन से जुडी जो 147 फाइलें गायब हुई हैं. उनसे कांग्रेस का कोई न कोई बडा आदमी शामिल है.

विपक्ष की नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री को सदन को आश्वस्त करना चाहिए और यह बताना चाहिए कि गुम हुई फाइलें कैसे वापस आयेंगी. इसके बाद भाजपा के सदस्य अपने स्थानों पर खड़े होकर नारेबाजी करने लगे.

भारी शोरशराबे के बीच जनता दल यू के सदस्य दिनेश चंद यादव ने खगड़िया जिले में कल हुई रेल दुर्घटना का, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के गुरुदास दास गुप्ता ने देश की आर्थिक स्थिति तथा मूल्यवृद्धि, अन्नाद्रमुक के थम्बीदुरई और द्रमुक के टी के एस ईलनगोवन ने श्रीलंका में होने वाले राष्ट्रकुल सम्मेलन में प्रधानमंत्री के भाग नहीं लेने की मांग की. समाजवादी पार्टी के रेवती रमण सिंह ने डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट का मुद्दा उठाया और इस पर श्वेत पत्र लाने की मांग की.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.