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अन्ना के आन्दोलन का विरोध क्यों कर रहे है दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक?

By   /  August 27, 2011  /  12 Comments

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– सुरेश राव ।।

अन्ना विरोधी रैली

देश में जो अन्ना टीम का आन्दोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहा है.शुरू से ही देश के तमाम संगठन उसका विरोध कर रहे है.और उसमे भी महत्वपूर्ण बात ये है ये संगठन दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों से सम्बंधित है। ये संगठन शुरू से ही अन्ना के आन्दोलन के खिलाफ हैं – बामसेफ , इंसाफ व लगभग 13 दूसरे संगठनो ने दिल्ली में जंतर -मंतर पर अन्ना के आन्दोलन के खिलाफ 1 से 5 अगस्त तक धरना प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति और प्रधानमत्री को ज्ञपन दिया।

इन ज्ञापनों में इन संगठनों ने साफ -साफ कहा कि अन्ना का आन्दोलन इस बहुसंख्यक समुदाय के खिलाफ एवं भारतीय संविधान की मंशा के विपरीत है। अनुसूचित जाति और जनजाति कर्मचारी परिसंघ शुरू से ही उदित राज के नेतृत्व में अन्ना एवं उनके बिल का विरोध कर रहे है। उनकी जस्टिस पार्टी भी शुरू से ही इसका विरोध कर रही है।

26 अगस्त को मुंबई में तमाम संगठन अन्ना टीम के खिलाफ आन्दोलन किया। 1 सिप्ताबर को दिल्ली में भारत मुक्ति मोर्चा माननीय वामन मेश्राम, एच.डी.देवेगौड़ा, शरद यादव, रामविलास पासवान आदि के नेतृत्व में अन्ना टीम के विरोध में बड़ी रैली करने जा रहे है।

आखिर क्या कारण है कि देश के दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक अन्ना के विरोध में है? टीम अन्ना से अलग हुए स्वामी अग्निवेश ने सामाजिक न्याय के मुद्दे पर इस टीम को छोड़ा है। मतलब साफ है कि अन्ना और उनकी टीम सामाजिक न्याय से कोई वास्ता नहीं रखती। शायद यही कारण है कि अन्ना आरक्षण विरोधी लोगों के साथ हैं।

जब गुजरात में मुसलमान मारे जा रहे थे, उड़ीसा में इसाई मरे जा रहे थे, मुंबई से उत्तर भारतीय भगाए जा रहे थे तब अन्ना जी के पास इन्सान और इंसानियत के लिए बिलकुल समय नहीं था। इन्सान और इंसानियत से महत्वपूर्ण भला और कुछ हो सकता है क्या ? लेकिन अन्ना और उनकी टीम का इसमें कोई इंटेरेस्ट नहीं है.. अन्ना जी का ..एन.जी.ओ. चलाने वाले और कॉरपोरेट जगत को लोकपाल के दायरे से अलग रखना भी संदेह पैदा करता है।

शायद सही समय अग्निवेश जी को बुद्धि आई और उन्होंने अन्ना का साथ छोड़ दिया। दलित, आदिवासी, पिछड़े व अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा देश में बड़े पैमाने पर हो रहे विरोध को देख कर एसा लगता है कि इस देश का बहुसंख्यक समुदाय अन्ना और उनके बिल के पूरी तरह खिलाफ है। सरकार जो भी निर्णय करे परन्तु उसे लोकतंत्र की गरिमा और बहुशंख्यक समुदाय की भावनाओं का ध्यान तो रखना ही होगा, वरना अगले चुनाव में जनता अपना निर्णय देगी।

(लेखक इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच में एडवोकेट हैं)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

12 Comments

  1. virendra bankar says:

    अन्ना कोई सोशल सर्विस नहीं कर रहा. वोह तो constitution बदलने के पीछे पड़ा है. उसे लगता है के हम जय भीम वाले बुद्धू है. और कुछ नहीं समझते है. पर उसे भी इसका तगड़ा जवाब मिलेगा.हम उसे ऐसे नहीं छोड़ेंगे. मायावती बहन ने कहा ही है कि हिम्मत है तो एलेक्ट होके दिखाओ फिर बात करेंगे.

  2. p yadav says:

    मान्यवर जी , आपने कहा “जब गुजरात में मुसलमान मारे जा रहे थे, उड़ीसा में इसाई मरे जा रहे थे, मुंबई से उत्तर भारतीय भगाए जा रहे थे तब अन्ना जी के पास इन्सान और इंसानियत के लिए बिलकुल समय नहीं था”लेकिन उन्होंने (अन्नाजीने )कभी इस प्रकार की घृणित कृत्यों का कभी न्यायसंगत बता कर अपरोक्ष रूप से समर्थन नहीं किया .
    २. जब कश्मीर में हिन्दुओ को भगाया ,मारा ,जलील किया ,.गोधरा में हिन्दुओ को जिन्दा जलाया गया ,८४ में अल्पसंख्यको (सिख्खो) को मारा गया (क्या सिर्फ मुस्लमान या ईसाई ही अल्पसंख्यक होते है ) 3) तब आप लोग अकहा थे ,.?

  3. Suresh Rao says:

    ३१ अगस्त २०११ , झुलेलाल पार्क , लखनऊ, दलित/ आदिवासी/ पिछड़े व अल्पसंख्यक समुदाय से सम्बंधित लगभग २६ संगठन , इंसाफ , अर्जक संघ अनुसूचित जाती एंड जनजाति कर्मचारी संघ , बहुजन छात्र मोर्चा ,दलित जकात , कुशवाहा महासभा , बौध महासभा , जाटव महासभा , विश्व शुद्र महासभा , सविता महासभा , बहुजन महिला मोर्चा, पाल महासभा , बहुजन अधिवक्ता संघ , आंबेडकर विचार मंच , बहुजन मुक्ति मोर्चा , इत्यदि ने अन्ना और उनके बिल के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया .वक्तावो ने अन्ना और उनके बिल को पूरी तरह से नकार दिया और कहा की इस देश का संविधान और पर्लिअमेंट इस तरह की सभी समस्यायों से निपटने में सछम है इसलिए हमें अन्ना और उनके बिल की कोई जरूरत नहीं है. और न ही हमारा अन्ना और उनके बिल में बिश्वास है.और इन संगठनो ने अन्ना और उनके बिल के बिरोध में भारत के राष्ट्रपति को एक मेमोरंडम भी ए.डी.एम्.लखनऊ के माध्यम से भेजा, जिसे ऐ.डी.एम्. ने धरना स्थल से स्वयं प्राप्त किया . धन्यवाद ………लखनऊ के तमाम मीडिया कर्मी वहां मौजूद थे लेकिन ये खबर कही प्रकाशित नहीं हुई……… वह रे भारत का मीडिया …………

  4. Indrajeet kaushal daniel says:

    भ्रष्टाचार से कौन नहीं ऊबा है ? और लोकपाल माफ़ी चाहूँगा जन लोकपाल बिल के लागु हो जाने के बाद भ्रष्टाचार समाप्त हो जायेगा इस बात की क्या गारंटी है I जन लोकपाल अधिकारीयों पर नज़र रखेगा और पता करेगा की कौन कितना भ्रष्ट है I अभी सौ रुपये दे कर काम हो जाता है फिर तीन सौ देने पड़ेंगे सौ तो बाबु के लिए दो सौ लोकपाल के लिएI भ्रष्टाचार अभी शबाब पर आयेगा फिर इन अन्ना जी के समर्थक क्या करेंगे I शायद फिर जन लोकपाल के ऊपर एक और लोकपाल बनाने के लिए आन्दोलन करेंगे I

  5. Raj Kumar Gautam says:

    लेखक ने जो सवाल किये है उनको अनदेखा भी नहीं किया जा सकता है. anna ke andoalan ka akhir is desh me dalit aur pichhde virodh kyo kar rahe hai …. ye to janne ki koshish kani chahiye.ya nahi…..? Dhanywad andolan shuru hone se lekar poore desh me lagatar virodh ho raha hai…..wo kyon?

  6. mrs. asha dhandore says:

    यह आन्दोलन भ्रष्टाचार के खिलाफ है! दलित या भारतीय संविधान के खिलाफ नहीं है! अगर आप यही सोच रखोगे तो भारत भ्रष्टाचार मुक्त कभी नहीं होगा. आज हर कोई भ्रष्टाचार से उब गया है! इसलिए तो पुरे भारत से अन्नाजी को बहुत बड़ा समर्थन मिला है!
    In 1982, In Singapore, LOKPAL BILL was implemented and 142 Corrupt Ministers & Officers were arrested in one single day.. Today Singapore has only 1% poor people & no taxes are paid by the people to the government, 92% Literacy Rate, Better Medical Facilities, Cheaper Prices, 90% Money is white & Only 1% Unemployment exists.. Re Post this if you want to live in a corruption free country.. !!
    आज अगर हमे आगे बढना है तो पुराणी बाते भुलाकर बदलते ज़माने के साथ अपानेआपको भी बदलना होगा.
    और आज जब अन्नाजी ने यह मुद्दा उठाया है तब “जब गुजरात में मुसलमान मारे जा रहे थे, उड़ीसा में इसाई मरे जा रहे थे, मुंबई से उत्तर भारतीय भगाए जा रहे थे तब अन्ना जी के पास इन्सान और इंसानियत के लिए बिलकुल समय नहीं था” यह सारी बाते आयी कहाँसे? यह मुद्दा इन सभी बातो से बहुत अलग है! अगर कोई आगे बढ़कर किसी गलत बातो को सुधारना चाहता है! तो आप अबतक जो कुछ भी हुआ तब अन्ना सामने नहीं आये अभी क्यूँ? ऐसे सवाल खड़े करोगे जिनका कोई सम्बन्ध ही नहीं इन सब बातो से तो इसका क्या मतलब?
    अगर आज हम भ्रष्टाचार मुक्त समाज बना पाते है तो हमे और हमारी आनेवाली पीढ़ी को भी इन सब से झुलसना नहीं पड़ेगा.
    छोड़ो कल की बाते कल की बात पुरानी नए दौर में लिखेंगे मिलकर नयी कहानी.
    हम भारतीय सभी मिलकर भारत भ्रष्टाचार मुक्त बनाये!
    वन्दे मातरम

    • sushil says:

      वेल said सर जी , पता नहीं अन्ना जी के आन्दोलन में जात पांत को कहाँ से लाके जोड़ दिया लोगों ने, ये आम आदमी की सिस्टम से लड़ाई है , जो आज नहीं मान रहे हैं वो कल जरुर मानेंगे.

    • Rahul S Wadhave says:

      मैं आपको बताना पसंद करूँगा की जो लोग अपना इतिहास भूल जाते है वो अपना इतिहास नहीं बना सकते / आखिर ये पिछड़ी जाती को क्या मिलनेवाला है ? आज हम बोलते है की हम स्वर्तन्त्र है क्या सही में पिछड़ी जाती के लिए ये लागु पड़ता है ? आज भी उन्हें पानी या मंदिर में प्रवेश नहीं मिलता है क्या इसको हम स्वंत्रता कह सकते है ? आशा जी आपन कहती है की छोड़ो कल की बाते कल की बात पुराणी मई आपसे पूछता हु की यहाँ के समाज ने उनकी मनु वादी सोच छोड़ी है क्या ? अगर आपन ओना इतिहास नहीं भुलाना चाहते है तो हम क्यों अपना इतिहास भूले ?

  7. Dr.O.P.Verma says:

    वास्तविकता को झुटलाया नहीं जा सकता ,आपके तर्कों मैं सच्चाई दिखती है

    • J.P. Sharma says:

      आपको क्या लगता है दलित पिछड़े और अल्पसंख्यक लोग भ्रष्टाचार से पीड़ित नहीं है, अगर सरकार और व्यवस्था इन लोगो के लिए चलायी जा रही योजनाओ को सही तरीके से लागू करती और फायदा देती तो क्या उनको आरक्षण की जरुरत होती ? उदितराज जैसे लोग राजधानी में बैठकर सिर्फ डींगे हांक सकते है ।

      • Dr.O.P.Verma says:

        क्या आपको लगता है की सरकार को ऐसी सामाजिक व्यवस्था को ठीक करने के लिए दूसरे आन्दोलन की ज़रुरत है और क्या ऐसे आन्दोलन मैं ऐसी ही भीड़ उमड़ेगी. मेरे ख्याल से नहीं उमड़ेगी क्योंकि वास्तविकता यही है की हम सदियों पुरानी मानसिकता को अपने अंतर्मन से नहीं हटा पाते —कथनी और करनी मैं बहुत फर्क होता है.मुझे नहीं लगता की स्वामी अग्निवेश इस तरह का आन्दोलन करने में सफल साबित होंगे

      • Rajesh kumar Ahirwar says:

        जी श्री मान प्रताड़ित हैं लेकिन इस आन्दोलन से इनको निजात नहीं मिलना है बल्कि भ्रसटाचार का सामना करना और अधिक करना होगा भ्रटाचार और बढेगा २ की जगह ३ रिश्वत देनी होगी ब्लैकमेलिंग बढेगी जैसे आज आई टी आई का हाल है और तो और इनके अधिकारीयों/कर्मचारियों को जबरन फंसाया जायगा क्या सामाजिक मुद्दे आज ख़तम हो गए हैं नहीं लेकिन इससे क्या लेना देना है अन्ना को यही ना रही आरछान की बात तो सदियों से आपको अर्थात मनुवादियों को आरक्छन रहा तब क्यों नहीं किसी ने सबाल किया और आरक्छन तो गांधीजी ने ही दिलवाया है अर्थात पूना पैक्ट करके अन्यथा बाबा साहेब ने तो आरक्छन की बात ही नहीं कही थी सिर्फ एस टी एस सी ओ बी सी को सैप्रईट एंड दो मत्त का ही अधिकार माँगा था तो क्यों गाँधी जी ने अन्ना की तरह यरवदा जेल में आमरण अनशन किया गाँधी जी तो हिंशा के खिलाफ थे तो क्यों दलितों की छोप्नियाँ …..

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