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पीली बत्ती वाले एसडीएम! देखते ही भागे…

By   /  August 22, 2013  /  2 Comments

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-प्रतीक चौहान||

रायपुर. रूतबा और ओहदा दिखाने के लिए लोग कुछ भी करने को तैयार हो जाते है. रूतबा भी ऐसा कि ट्रैफिक पुलिस भी नहीं रोक सकती. हम बात कर रहे है राजधानी की सड़कों पर धूम रही एक गाड़ी की जिसमें छत्तीसगढ़ शासन, एसडीएम लिखा हुआ है.SDM

आरटीओ के नियमों के मुताबिक गाड़ी में नंबर प्लेट पर कुछ नंबर के आलावा कुछ भी नहीं लिखा हुआ होना चाहिए. लेकिन यहां छत्तीसगढ़ शासन, एसडीएम लिखा हुआ है. वो भी किसी सरकारी गाड़ी में नहीं. बल्कि एक प्राइवेट गाड़ी में. नियमों के मुताबिक चाहे वो एसडीएम हो या कलेक्टर कोई भी अपनी निजी गाड़ी में नंबर प्लेट की जगह अपना पद नाम नहीं लिखवा सकता. लेकिन भला एसडीएम लिखकर घूमने वालों को इसकी परवाह कहाँ.

सोमवार शाम लगभग 4.30 बजे जयस्तंभ चौक पर कोरिया जिले के भरतपुर की गाड़ी क्रमांक सीजी 16 बी 3170 जो कि कौशल प्रसाद पटेल के नाम से आरटीओ में रजिस्टर्ड है. इस गाड़ी में सामने की ओर नंबर प्लेट की जगह बड़े-बड़े अक्षरों में छत्तीसगढ़ शासन, एसडीएम की तख्ती लगी हुई थी. इतना ही नहीं गाड़ी में बकायदा पीली बत्ती भी लगी हुई थी. गाड़ी 15 मिनट तक जयस्तंभ चौक स्थित तार घर के पास खड़ी हुई थी. जैसे ही मेरी नजर इस गाड़ी पर पड़ी तो तुरंत इस गाड़ी की फोटो ली. गाड़ी में बैठे ड्राइवर ने जैसे ही देखा कि गाड़ी की फोटो खीची जा रही है. उसने तुरंत गाड़ी स्टार्ट कर भागने की कोशिश की.

SDM1उस वक्त गाड़ी में ड्राइवर के आलावा तीन और अन्य लोग बैठे हुए थे. गाड़ी 2 मिनट बाद जयस्तंभ चौक के सिगनल पर जा कर खड़ी हो गई. लेकिन किसी भी ट्रैफिक पुलिस की हिम्मत नहीं हुई कि इस गाड़ी को रोके और पूछे कि ये कौन से एसडीएम साहब की गाड़ी है. जो पीली बत्ती में धूम रहे है. नियमों के मुताबिक एसडीएम को भी पीली बत्ती की पात्रता नहीं है. एसडीएम केवल अपनी सरकारी गाड़ी में लाल और नीली बत्ती लगा सकते है.

इन्हें है पीली बत्ती की पात्रता

छत्तीसगढ़ सरकार ने पीली बत्ती की पात्रता सूची में राज्यपाल के प्रमुख सचिव/सचिव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव/सचिव, राज्य शासन के अपर मुख्य सचिव, गृह, जेल और परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव, राज्य के समस्त संभागीय आयुक्त, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक  (ऑपरेशन), पुलिस महानिरीक्षक (जोन), जिला मजिस्ट्रेट, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, पुलिस उप महानिरीक्षक (रेंज), जिला पुलिस अधीक्षक, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा के महानिदेशक तथा जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं के महानिदेशक शामिल हैं.

संसद में हुआ था हमला

13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हमला करने वाले अतंकवादियों ने भी एक एंबेसेडर गाड़ी में पीली बत्ती लगाकर संसद भवन में प्रवेश किया था. और इसमें आए 5 आतंकवादियों ने 45 मिनट तक लोकतंत्र के इस मंदिर पर गोलियों-बमों से थर्रा कर रख दिया था. आतंक के नापाक कदम उस दिन लोकतंत्र के मंदिर की दहलीज तक पहुंच गए थे. बावजूद इसके न तो राज्य सरकार और न ही केंद्र सरकार ऐसी प्राइवेट गाडिय़ों में लगी पीली और लाल बत्ती लगाने वाले लोगों पर कार्रवाई करती है. शायद इन्हें किसी और आतंकी हमले का इंतजार है.

ये कहते है अधिकारी

कोई अपनी प्राइवेट गाड़ी में पीली बत्ती नहीं लगा सकता है. यदि कोई ऐसा कर रहा है तो ये नियमों के खिलाफ है.

बीसी साहू, एसडीएम, रायपुर

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. ये बोल वचन सुनते सुनते तो मेरे कान पक गए, आखिरकार मीडिया में तो मैं भी शामिल हूँ और ये तो अधिकारियो की कार्यप्रणाली में शामिल है कि मामला संज्ञान में नहीं है, यदि शिकायत मिली तो जांच कर कार्यवाही की जाएगी या फिर मामला बेहद गंभीर है, आरोपियों को बख्शा नहीं जायेगा। क्या हर बार एक ही शब्दों को इस्तेमाल करना और आश्वासन दे देने से पीड़ित संतुष्ट हो जायेगा, अधिकारी कब समझेगे की त्वरित कार्यवाही नहीं की तो देर से मिला न्याय नहीं होता।।।।।।।।।।।।।.

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