/उमा भारती ने आसाराम बापू को नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दी क्लीन चिट…

उमा भारती ने आसाराम बापू को नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दी क्लीन चिट…

उमा भारती ने जिस तरह से आसाराम बापू को नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया है, उससे लगता है कि इस देश में अब अदालतों की जरूरत नहीं रही और आरोपी ने अपराध किया है या नहीं इसे तय करने का काम देश के राजनेताओं पर छोड़ दिया जाना चाहिए…

नाबालिग लडकी से दुष्कर्म जैसे घिनौने आरोप में फंसे आसाराम बापू को उमा भारती ने बिना किसी तर्क के बेगुनाह करार दे दिया है. उमा भारती ने बयान दिया है कि आसाराम बापू को फंसाया गया है.asaram-bapu

लेकिन हैरत की बात है कि एक मासूम नाबालिग बच्ची से बलात्कार का आरोप लगने की पड़ताल तो पुलिस कर रही है मगर इस गंभीर आरोप की जांच में सहयोग करने के बजाय अब राजनीति शुरू हो गयी है. बीजेपी नेता उमा भारती ने उन्हें निर्दोष बताया है. तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इशारों में निशाना साधते हुए कहा कि साधु-संतों को ऐसा आचरण करना ही नहीं चाहिए जिससे इस तरह की नौबत आए.

आसाराम का बचाव करते हुए उमा भारती ने ट्वीट भी किया है कि ‘संत आसाराम बापू निर्दोष. सोनिया और राहुल गांधी के विरोध की उनको सजा मिली. कांग्रेसी राज्यों में उन पर झूठा केस दर्ज. संत उनके साथ हैं.’ मगर अपने इस बयान में उमा भारती ने एक बार भी उस बच्ची के बारे में जिक्र तक नहीं किया है, जिसने जोधपुर आश्रम में अपने साथ हुए इस दुराचार का आरोप बापू आसाराम पर लगाया है.

अशोक गहलोत ने कहा, ‘उन्होंने जोधपुर पुलिस को निर्देश दिए हैं कि निष्पक्ष जांच करें और सच्चाई के अनुसार कार्रवाई हो.’ आसाराम की गिरफ्तारी के मामले में कहा कि पुलिस तफ्तीश कर रही है और तफ्तीश के बाद ही कुछ भी तय होगा. गहलोत ने आसाराम पर इशारों में निशाना साधते हुए कहा, ‘मेरा मानना है कि साधु-संतो को ऐसा आचरण करना हीं नही चाहिए जिससे इस तरह की नौबत आए. बहुत सारे साधु-संत हैं जो कभी विवादों में नही पड़ते. संत किसी भी धर्म के हों लेकिन इस तरह के विवाद से भक्तों को ठेस पहुंचती है.’

गौरतलब है कि जब मीडिया दरबार ने हरी चटनी के साथ चार समौसे खाने की सलाह देकर निसंतान दम्पतियों से दाम वसूलने वाले निर्मल बाबा की पोल खोल अभियान चलाया था और जब यह अभियान चारों तरफ फ़ैल गया था तो अपनी उमा भारती जी जिस तरह से निर्मल दरबार वाले ढोंगी निर्मल बाबा के पक्ष में बयान देने लगी थी कि यह हिन्दू साधू संतों पर आक्रमण है. ठीक उसी तरह उमा जी अब आसाराम को बचाने आगे आ गईं हैं.

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.