/आसाराम के समर्थक गुंडागर्दी पर उतरे, इंडिया टीवी की ओबी वैन तोड़ी…

आसाराम के समर्थक गुंडागर्दी पर उतरे, इंडिया टीवी की ओबी वैन तोड़ी…

आसाराम बापू के लगभग दो हज़ार समर्थको ने संसद मार्ग पर जम कर हंगामा मचाया. आसाराम के इन समर्थकों ने मीडिया के खिलाफ जम कर नारे लगाये तथा इंडिया टीवी की ओबी वैन को तोड़ डाला. कई कैमरामैनों के कैमरे तोड़ डाले. आसाराम बापू के समर्थकों ने मीडिया पर हिन्दू साधू-संतों को बदनाम करने के आरोप भी लगाये.

asaram bapu

इससे पहले आसाराम के समर्थक शुक्रवार को मध्य दिल्ली के कमला बाजार पुलिस थाने के बाहर इकट्ठे हो गए, जहां एक नाबालिग युवती ने आसाराम बापू के खिलाफ यौन प्रताड़ना की शिकायत दर्ज कराई थी. समर्थकों ने थाने में दर्ज़ रिपोर्ट रद्द करने की मांग की.

ये समर्थक सुबह लगभग 10 बजे कमला बाज़ार पुलिस थाने के बाहर इकट्ठे हुए और पुलिस एवं मीडिया के खिलाफ नारेबाजी की. उन्होंने उन पर आसाराम की छवि खराब करने की कोशिश करने का आरोप लगाया. इसके बाद, ये सभी जंतर-मंतर की तरफ चले गए और इसके बाद इन्होने वहां जम कर हंगामा मचाया.

शिकायत के मुताबिक, यौन शोषण की घटना 15 अगस्त को उस वक्त हुई थी, जब यह किशोरी राजस्थान के जोधपुर स्थित एक आश्रम में उपचार के लिए गई थी. लड़की उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले की रहने वाली है और वह अपने परिवार के साथ आसाराम से मिलने गई थी.

पुलिस के मुताबिक आसाराम उपचार के लिए लड़की को अलग कमरे में ले गए और उन्होंने उसके साथ यह कृत्य किया. आसाराम के एक प्रवक्ता ने कहा कि लड़की की शिकायत उन्हें बदनाम करने की कोशिश है.

दूसरी तरफ आसाराम बापू ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए बलात्कार के आरोप को निराधार बताते हुए कहा कि अगर मैं दोषी हूं तो साबित करके दिखाओ. उन्होंने कहा पोती की उम्र की लड़की से ऐसा क्यों करूंगा. उन्होंने कहा न्यूज चैनलों पर मेरे खिलाफ जो दिखाया जा रहा है उसकी उन्हें परवाह नहीं है. न्यूजों चैनलों पर निशाना साधते हुए आसाराम ने कहा कि वो ये सब केवल टीआरपी के चक्कर में कर रहे हैं.

आसाराम ने कहा कि ‘मैं निर्दोष हूं ऐसा भी नहीं बोल रहा हूं, और वो दोषी हैं ऐसा भी नहीं बोल रहा हूं, बस ये बोल रहा हूं कि अगर मैं दोषी हूं तो आरोप साबित करके दिखाओ.’ यही नहीं आसाराम ने अपनी तुलना महात्मा बुद्ध और सूरदास से कर डाली. आसाराम बापू ने कहा ‘सूरदास महाराज जी पर भी ऐसे आरोप लगे थे, उन्होंने अन्न जल छोड़ दिया था और फिर वो 100 साल तक जिए. महात्मा बुद्ध के साथ भी बहुत अन्याय हुआ था, उनपर भी बहुत आरोप लगे फिर भी वो आज भी हमारे दिल में हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.