/आसाराम की गिरफ्तारी के लिए जंतर मंतर पर प्रदर्शन…

आसाराम की गिरफ्तारी के लिए जंतर मंतर पर प्रदर्शन…

फेसबुक के ज़रिए उत्तराखंड के आपदा प्रभावित इलाकों में काम करने के साथ ही बूंद नाम के समूह ने जिस सामाजिक लड़ाई का बीड़ा उठाया था, उसका एक अहम पड़ाव होगा औज जंतर मंतर…जंतर मंतर पर आज 3 बजे से बूंद के सदस्य तमाम और साथियों और संगठनों के साथ मिल कर  फासीवाद, कट्टरपंथ और धर्मांधता के खिलाफ़ एकजुटता एवं विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं…protest

साथियों हमारे सामने विकट समस्याएं है और समय बेहद मुश्किल…एक ऐसा वक्त जब चारों ओर सियासत और मज़हबी कट्टरपंथ गठजोड़ कर के जनवादी ताक़तों को तोड़ने में लगा है…धर्म के ठेकेदार इंसानियत से खेल रहे हैं और सत्ता चुप है…कट्टरपंथ के खिलाफ बोलने वालों के सीने में गोलियां उतारी जा रही हैं…जबकि गरीब जनता की बात करने वाले हथकड़ियों में हैं…वहीं एक धर्म गुरु बलात्कार के आरोपों के बावजूद खुला घूम रहा है…उसके समर्थक लोगों से मारपीट कर रहे हैं..क्या हम ऐसे वक़्त में घर में बैठेंगे…हमारे आज के इस विरोध प्रदर्शन की 3 मांगें हैं…
1. आसाराम बापू की गिरफ्तारी
2. कलाकर्मी हेम मिश्रा की रिहाई
3. डॉ. दाभोलकर के हत्यारों की गिरफ्तारी

हमें और ख़ुद को दोनों को निराश मत कीजिएगा, जंतर मंतर आइए…आज दोपहर से जुटिए…दिखाइए जन विरोधी चालाक सत्ता और कट्टरपंथियों को कि हम न सोए हैं और न बेहोश हैं…हम लड़ेंगे…ज़रूर लड़ेंगे!

हम उम्मीद करते हैं कि आप साथ आएंगे…आज दोपहर 3 बजे…जंतर मंतर पर

जन्तर मंतर पर बूँद की तरफ से आयोजित इस एकजुटता और विरोध प्रदर्शन का दोपहर तीन बजे से मीडिया दरबार पर सजीव प्रसारण होगा जिसे इस लिंक के जरिये देखा जा सकेगा. सजीव प्रसारण देखने के लिए यहाँ क्लिक करें…

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.