/एम.पी. वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन विवादों के घेरे में…

एम.पी. वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन विवादों के घेरे में…

-दिवाकर गुप्ता || 

भोपाल. एम. पी. वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन (आईएफडब्ल्यूजे) के प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने आई. एफ. डब्ल्यू. जे. के राष्ट्रीय सचिव कृष्णमोहन झा की सहमति से प्रदेश की पूर्व की जिला एवं संभाग की इकाईयों को भंग कर दिया है. अब प्रदेश में नए सिरे से तहसील, जिला एवं संभाग इकाईयों का गठन किया जाएगा.Man-with-Newspaper

इस तीन लाइन को जरा गौर से पढ़कर समझ लें. प्रदेश में (आईएफडब्ल्यूजे) के नए प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने जिला एवं संभाग की सभी इकाईयों को भंग कर दिया है.

तौबा तौबा अब एम. पी. वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन (आईएफडब्ल्यूजे) के चुने हुए पदाधिकारी भी धूल चाटते नज़र आयेगें. खबर है कि पिछले दिनों भोपाल वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के चुनाव हुए. राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामगोपाल शर्मा और सदस्यता अभियान का संयोजक वरिष्ठ पत्रकार सतीश सक्सेना ने भोपाल में पत्रकारों की सदस्यता की और सेकड़ो पत्रकारों से फार्म भरवा लिए गए और फिर सूची बनाकर दिल्ली तक पहुचाई गई, पत्रकारों से फार्म भरवाने में भोपाल के कई पत्रकारों ने अहम् भूमिका निभाई, सूची को भोपाल पत्रकार भवन में चस्पा किया गया और फिर चुनाव प्रक्रिया अपनाई गई, चुनाव प्रभारी अवधेश भार्गव और प्रेम नारायण प्रेमी को बनाया गया और विधिवत निर्वाचन किया गया, इस चुनाव में निर्विरोध अध्यक्ष रमेश तिवारी को चुना गया, अध्यक्ष रमेश तिवारी भी लग्जरी गाड़ी में ढोल धमाके के साथ पत्रकार भवन परिसर में आये और पद ग्रहण किया, लगा भोपाल में पत्रकारों की तूती बोलेगी. अब विधिवत चुनाव हुए है. परन्तु फिर वही जिसको ढपली दी वो ही अपना राग गाने लगा. अब प्रश्न उठता है कि क्या मनोनीत प्रदेशाध्यक्ष निर्वाचित पदाधिकारियों की इकाई को भंग कर सके. जबकि भोपाल वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन एक स्वतंत्र इकाई है.

प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार सतीश सक्सेना को सदस्यता अभियान का संयोजक नियुक्त करते हुए नए सिरे से प्रभावी और पत्रकारिता को समर्पित पत्रकारों को जोडऩे और पुन: सदस्यता अभियान चलाकर नई इकाईयों के गठन की जिम्मेदारी सौंपी है. बस प्रदेश के पत्रकारों के पास यही काम बाकि रह गया है की वो अपनी सदस्यता कराये फिर उनकी सदस्यता निरस्त हो जाये, और सदस्यता निरस्त हो न हो किया फर्क क्या पड़ता है इन लोगो ने तो पहले भी की गई सदस्यता धारको को कोई आई कार्ड भी इशू नहीं किया. सब घर घर में होता रहा और करीब 350 पत्रकारों बेवकूफ बन गए.

एम. पी. वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की नई नियुक्तियो को एक विरोधी मानसिकता के संगठन अवैध बता रहा है. इंडियन फेडरेशन ऑफ़ वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की प्रदेश इकाई पुनः गठन प्रांतीय अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल एवं प्रांतीय महामंत्री रवीन्द्रं पंचोली एवं फेडरेशन के राष्ट्रीय सचिव कृष्णमोहन झा के नेतृत्व में किया जा रहा है. प्रदेश के सभी वर्किंग जर्नलिस्टों से एम. पी. वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन ने के सभी संभागों, जिलों, तहसील में इकाईयां गठित की जाने की अपील की है. राष्ट्रीय सचिव कृष्णमोहन झा ने जो मध्यप्रदेश में नियुक्तिया की है इनका मानना है की सभी अवैध है और ये नियुक्त पदाधिकारी को भोपाल और प्रदेश की किसी भी इकाई को भंग करने का अधिकार भी नहीं है जो नए प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने किया है. साथ ही वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के मिलते जुलते नाम वालों के सावधान किया है, वहीँ कामरेड विक्रम राव के संगठन के दवारा की जाने वाली नियुक्तियो अवैध ठहराने में लगा हुआ है.

भोपाल वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन के भोपाल चुनाव के प्रभारी रहे अवधेश भार्गव से बात की तो उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी घोषणा प्रांतीय अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल दवारा की गई है वो विधि विरुद्ध है इस पर ध्यान देने की जरुरत नहीं है. क्योकि उनको यह अधिकार नहीं है की वो किसी स्वतंत्र इकाई को भंग कर सके.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.